
Khejri tree cutting : राजस्थान में बाड़मेर जिले के शिव उपखंड के बरियाड़ा और खोड़ाल गांव में सोलर कंपनियों द्वारा खेजड़ी सहित अन्य पेड़ों की कटाई (Khejri tree cutting) के खिलाफ स्थानीय लोगों का गुस्सा भड़क उठा है। ग्रामीणों ने इस पर्यावरणीय नुकसान के विरोध में धरना शुरू किया है, जिसमें शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी भी शामिल हुए। रविवार (3 अगस्त 2025) को वे धरना स्थल पर पहुंचे और रात वहीं चारपाई पर गुजारी, जिससे इस मुद्दे को और बल मिला। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर ‘#खेजड़ी_बचाओ’ (#SaveKhejri) हैशटैग रविवार रात को टॉप ट्रेंड में रहा, जो इस आंदोलन की व्यापकता को दर्शाता है। इस तरह खेजड़ी बचाओ को लेकर ग्रामवासी एकजुट हो गए हैं।
Badmer News : बरियाड़ा और खोड़ाल गांव में सोलर कंपनियां ENGIE और JAKSON GREEN अपने सोलर प्लांट (Solar plant Barmer) स्थापित करने का काम कर रही हैं। इसके लिए कुछ किसानों ने अपनी जमीन लीज पर दी है। कंपनियां इस जमीन पर बाउंड्री वॉल बना रही हैं, लेकिन इस प्रक्रिया में खेजड़ी सहित कई पेड़ों को काटा जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनियां अंधाधुंध पेड़ काट रही हैं, जिससे क्षेत्र की पर्यावरणीय जैव विविधता (Biodiversity loss) को गंभीर नुकसान हो रहा है।

Ravindra Singh Bhati : किसानों के मुताबिक, बाउंड्री वॉल के कारण उनके खेतों तक पहुंचने के लिए केवल एक ही एंट्री गेट दिया गया है, जिसके चलते खोड़ाल गांव के किसानों को अपने खेतों तक पहुंचने के लिए 15 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ रहा है। यह जमीन खड़ीन क्षेत्र (Khadin area) में आती है, जो रेगिस्तानी इलाकों में बारिश के पानी को संग्रहित करने और वन्यजीवों के लिए पानी उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण स्रोत है। सूखे के समय यह क्षेत्र हरियाली बनाए रखने में भी मदद करता है।
बाड़मेर में खेजड़ी पेड़ों की कटाई का मामला अब केवल स्थानीय मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत (Environmental conservation) से जुड़ा राष्ट्रीय मुद्दा बन गया है। विधायक रविंद्र सिंह भाटी और ग्रामीणों का यह आंदोलन सोलर कंपनियों की मनमानी और पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन के खिलाफ एक बड़ा कदम है। इस मामले में प्रशासन और सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है, ताकि खेजड़ी जैसे महत्वपूर्ण पेड़ों को बचाया जा सके।

सबूत मिटाने के लिए पेड़ जलाए गए
Protest villagers in badmer : ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सोलर कंपनियों ने पकड़े जाने के डर से काटे गए खेजड़ी और अन्य पेड़ों को जला दिया। बरियाड़ा और खोड़ाल गांव के पास राख के ढेर मिले, जो इस बात का सबूत हैं। इस घटना ने ग्रामीणों के गुस्से को और भड़का दिया, और वे धरने पर बैठ गए। रविवार को जब विधायक रविंद्र सिंह भाटी, प्रशासनिक दल और ग्रामीण स्थल निरीक्षण के लिए पहुंचने वाले थे, तो कंपनियों को इसकी भनक लग गई। आरोप है कि उन्होंने सबूत मिटाने के लिए रात के अंधेरे में काटे गए पेड़ों को आग के हवाले कर दिया। ग्रामीण इसे एक सुनियोजित आपराधिक कृत्य (Environmental crime) मान रहे हैं, जो पर्यावरणीय सुरक्षा और कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है।
विधायक का बयान: दोषियों पर कार्रवाई तक संघर्ष जारी
MLA Ravindra Singh Bhati : शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा, “कुछ सोलर कंपनियां मुनाफे के लालच में कानून को ताक पर रख रही हैं। खेजड़ी जैसे पेड़ राजस्थान की सांस्कृतिक और पर्यावरणीय पहचान (Cultural heritage Rajasthan) का हिस्सा हैं। ये थार के पर्यावरणीय संतुलन के लिए अनिवार्य हैं। इस अपराध को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” उन्होंने यह भी कहा कि जब तक दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, उनका संघर्ष जारी रहेगा।
खेजड़ी का ऐतिहासिक महत्व
खेजड़ी पेड़ राजस्थान की सांस्कृतिक और पर्यावरणीय धरोहर का प्रतीक है। इसकी रक्षा के लिए इतिहास में बिश्नोई समाज ने बड़ा बलिदान दिया था। सितंबर 1730 में जोधपुर के महाराजा अभय सिंह के आदेश पर खेजड़ली गांव में खेजड़ी पेड़ काटे जा रहे थे। इसका विरोध करते हुए अमृता देवी और 362 अन्य लोगों ने पेड़ों से चिपककर अपनी जान दे दी थी। इस बलिदान के बाद महाराजा ने मारवाड़ में खेजड़ी पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी थी। इस घटना की याद में खेजड़ली में हर साल शहीदी मेला (Khejarli martyrdom) आयोजित होता है।
धरने को मिल रहा समर्थन
ग्रामीणों के धरने को न केवल स्थानीय लोगों, बल्कि सोशल मीडिया पर भी व्यापक समर्थन मिल रहा है। ‘#खेजड़ी_बचाओ’ हैशटैग के जरिए लोग इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठा रहे हैं। कई पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता इस आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि खेजड़ी पेड़ न केवल पर्यावरण के लिए जरूरी हैं, बल्कि ये रेगिस्तान में जीवन का आधार भी हैं। इनके बिना थार का पारिस्थितिकी तंत्र (Thar ecosystem) खतरे में पड़ सकता है।

प्रशासन का रवैया
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पेड़ काटने के विरोध में आवाज उठाने पर प्रशासन ने उल्टा उन्हें शांति भंग करने के दो नोटिस थमा दिए। इससे ग्रामीणों में और आक्रोश बढ़ा है। उनका कहना है कि प्रशासन सोलर कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रहा है, जिससे पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन हो रहा है।

