
Labour Codes 2026 : भारत में नौकरीपेशा लोगों और नियोक्ताओं के लिए एक बड़ा बदलाव आने वाला है। केंद्र सरकार ने काम के घंटे (Working Hours), सैलरी स्ट्रक्चर (Salary Structure), नाइट शिफ्ट (Night Shift) और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े नियमों में अहम संशोधन का संकेत दिया है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय (Ministry of Labour & Employment) ने देश के चार प्रमुख Labour Codes के तहत Draft Rules को आधिकारिक रूप से notified कर दिया है। सरकार ने इन ड्राफ्ट नियमों पर सभी stakeholders—कर्मचारी संगठनों, उद्योग जगत और राज्य सरकारों—से 30 से 45 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। इसके बाद अंतिम नियम जारी किए जाएंगे, जिन्हें 1 अप्रैल 2026 से लागू किए जाने की संभावना है।
किन-किन लेबर कोड्स के ड्राफ्ट नियम जारी हुए
New Labour Laws India : मंत्रालय द्वारा नोटिफाई किए गए ड्राफ्ट नियम इन चार प्रमुख लेबर कोड्स से जुड़े हैं—
- Code on Wages (वेज कोड)
- Code on Social Security (सोशल सिक्योरिटी कोड)
- Industrial Relations Code (इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड)
- Code on Occupational Safety, Health and Working Conditions (OSH Code)
इन नियमों के लागू होने से देश के श्रम कानूनों को एकीकृत और सरल बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

कब से लागू होंगे नए नियम
Work Hours Rules India : श्रम मंत्रालय के अनुसार, ड्राफ्ट नियमों पर मिली प्रतिक्रियाओं की समीक्षा के बाद मार्च 2026 में अंतिम अधिसूचना जारी की जा सकती है। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, इसके बाद सभी लेबर कोड्स के प्रावधान नए वित्त वर्ष की शुरुआत यानी 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो जाएंगे। तब तक पुराने श्रम नियम लागू रहेंगे। जैसे ही नई अधिसूचना जारी होगी, पुराने कानून स्वतः समाप्त माने जाएंगे।
लेबर कोड्स का मकसद क्या है
Salary Structure New Rules : लेबर कोड्स देश के लिए एक comprehensive legal framework तय करते हैं, जबकि ड्राफ्ट नियम बताते हैं कि इन कानूनों को जमीन पर कैसे लागू किया जाएगा। इनमें शामिल हैं—
- न्यूनतम वेतन (Minimum Wage)
- काम के घंटे (Working Hours)
- सामाजिक सुरक्षा (Social Security)
- स्वास्थ्य और सुरक्षा मानक (Safety & Health Standards)
- औद्योगिक विवादों का समाधान (Dispute Resolution)
न्यूनतम वेतन और फ्लोर वेज पर क्या बदलेगा
Code on Wages Draft Rules : 2025 के Draft Code on Wages (Central Rules) में न्यूनतम वेतन तय करने की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया गया है। यह कैलकुलेशन एक standard working-class family की जरूरतों पर आधारित होगी, जिसमें शामिल हैं—
- भोजन
- कपड़े
- मकान का किराया
- ईंधन और बिजली
- शिक्षा और चिकित्सा
- अन्य जरूरी खर्च
केंद्र सरकार एक National Floor Wage तय करेगी, जिससे नीचे कोई भी राज्य न्यूनतम वेतन निर्धारित नहीं कर सकेगा। हालांकि, राज्यों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार इससे ज्यादा वेतन तय करने का अधिकार मिलेगा।
सैलरी की परिभाषा होगी साफ
ड्राफ्ट नियमों में Salary Definition को लेकर भी स्पष्टता लाई गई है। इसके अनुसार—
- कुल पारिश्रमिक (Total Remuneration) का 50% से अधिक हिस्सा allowances नहीं हो सकता
- बोनस, इंसेंटिव और reimbursement को वेतन की परिभाषा से बाहर रखा गया है
- बेसिक सैलरी को कृत्रिम रूप से कम करने के तरीकों पर रोक लगेगी
इससे कर्मचारियों को PF, gratuity और अन्य benefits में सीधा फायदा मिलेगा।
काम के घंटे और ओवरटाइम के नए नियम
नए नियमों में हफ्ते में अधिकतम 48 Working Hours की सीमा को सख्ती से लागू करने का प्रावधान है। वेतन की गणना 8 घंटे प्रतिदिन के आधार पर होगी।
इसके अलावा—
- ओवरटाइम (Overtime)
- साप्ताहिक अवकाश (Rest Day)
- सब्सटीट्यूटेड रेस्ट डे
के लिए भुगतान की स्पष्ट व्यवस्था की गई है।
नाइट शिफ्ट को लेकर अहम बदलाव
ड्राफ्ट नियमों में Night Shift Rules को लेकर विशेष प्रावधान किए गए हैं। अगर कर्मचारी आधी रात के बाद काम करता है, तो वेतन की गणना और सुरक्षा नियमों का अलग प्रावधान होगा।
महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति दी गई है, लेकिन—
- उनकी स्पष्ट सहमति जरूरी होगी
- नियोक्ता को सुरक्षा, ट्रांसपोर्ट और वर्कप्लेस सेफ्टी सुनिश्चित करनी होगी
ये नियम Manufacturing, Services, Logistics और IT Sector के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।
समय पर सैलरी और डिडक्शन पर सख्ती
ड्राफ्ट नियमों में वेतन भुगतान की time-limit तय की गई है। साथ ही—
- कुल डिडक्शन कर्मचारी की सैलरी का 50% से ज्यादा नहीं हो सकता
- जुर्माना या कटौती से पहले कर्मचारी को सूचना देना और सुनवाई का मौका देना अनिवार्य होगा
इससे मनमानी कटौती पर लगाम लगेगी।
मेडिकल चेक-अप और क्रेच अलाउंस
नए नियमों में कर्मचारियों की सेहत और परिवार को लेकर भी प्रावधान किए गए हैं—
- 40 साल से ज्यादा उम्र के कर्मचारियों के लिए सालाना मेडिकल चेक-अप अनिवार्य
- जहां क्रेच सुविधा नहीं है, वहां प्रति बच्चे कम से कम ₹500 क्रेच अलाउंस देना होगा
कुल मिलाकर क्या बदलेगा
चारों लेबर कोड्स के लागू होने से—
- कर्मचारियों को ज्यादा सुरक्षा और पारदर्शिता मिलेगी
- नियोक्ताओं के लिए नियम एकसमान होंगे
- सैलरी, काम के घंटे और नाइट शिफ्ट को लेकर भ्रम खत्म होगा
सरकार का दावा है कि ये बदलाव भारत के श्रम कानूनों को modern, transparent और worker-friendly बनाएंगे।



