
Manshapurn Mahaganpati Rajsamand : राजसमंद के नौ चौकी रोड, राजनगर में स्थित प्राचीन मंशापूर्ण महागणपति मंदिर में गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर 27 अगस्त 2025 से पांच दिवसीय उत्सव का शुभारंभ हो गया है। इस दौरान मंदिर में भगवान गणेश की सवा नौ फीट ऊंची पाषाण प्रतिमा को चांदी की आंगी से सजाया गया है, जो भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। मंगलवार देर रात चांदी की आंगी का कार्य पूरा हुआ, और बुधवार सुबह मंगला दर्शन के साथ धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हुई। सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है, और भक्ति-भरे माहौल में ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारे गूंज रहे हैं।
धार्मिक अनुष्ठानों का भव्य आयोजन
Ganesh Chaturthi celebration Rajsamand temple : मंदिर के पुजारी पंडित गोपाल श्रोत्रिय ने बताया कि गणेश चतुर्थी के शुभ अवसर पर सुबह 11 बजे से भगवान गणेश का पंचामृत स्नान शुरू हुआ। इस दौरान दूध, दही, घी, शहद, और शर्करा से अभिषेक किया गया, जिसमें वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गणेश अथर्वशीर्ष और गणेश सहस्रनाम स्तोत्र का पाठ हुआ। अभिषेक के बाद भगवान को लड्डुओं का भोग अर्पित किया गया, जो उनकी प्रिय मिठाई माना जाता है। दोपहर में मध्याह्न आरती के साथ भक्तों ने भगवान के दर्शन किए। शाम को कमल के फूलों से विशेष शृंगार किया गया, जिसने मंदिर के भक्ति माहौल को और आलौकिक बना दिया।

पांच दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में प्रतिदिन अलग-अलग फूलों से भगवान गणेश का शृंगार किया जाएगा। गुलाब, चमेली, मोगरा, और रजनीगंधा जैसे फूलों से सजी झांकियां मंदिर की शोभा बढ़ाएंगी। मंदिर के बाहर रंग-बिरंगे फूलों और लाल कपड़े से सजा भव्य पांडाल बनाया गया है, जो उत्सव की भव्यता को और बढ़ा रहा है। नगर परिषद ने भी इन पांच दिनों के लिए शहर में विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों की योजना बनाई है, जिसमें भजन संध्या, कीर्तन, और सामुदायिक भोज शामिल होंगे।

मंशापूर्ण महागणपति मंदिर: एक अनूठा धार्मिक स्थल
Manshapurn Mahaganpati silver decoration : राजसमंद का मंशापूर्ण महागणपति मंदिर देश का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जो अपनी विशाल और अद्वितीय पाषाण प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है। यह मंदिर 400 वर्ष से अधिक पुराना है और भगवान गणेश की सवा नौ फीट ऊंची प्रतिमा यहाँ की सबसे बड़ी विशेषता है। यह प्रतिमा एक ही पाषाण शिला से निर्मित है, जिसमें चतुर्भुजधारी गणेश के साथ रिद्धि-सिद्धि, शुभ-लाभ, और मूषक (गणेश की सवारी) के साथ-साथ सर्प के रूप में यज्ञोपवीत भी उकेरा गया है। गणेश जी का दाहिना पांव आगे की ओर निकला हुआ है, जो भक्तों की मनोकामनाओं को पूर्ण करने और कार्य सिद्धि का प्रतीक माना जाता है।
प्रतिमा के चार हाथों में विभिन्न प्रतीक हैं—एक हाथ में लड्डू, दूसरा आशीर्वाद की मुद्रा में, तीसरा फरसा, और चौथा अंकुश धारण किए हुए है। ये सभी विशेषताएं इस प्रतिमा को विश्व में अद्वितीय बनाती हैं। पुजारी के अनुसार, इस मंदिर में भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है, यही कारण है कि इसे ‘मंशापूर्ण महागणपति’ के नाम से जाना जाता है। सीढ़ियों के सहारे भक्त इस विशाल प्रतिमा की पूजा-अर्चना करते हैं, जो अपने आप में एक अनूठा अनुभव है।
गणेश चतुर्थी का महत्व और पूजा विधि
Rajsamand Ganesh temple Ganeshotsav 2025 : गणेश चतुर्थी हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जो भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष यह पर्व 27 अगस्त 2025 को शुरू हुआ और 6 सितंबर 2025 को अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन के साथ समाप्त होगा। पंचांग के अनुसार, गणेश स्थापना के लिए मध्याह्न काल (सुबह 11:05 से दोपहर 1:40 तक) सबसे शुभ माना जाता है। इस दौरान भक्त मंदिरों और घरों में गणपति की मूर्ति स्थापित करते हैं और विधिवत पूजा करते हैं।
पूजा विधि में सबसे पहले एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाया जाता है, जिस पर अक्षत, चंदन, और स्वस्तिक बनाया जाता है। इसके बाद गणेश जी की मूर्ति स्थापित की जाती है और पंचामृत स्नान, फूल, दूर्वा, और मोदक अर्पित किए जाते हैं। गणेश मंत्र ‘वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ’ का जाप और आरती के साथ पूजा पूरी होती है। मान्यता है कि गणेश जी की पूजा से जीवन के सभी विघ्न दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
पांच दिवसीय उत्सव की विशेषताएं
Ganesh idol special decoration Rajasthan : मंशापूर्ण महागणपति मंदिर में पांच दिनों तक चलने वाले उत्सव में कई विशेष आयोजन होंगे। प्रत्येक दिन भगवान गणेश का अलग-अलग फूलों से शृंगार किया जाएगा, और भक्तों के लिए विशेष आरती और भजन संध्या का आयोजन होगा। मंदिर परिसर को रंग-बिरंगे फूलों, लाइट्स, और पारंपरिक सजावट से सजाया गया है। स्थानीय गणेश मंडलों ने भी शहर में छोटे-बड़े पांडाल सजाए हैं, जहां भक्त गणपति की मूर्तियों की स्थापना कर उत्सव मना रहे हैं।
नगर परिषद द्वारा आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में स्थानीय कलाकारों द्वारा भक्ति भजनों और नृत्य प्रदर्शनों की प्रस्तुति होगी। इसके अलावा, मंदिर के आसपास मेला और रक्तदान शिविर जैसे सामुदायिक कार्य भी आयोजित किए जाएंगे, जो गणेश चतुर्थी के सामाजिक महत्व को दर्शाते हैं।

मंशापूर्ण महागणपति: विश्व में एकमात्र
मंशापूर्ण महागणपति मंदिर की ख्याति केवल राजसमंद तक सीमित नहीं है, बल्कि देश-विदेश से भक्त यहाँ दर्शन के लिए आते हैं। इस मंदिर की विशाल प्रतिमा में सम्पूर्ण गणेश परिवार का समावेश इसे अन्य गणेश मंदिरों से अलग करता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर में पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, और यहाँ की सकारात्मक ऊर्जा भक्तों को आध्यात्मिक शांति प्रदान करती है। मंदिर का प्राचीन इतिहास और इसकी वास्तुकला भी इसे एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल बनाती है।
