
Marble miners protest : खदानों की गहराई व विदेशी मार्बल की आवक से गिरते मार्बल माइंस से जुड़े कारोबार को सरकार द्वारा मार्बल खनिज पर 25 प्रतिशत रॉयल्टी बढ़ाकर बड़ा झटका दिया। 320 से बढ़ाकर 400 रुपए रॉयल्टी करने से मार्बल माइंसों का संचालन ही मुश्किल हो गया। बढ़ी रॉयल्टी के आदेश को निरस्त करने के लिए 19 दिन से मार्बल खानों में डिस्पेच बंद और कारोबारी मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा तक से मिल लिए, मगर समस्या का समाधान नहीं हो पाया। इस कारण 2 लाख लोग बेरोजार हो गए और प्रतिदिन एक करोड़ का आर्थिक नुकसान कारोबारियों को हो रहा है।
जिला मार्बल माइंस ऑनर्स एसोसिएशन अध्यक्ष गौरवसिंह राठौड़ ने बताया कि मार्बल की रॉयटी दर 2021 में 265 से बढ़ाकर 320 रुपए बढ़ाई, जबकि वर्ष 2021-22 की तुलना में वर्ष 2024-25 में मार्बल का निर्गमन करीब 10 लाख टन तक कम हो गया। मार्बल खनिज व्यवसाय राजस्थान राज्य की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण अंग है, लेकिन सरकार अपने राजस्व दे रही है और लाखों लोगों के रोजगार का की तरफ उनका ध्यान नहीं है। राठौड़ ने बताया कि एक तरफ मार्बल माइंसों की गहराई लगातार बढ़ रही है, जिसकी वजह से खान से बाहर ब्लॉक निकालने की लागत बढ़ रही है और नीचे मार्बल गुणवत्ता भी डाउन होने लगी है। यही वजह है कि पांच वर्ष में 1250 खानों में से करीब 300 खदाने बंद हो गई और अब 938 खाने ही एक्टिव है और साढ़े पांच सौ मार्बल खाने ही नियमित संचालित हो रही है। खान विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक वर्ष 2021-22 में मार्बल का उत्पादन 33.65 लाख था, जिसमें 35 प्रतिशत की गिरावट आने से वर्ष 2024-25 में मात्र 23.66 लाख टन मार्बल का उत्पादन ही हो पाया। इससे स्पष्ट है कि मार्बल उद्योग कारोबार बढ़ नहीं रहा, बल्कि लगातार घट रहा है। फिर भी सरकार द्वारा अप्रत्याशित टैक्स व रॉयल्टी बढ़ा रही है। ऐसी स्थिति न सिर्फ मार्बल माइंसों का संचालन मुश्किल हो रहा है, बल्कि लाखों लोग बेरोजगार भी हो जाएंगे। इस कारण सरकार को वर्तमान में जितना राजस्व मिल रहा है, वह भी बंद हो जाएगा।

केलवा से वाहन रैली, फिर पैदल मार्च, प्रदर्शन

Marble royalty hike Rajasthan : मार्बल माइंस मालिक के साथ गैंगसा, कटर कारोबारी के साथ खाद्यान्न, होटल व्यापारी, श्रमिक केलवा में एकत्रित हुए, जहां एक सभा हुई। उसके बाद वाहन रैली केलवा से रवाना हुई, जो फोरलेन पर मोखमपुरा, पसूंद, मोरचणा, सेवाली, राजनगर, कलालवाटी होकर किशोरनगर मंडा से पुरानी कलक्ट्री परिसर में एकत्रित हुए। यहां अल्पाहार के साथ सभी लोग पैदल मार्च करते हुए जिला कलक्ट्री पहुंचे, जहां सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। बाद में एक प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री के नाम अतिरिक्त जिला कलक्टर नरेश बुनकर को ज्ञापन सौंपा। साथ ही चेतावनी दी कि अगर दो दिन की समयाविध में सरकार उचित निर्णय नहीं लेती है तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। इस दौरान मार्बल माइंस ऑनर्स एसोसिएशन अध्यक्ष गौरवसिंह राठौड़, तनसुख बोहरा, ट्रेडर्स एसोसिएशन अध्यक्ष गोविंद सनाढ्य, दिनेश बड़ाला, महेंद्र कोठारी, लक्ष्मण गुर्जर, हरिसिंह राठौड़, नानालाल सिंधल, रामनारायण पालीवाल, सत्यप्रकाश काबरा सहित हजारों की संख्या में कारोबारी, श्रमिक व बाजार के व्यापारी मौजूद थे।

12 साल में 300 मार्बल खदाने बंद, संचालन सिर्फ 500 में

Rajasthan marble mining crisis : मार्बल माइंस ऑनर्स एसोसिएशन अध्यक्ष गौरवसिंह राठौड़ ने बताया कि 2013-14 में 1284 खनन पट्टों में से वर्ष 2024-25 में सिर्फ 938 खनन पट्टे एक्टिव है और उनमें से नियमित खनन कार्य सिर्फ 500 मार्बल माइंसों में ही हो पा रहा है। खान विभाग के रिकॉर्ड में स्पष्ट है कि पिछले एक दशक में मार्बल खनिज का उत्पादन 15 से 20 लाख टन कम हुआ है। इसके बावजूद गिरते मार्बल कारोबार को लेकर सरकार गंभीर नहीं है।
हर साल व्यवसायिक बिजली दर बढ़ रही

Marble industry shutdown news : मार्बल गैंगसा एसोसिएशन अध्यक्ष सत्यप्रकाश काबरा ने बताया कि अजमेर विद्युत वितरण निगम द्वारा हर साल व्यवसायिक बिजली दर को बढ़ाया जा रहा है, जिसकी वजह से पहले से मार्बल कारोबारी परेशान है। साथ ही जीएसटी दर को घटाने के लिए लगातार मार्बल कारोबारी संघर्षरत है। इस बीच सरकार ने जीएसटी को कम करने की बजाय रॉयल्टी में 25 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी कर डाली। इस कारण 2 दिन में सरकार स्तर से सकारात्मक निर्णय नहीं होने पर मार्बल माइंसों के साथ गैंगसा, मार्बल कटर के बिजली कनेक्शन काटने के लिए एक साथ आवेदन कर दिया जाएगा।
रॉयल्टी राजस्व घटा, फिर दोहरा बर्ताव क्यों
मार्बल कारोबारी दिनेश बड़ाला ने बताया कि वर्ष 2023 में खान विभाग द्वारा राजसमन्द जिले में खनिज मार्बल रॉयल्टी संग्रहण का टेंडर 141 करोड़ में दिया था, जो 18 माह के लिए था, जबकि वर्ष 2025 में वही रॉयल्टी वसूली टेंडर मात्र 120 करोड़ में हुआ है और वह भी 21 माह की समयावधि के लिए है। इस तरह स्पष्ट है कि मार्बल कारोबार किस स्थिति में है, उससे न सिर्फ खान विभाग, बल्कि सरकार भी वाकिफ है।
चाय थड़ी से लेकर पूरे बाजार का कारोबार ठप

Marble traders rally Rajsamand : मोबाइल शॉप संचालक पारसलाल तेली ने बताया कि माइंसों में बीस दिन से डिस्पेच बंद है। ट्रेक- ट्रेलर, डम्पर, ट्रेक्टर खड़े है और एक दशक में कई माइंसे बंद हो चुकी है। अभी यह हालत है कि रक्षाबंधन त्यौहार में भी सिर्फ 7-8 मोबाइल बिके। दुकान के कारोबार में 70 प्रतिशत की गिरावट आई है। कपड़ा विक्रेता कुन्दन बोले कि मार्बल खाने बंद होने से बाजार में सन्नाटा पसरा है। सभी दुकानदार हताश है व परेशान है। प्रतिदिन 400 से 500 रुपए कमाई हो रही थी, मगर एक माह से मामूली पैसा मिल पा रहा है। झमकू मार्बल माइंस पर कार्यरत श्रमिक ताराचंद बोले कि खान में खनन हो गया, मगर अब माल का डिस्पेच नहीं होने से खदान में जगह ही नहीं बची। इस कारण श्रमिक घर लौटने को मजबूर है। फल विक्रेता कुन्दन बोले कि बाजार में ग्राहक है ही नहीं। यही स्थिति रही, तो फल कारोबार करना मुश्किल हो जाएगा।
:::: राजसमंद जिले में मार्बल खानों का कारोबार ::::

- 938 मार्बल खदाने ही एक्टिव, मगर साढ़े पांच सौ खदाने ही नियमित संचालित
- 25% रॉयल्टी मार्बल पर बढ़ाई, जिससे कारोबार हुआ मुश्किल
- 10 लाख टन तक घट गया चार साल में मार्बल का उत्पादन
- 2 लाख लोग 19 दिन से हो चुके हैं बेरोजगार
- 1 करोड़ से ज्यादा का प्रतिदिन हो रहा व्यापारियों को नुकसान
- 2 दिन में सुनवाई नहीं होने पर माइंस, गैंगसा व कटरों के कटवा देंगे बिजली कनेक्शन
- मार्बल माइंस पर निर्भर है राजसमंद का पूरा बाजार, वह भी प्रभावित
- मुख्यमंत्री से वार्ता के बावजूद समस्या के समाधान पर नहीं सकारात्मक निर्णय



