
MLA Kanwarlal Meena : जयपुर में आज एक अहम घटनाक्रम देखने को मिला, जब Rajasthan Assembly ने BJP के विधायक कंवरलाल मीणा की सदस्यता को समाप्त करने की अधिसूचना जारी कर दी। यह कार्रवाई एक पुराने मामले में उनकी सजा के बाद हुई, जिसमें उन्हें तीन साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। कंवरलाल मीणा Baran जिले की Anta विधानसभा सीट से विधायक थे। उनकी सदस्यता को 1 मई 2025 से समाप्त माना जाएगा, क्योंकि इसी दिन उनकी सजा को Rajasthan High Court ने बरकरार रखा था। इस फैसले के बाद अब विधानसभा में विधायकों की संख्या 200 से घटकर 199 हो गई है।
Anta सीट अब आधिकारिक रूप से खाली घोषित कर दी गई है। हालांकि, इस सीट पर उपचुनाव (By-Election) होंगे या नहीं, यह सुप्रीम कोर्ट में कंवरलाल द्वारा दायर Review Petition के फैसले पर निर्भर करता है। अगर सुप्रीम कोर्ट उनकी सजा को कम कर देता है या स्थगित कर देता है, तो उपचुनाव की जरूरत नहीं पड़ेगी। लेकिन अगर सजा बरकरार रहती है, तो इस सीट पर जल्द ही उपचुनाव देखने को मिल सकते हैं।
सजा और सरेंडर: कंवरलाल का कानूनी सफर
terminates BJP MLA Kanwarlal Meena : यह पूरा मामला 2005 का है, जब कंवरलाल मीणा ने Jhalawar जिले के Aklera में तत्कालीन SDM रामनिवास मेहता पर पिस्तौल तानकर धमकी दी थी। इस घटना में उन्होंने एक सरपंच चुनाव के दौरान दोबारा मतदान (Re-Poll) की मांग को लेकर SDM को धमकाया और सरकारी काम में बाधा डालने के साथ-साथ सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। दिसंबर 2020 में Aklera की एक सत्र अदालत ने उन्हें इस मामले में दोषी ठहराते हुए तीन साल की सजा सुनाई थी।
इसके बाद कंवरलाल ने Rajasthan High Court में अपील की, लेकिन 1 मई 2025 को हाई कोर्ट ने भी उनकी सजा को बरकरार रखते हुए उन्हें तुरंत सरेंडर करने का आदेश दिया। कंवरलाल ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में Special Leave Petition (SLP) दायर की, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया और उन्हें दो सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया। इस निर्देश के बाद, 21 मई 2025 को कंवरलाल ने Manohar Thana कोर्ट में सरेंडर कर दिया, जिसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया। वर्तमान में वे जेल में हैं और अपनी सजा काट रहे हैं।
विधानसभा की कार्रवाई: स्पीकर ने मांगी थी कानूनी राय
Rajasthan Assembly Speaker वासुदेव देवनानी ने कंवरलाल की सदस्यता को लेकर फैसला करने से पहले कानूनी सलाह लेने का निर्णय लिया था। उन्होंने राज्य के Advocate General (AG) और कुछ वरिष्ठ वकीलों से इस मामले में राय मांगी थी। शुक्रवार, 23 मई 2025 को सुबह 10:30 बजे AG की राय मिलने के बाद स्पीकर ने तुरंत कंवरलाल की सदस्यता समाप्त करने की अधिसूचना जारी कर दी।
AG ने अपनी राय में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए साफ कहा कि कंवरलाल की सजा पर कोई रोक नहीं लगी है, और ऐसे में उनकी विधायकी समाप्त करना ही एकमात्र विकल्प है। Representation of the People Act, 1951 की धारा 8(3) के अनुसार, अगर किसी जनप्रतिनिधि को दो साल या उससे अधिक की सजा होती है, तो उसकी सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है। इस कानून के आधार पर ही यह कार्रवाई की गई।
विधानसभा सचिवालय ने पहले कंवरलाल को एक नोटिस जारी कर 7 मई तक जवाब मांगा था, जिसमें उनसे पूछा गया था कि क्या उनकी सजा पर सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत मिली है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट से उनकी याचिका खारिज होने के बाद स्पीकर के पास सदस्यता समाप्त करने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचा था।
कांग्रेस का दबाव: सत्य और संविधान की जीत
Kanwarlal Meena disqualified BJP MLA इस मामले में Congress ने शुरू से ही कंवरलाल की सदस्यता समाप्त करने की मांग की थी। Congress प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इस फैसले को सत्य की जीत करार दिया। उन्होंने कहा कि कोर्ट के आदेश के 23 दिन बाद भी BJP विधायक की सदस्यता समाप्त नहीं की गई थी, जो संविधान और कोर्ट के आदेश की अवहेलना थी। डोटासरा ने आरोप लगाया कि स्पीकर ने एक सजायाफ्ता विधायक को बचाने के लिए पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया और संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी की। लेकिन आखिरकार सत्य की जीत हुई और कंवरलाल की सदस्यता रद्द कर दी गई।
वहीं, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इस फैसले को लोकतंत्र और संविधान की मर्यादा की जीत बताया। उन्होंने कहा कि संविधान की पालना पहले दिन ही हो जानी चाहिए थी, लेकिन BJP सरकार ने इस मामले में 23 दिन तक टालमटोल की। जूली ने कहा कि कानून के अनुसार, किसी जनप्रतिनिधि को दो साल से अधिक की सजा होने पर उसकी सदस्यता तुरंत समाप्त हो जानी चाहिए। लेकिन इस मामले में देरी करना न केवल संविधान का उल्लंघन था, बल्कि न्याय व्यवस्था का अपमान भी था।
Congress नेताओं ने इस मुद्दे को लेकर कई बार स्पीकर और राज्यपाल से मुलाकात की थी। उन्होंने बार-बार ज्ञापन सौंपकर कंवरलाल की सदस्यता समाप्त करने की मांग की थी। जूली ने तो 23 मई को ही Rajasthan High Court में एक याचिका भी दायर की थी, जिसमें स्पीकर पर कोर्ट के आदेश की अवहेलना (Contempt of Court) का आरोप लगाया गया था। कोर्ट ने उनकी याचिका को स्वीकार कर सुनवाई की तारीख तय कर दी थी। लेकिन उसी दिन स्पीकर ने कंवरलाल की सदस्यता समाप्त करने का फैसला कर लिया।
स्पीकर का जवाब: मैं दबाव में काम नहीं करता
Rajasthan Assembly Kanwarlal Meena suspension : इस मामले में Speaker वासुदेव देवनानी ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने किसी भी तरह के दबाव में काम नहीं किया। उन्होंने बताया कि Advocate General की राय 23 मई को सुबह 10:30 बजे मिलते ही कंवरलाल की सदस्यता समाप्त करने की अधिसूचना जारी कर दी गई। देवनानी ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 177 के तहत AG को राय देने का अधिकार है, और उन्होंने इसी प्रक्रिया का पालन किया।
उन्होंने Congress पर निशाना साधते हुए कहा कि इस मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। देवनानी ने जोर देकर कहा कि जैसे ही कोर्ट का फैसला आया, उन्होंने तुरंत AG से राय मांगी थी, और राय मिलते ही कार्रवाई कर दी गई।
8 साल में दूसरा मामला: पहले बसपा विधायक की गई थी सदस्यता
BJP MLA gun threat case : यह पहला मौका नहीं है जब राजस्थान में किसी विधायक की सदस्यता सजा की वजह से समाप्त की गई हो। इससे पहले 2017 में BSP के तत्कालीन विधायक बीएल कुशवाह की सदस्यता भी समाप्त की गई थी। कुशवाह को एक हत्या के मामले में आजीवन कारावास (Life Imprisonment) की सजा सुनाई गई थी, जिसके बाद उनकी विधायकी समाप्त कर दी गई थी। इसके बाद Dholpur सीट पर उपचुनाव हुआ था, जिसमें कुशवाह की पत्नी शोभारानी कुशवाह ने BJP के टिकट पर जीत हासिल की थी।
पिछले आठ सालों में कंवरलाल का यह दूसरा मामला है, जिसमें किसी विधायक की सदस्यता सजा की वजह से खत्म की गई है। यह घटना राजस्थान की राजनीति में कानून और संविधान की सर्वोच्चता को दर्शाती है।

उपचुनाव का रास्ता: चुनाव आयोग करेगा फैसला
कंवरलाल की सदस्यता समाप्त होने के बाद अब Anta सीट पर उपचुनाव की संभावना बन रही है। विधानसभा ने इस सीट के खाली होने की सूचना Election Commission को भेज दी है। कानून के अनुसार, किसी विधायक की सीट खाली होने पर छह महीने के भीतर उपचुनाव करवाना अनिवार्य है। ऐसे में Anta सीट पर अक्टूबर 2025 से पहले उपचुनाव होने की उम्मीद है।
हालांकि, यह सब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निर्भर करता है। कंवरलाल ने सुप्रीम कोर्ट में एक Review Petition दायर की है, जिसमें अपनी सजा को कम करने या स्थगित करने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट में 24 मई से ग्रीष्मकालीन अवकाश (Summer Vacation) शुरू हो रहा है, और अब इस याचिका पर सुनवाई 15 जुलाई के बाद ही संभव है। अगर सुप्रीम कोर्ट उनकी सजा को कम कर देता है या स्थगित कर देता है, तो उनकी सदस्यता बहाल हो सकती है और उपचुनाव की जरूरत नहीं पड़ेगी। लेकिन अगर सजा बरकरार रहती है, तो उपचुनाव अनिवार्य हो जाएगा।
कंवरलाल का सियासी सफर और विवाद
कंवरलाल मीणा BJP के एक प्रभावशाली नेता रहे हैं। वे दो बार विधायक चुने गए—पहली बार 2013 में Manohar Thana सीट से और दूसरी बार 2023 में Anta सीट से। हालांकि, उनका सियासी करियर हमेशा विवादों से भरा रहा। उनके खिलाफ 27 आपराधिक मामले दर्ज थे, जिनमें से ज्यादातर में उन्हें बरी कर दिया गया था। लेकिन 2005 के इस मामले ने उनकी सियासी पारी को एक बड़ा झटका दे दिया।
2005 में Jhalawar के Manohar Thana में एक सरपंच चुनाव के दौरान दोबारा मतदान की मांग को लेकर कंवरलाल ने SDM रामनिवास मेहता को पिस्तौल दिखाकर धमकी दी थी। उन्होंने मेहता को दो मिनट के भीतर दोबारा मतदान की घोषणा करने की धमकी दी थी, और ऐसा न करने पर जान से मारने की बात कही थी। इस घटना ने उस समय खूब सुर्खियां बटोरी थीं और कंवरलाल की छवि को नुकसान पहुंचाया था।
विधानसभा की नई स्थिति: बीजेपी और कांग्रेस की ताकत
कंवरलाल की सदस्यता समाप्त होने के बाद Rajasthan Assembly में विधायकों की संख्या अब 199 हो गई है। BJP के विधायकों की संख्या 119 से घटकर 118 हो गई है, जबकि Congress के पास 66 विधायक हैं। इसके अलावा, विधानसभा में 8 निर्दलीय (Independents), Bharat Adivasi Party के 4, Bahujan Samaj Party के 2, और Rashtriya Lok Dal का 1 विधायक है। इस बदलाव से विधानसभा में सत्ता संतुलन पर कोई बड़ा असर तो नहीं पड़ेगा, लेकिन Anta सीट पर होने वाला उपचुनाव सियासी माहौल को गर्म जरूर कर सकता है।
संविधान और कानून की जीत
कंवरलाल मीणा की विधायकी समाप्त होने का यह मामला राजस्थान की राजनीति में एक अहम घटना है। यह फैसला न केवल संविधान और कानून की सर्वोच्चता को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि लोकतंत्र में कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। Congress ने इस मामले को लेकर शुरू से ही आक्रामक रुख अपनाया था, और उनकी मांग आखिरकार पूरी हुई।
अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की Review Petition पर टिकी हैं। अगर कंवरलाल को राहत मिलती है, तो उनकी सियासी पारी फिर से पटरी पर आ सकती है। लेकिन अगर सजा बरकरार रहती है, तो Anta सीट पर जल्द ही एक नया सियासी मुकाबला देखने को मिलेगा। यह घटना राजस्थान की राजनीति में आने वाले दिनों में और भी चर्चा का विषय बनेगी।
