
MSME Loan : सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र के निर्यातकों के लिए एक अच्छी खबर है। सरकार Interest Equalisation Scheme को फिर से शुरू करने पर विचार कर रही है, जिसके तहत MSME निर्यातकों को सस्ते दरों पर लोन (MSME Export Loan) उपलब्ध हो सकेगा। यह योजना दिसंबर 2024 में बंद हो गई थी, लेकिन अब वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं (Global Economic Uncertainty) और अमेरिका द्वारा आयात पर टैरिफ (Import Tariff) लगाने के बाद इसे दोबारा शुरू करने की मांग तेज हो गई है। निर्यातकों ने इस स्कीम को फिर से लागू करने के लिए कई बार सरकार से गुहार लगाई है, और अब सरकार इस दिशा में गंभीरता से विचार कर रही है।
सस्ते लोन की जरूरत क्यों पड़ी?
MSME Loan interest rate : वर्तमान में भारतीय MSME निर्यातकों को बैंकों से 8 से 12 प्रतिशत की ब्याज दर (Interest Rate) पर कर्ज मिलता है। कई बार यह दर और भी अधिक हो जाती है, जिसके कारण उन्हें वैश्विक बाजार (Global Market) में प्रतिस्पर्धा करने में मुश्किल होती है। दूसरी ओर, चीन जैसे देशों में उद्यमियों को मात्र 2 से 3 प्रतिशत की दर पर लोन मिलता है, जिससे उनकी लागत (Cost) कम रहती है और वे भारतीय निर्यातकों से सस्ते दामों पर उत्पाद बेच पाते हैं। इस अंतर को कम करने और भारतीय MSME को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी (Competitive) बनाने के लिए सस्ते कर्ज की जरूरत महसूस की जा रही है।
वैश्विक व्यापार और भारत की स्थिति
हाल ही में भारत ने इंग्लैंड के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर किए हैं, और अमेरिका के साथ भी द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) को लेकर बातचीत चल रही है। निर्यातकों का मानना है कि इन अवसरों का पूरा लाभ उठाने के लिए सरकार को प्रोत्साहन (Incentives) देना जरूरी है। सस्ते कर्ज की सुविधा से MSME निर्यातक नए ऑर्डर (Orders) लेने में सक्षम होंगे और अपनी उत्पादन क्षमता (Production Capacity) को बढ़ा सकेंगे। इससे न केवल निर्यात (Export) में वृद्धि होगी, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था (Economy) को भी मजबूती मिलेगी।
निर्यातकों की मांग और सरकार से अपील
निर्यातक संगठनों ने इस स्कीम को फिर से शुरू करने की मांग लंबे समय से की है। पिछले बजट (Budget) में जब इस योजना के विस्तार का उल्लेख नहीं किया गया, तो निर्यातकों ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर इसे लागू करने की अपील की थी। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (FIEO) के तत्कालीन अध्यक्ष अश्विनी कुमार ने कहा था कि इस स्कीम को आगे बढ़ाने पर सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। उन्होंने बताया कि चीन में ब्याज दरें 2 से 3 प्रतिशत हैं, जो वहां के निर्यातकों को बड़ा फायदा देती हैं। इसके विपरीत, भारतीय MSME को उच्च ब्याज दरों का सामना करना पड़ता है, जिससे उनकी लागत बढ़ जाती है।
क्रेडिट लिमिट बढ़ाने की मांग
निर्यातकों ने इस स्कीम में क्रेडिट लिमिट (Credit Limit) को भी बढ़ाने की मांग की है। वर्तमान में यह सीमा प्रति कंपनी 50 लाख रुपये है, जिसे बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये करने की मांग की गई है। निर्यातकों का कहना है कि 50 लाख रुपये की सीमा बहुत कम है, जिसके कारण कई MSME इस योजना का पूरा लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। सब्सिडी (Subsidy) न मिलने से वे नए ऑर्डर लेने में असमर्थ हो रहे हैं, जिससे उनका कारोबार (Business) प्रभावित हो रहा है। क्रेडिट लिमिट बढ़ाने से MSME को बड़े ऑर्डर लेने में मदद मिलेगी और वे वैश्विक बाजार में अपनी स्थिति मजबूत कर सकेंगे।
Interest Equalisation Scheme क्या है?
Interest Equalisation Scheme को 2015 में निर्यातकों को प्रोत्साहन देने के लिए शुरू किया गया था। इस योजना को शुरुआत में 5 साल के लिए लागू किया गया था, जो 31 मार्च 2020 तक वैध थी। इसके बाद इसे कई बार बढ़ाया गया, और आखिरी बार सितंबर 2023 में इसे दिसंबर 2024 तक विस्तार दिया गया था। इस स्कीम के तहत MSME निर्यातकों को प्री-शिपमेंट (Pre-Shipment) और पोस्ट-शिपमेंट (Post-Shipment) के लिए रुपये में मिलने वाले एक्सपोर्ट क्रेडिट (Export Credit) पर 3 प्रतिशत की ब्याज सब्सिडी दी जाती थी। इस योजना से लाभ पाने वालों में से करीब 80 प्रतिशत MSME थे। इसकी निगरानी विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा की जाती थी। यह योजना निर्यात संवर्धन नीति (Export Promotion Policy) का हिस्सा थी, जिसका उद्देश्य भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाना था।
MSME सेक्टर में क्रेडिट गैप की स्थिति
स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (SIDBI) की एक हालिया सर्वे रिपोर्ट में MSME सेक्टर में क्रेडिट गैप (MSME Credit Gap) की गंभीर स्थिति का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, इस सेक्टर को उसकी जरूरत से 24 प्रतिशत कम कर्ज मिल रहा है, जिसके कारण लगभग 30 लाख करोड़ रुपये का क्रेडिट गैप बना हुआ है। सिडबी के सर्वे में 22 प्रतिशत MSME ने कर्ज की उपलब्धता को अपनी सबसे बड़ी चुनौती बताया। वर्ष 2023-24 के एनुअल सर्वे ऑफ अन-इनकॉरपोरेटेड सेक्टर एंटरप्राइजेज के अनुसार, देश में 7.34 करोड़ MSME हैं। इनमें से 98.64 प्रतिशत माइक्रो (Micro), 1.24 प्रतिशत स्मॉल (Small), और 0.12 प्रतिशत मीडियम (Medium) उद्यम हैं। इन MSME में लगभग 26 करोड़ लोग रोजगार (Employment) पाते हैं, जो इस सेक्टर के महत्व को दर्शाता है।

अर्थव्यवस्था में MSME का योगदान
MSME सेक्टर भारत की अर्थव्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ है। सिडबी की रिपोर्ट के अनुसार, देश के ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) में MSME की हिस्सेदारी 2020-21 में 27.3 प्रतिशत थी, जो 2021-22 में बढ़कर 29.6 प्रतिशत और 2022-23 में 30.1 प्रतिशत हो गई। इस दौरान MSME के निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 2020-21 में MSME का निर्यात 3.95 लाख करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में बढ़कर 12.39 लाख करोड़ रुपये हो गया। निर्यात करने वाले MSME की संख्या भी तेजी से बढ़ी है—2020-21 में यह 52,849 थी, जो 2024-25 (मई 2024 तक) में बढ़कर 1,73,350 हो गई। भारत के कुल निर्यात में MSME का योगदान भी बढ़ा है—2022-23 में यह 43.59 प्रतिशत, 2023-24 में 45.73 प्रतिशत, और 2024-25 में 45.79 प्रतिशत रहा। इसके अलावा, 2025-26 के बजट में निर्यातक MSME को क्रेडिट गारंटी (Credit Guarantee) के लिए लोन की सीमा को बढ़ाकर 20 करोड़ रुपये कर दिया गया था, जो इस सेक्टर के लिए एक सकारात्मक कदम है।
MSME निर्यातकों के लिए सुझाव
- सस्ते कर्ज का लाभ उठाएं: अगर यह स्कीम फिर से शुरू होती है, तो MSME निर्यातकों को इसका पूरा लाभ उठाना चाहिए। सस्ते कर्ज से उत्पादन लागत कम होगी, जिससे वे वैश्विक बाजार में बेहतर प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे।
- नए बाजारों की तलाश: फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTAs) का लाभ उठाकर निर्यातक नए बाजारों (Markets) में अपने उत्पादों को बढ़ावा दे सकते हैं।
- डिजिटल प्लेटफॉर्म: निर्यात को बढ़ाने के लिए डिजिटल मार्केटिंग (Digital Marketing) और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स (E-Commerce Platforms) का उपयोग करें।
Interest Equalisation Scheme को फिर से शुरू करने की संभावना MSME निर्यातकों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। यह स्कीम न केवल सस्ता कर्ज उपलब्ध कराएगी, बल्कि भारतीय MSME को वैश्विक बाजार में चीन जैसे देशों से प्रतिस्पर्धा करने में भी मदद करेगी। सरकार द्वारा इस दिशा में उठाए जा रहे कदम MSME सेक्टर को मजबूती देंगे और देश के निर्यात को बढ़ाने में योगदान देंगे। अगर यह स्कीम लागू होती है, तो MSME निर्यातक इसे एक सुनहरे अवसर के रूप में देख सकते हैं।
✅ MSME Loan Eligibility (MSME लोन के लिए पात्रता शर्तें):
1. व्यवसाय का प्रकार
- सूक्ष्म, लघु या मध्यम उद्यम (Micro, Small, Medium Enterprises) होना चाहिए।
- व्यापार, निर्माण (Manufacturing), सेवा (Service) या अन्य मान्य उद्यम होना चाहिए।
2. उद्यम रजिस्ट्रेशन / Udyam Registration
- Udyam पोर्टल पर MSME के रूप में रजिस्टर्ड होना अनिवार्य है (Udyam Registration Certificate आवश्यक है)।
3. व्यवसाय की अवधि
- सामान्यतः व्यवसाय कम से कम 6 महीने से 1 साल पुराना होना चाहिए, हालांकि नए स्टार्टअप के लिए कुछ योजनाएं विशेष छूट देती हैं।
4. क्रेडिट स्कोर (CIBIL Score)
- आमतौर पर न्यूनतम 650+ CIBIL स्कोर वांछनीय होता है।
- बेहतर स्कोर वाले आवेदकों को कम ब्याज दर पर लोन मिल सकता है।
5. वर्षों की आय और टर्नओवर
- व्यवसाय का टर्नओवर MSME कैटेगरी के अनुसार तय सीमा के भीतर होना चाहिए:
- सूक्ष्म उद्योग: निवेश ≤ ₹1 करोड़, टर्नओवर ≤ ₹5 करोड़
- लघु उद्योग: निवेश ≤ ₹10 करोड़, टर्नओवर ≤ ₹50 करोड़
- मध्यम उद्योग: निवेश ≤ ₹50 करोड़, टर्नओवर ≤ ₹250 करोड़
6. आवश्यक दस्तावेज़
- आधार कार्ड, पैन कार्ड, Udyam रजिस्ट्रेशन
- बैंक स्टेटमेंट (पिछले 6-12 महीनों के)
- व्यवसाय से संबंधित कागजात (GST रजिस्ट्रेशन, ट्रेड लाइसेंस आदि)
- प्रॉफिट एंड लॉस स्टेटमेंट और बैलेंस शीट (यदि उपलब्ध हो)
7. बैंकिंग इतिहास
- यदि बैंक के साथ अच्छा लेन-देन का रिकॉर्ड है (no default), तो लोन स्वीकृति की संभावना बढ़ जाती है।
🏦 कौन-कौन ले सकता है MSME लोन?
- छोटे दुकानदार
- मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स
- सर्विस सेक्टर बिजनेस
- स्टार्टअप्स
- स्वरोजगार करने वाले व्यक्ति
- महिला उद्यमी (कुछ योजनाओं में विशेष छूट)
💰 MSME Loan Subsidy क्या है?
MSME Loan Subsidy का मतलब है कि सरकार या संबंधित वित्तीय संस्थान आपके लोन पर कुछ प्रतिशत राशि माफ करती है या अनुदान (Subsidy) के रूप में देती है, ताकि ब्याज दर कम हो या आपको कोई वित्तीय राहत मिले। यह सब्सिडी विशेष रूप से उन लोगों के लिए फायदेमंद होती है जो नया बिजनेस शुरू करना चाहते हैं या मौजूदा व्यवसाय को बढ़ाना चाहते हैं।
✅ प्रमुख MSME Loan Subsidy योजनाएं:
1. PMEGP – प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम
- सब्सिडी:
- सामान्य श्रेणी (General): 15% (शहरी क्षेत्र), 25% (ग्रामीण क्षेत्र)
- विशेष श्रेणी (SC/ST/OBC/महिला/PH/पूर्व सैनिक): 25% (शहरी), 35% (ग्रामीण)
- लोन सीमा: ₹25 लाख तक (मैन्युफैक्चरिंग), ₹10 लाख तक (सर्विस सेक्टर)
- उद्देश्य: स्वरोजगार को बढ़ावा देना
2. Credit Linked Capital Subsidy Scheme (CLCSS)
- सब्सिडी: 15% तक (अधिकतम ₹15 लाख)
- उद्देश्य: MSME इकाइयों द्वारा टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन के लिए
- लाभ: टेक्नोलॉजी खरीद, ऑटोमेशन, मशीनरी अपग्रेड आदि
3. Stand-Up India Scheme
- महिला और SC/ST उद्यमियों के लिए
- सब्सिडी सीधे नहीं, बल्कि लोन की गारंटी और आसान प्रक्रिया में सहायता मिलती है
- ₹10 लाख से ₹1 करोड़ तक लोन
4. MUDRA Loan (Pradhan Mantri Mudra Yojana – PMMY)
- सब्सिडी: ब्याज पर छूट और क्रेडिट गारंटी
- तीन कैटेगरी में लोन:
- शिशु (Shishu): ₹50,000 तक
- किशोर (Kishore): ₹50,000 से ₹5 लाख
- तरुण (Tarun): ₹5 लाख से ₹10 लाख
5. CGTMSE – Credit Guarantee Fund Trust for Micro and Small Enterprises
- लाभ: बैंक से बिना गारंटी के लोन (Collateral-Free Loan)
- सब्सिडी नहीं, बल्कि लोन पर गारंटी कवर
- अधिकतम सीमा ₹2 करोड़ तक
📋 सब्सिडी पाने के लिए जरूरी शर्तें:
- Udyam रजिस्ट्रेशन (MSME Registration) अनिवार्य
- संबंधित योजना में आवेदन
- सभी वैध दस्तावेज जैसे आधार, पैन, बैंक स्टेटमेंट, बिज़नेस प्लान
- कोई लोन डिफॉल्ट न हो
- योजना की पात्रता शर्तें पूरी करनी होंगी
📲 सब्सिडी के लिए आवेदन कहां करें?
- ऑनलाइन पोर्टल:
- बैंक शाखाएं / डीआईसी (District Industries Centre) के माध्यम से भी आवेदन कर सकते हैं।
🏦 MSME Loan Apply Online – पूरी जानकारी (2025)
भारत सरकार और बैंकों ने MSME (Micro, Small & Medium Enterprises) के लिए लोन को आसान और डिजिटल बना दिया है। अब उद्यमी घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, बिना ज्यादा कागजी कार्रवाई के।
✅ MSME लोन के लिए पात्रता (Eligibility):
- आवेदक भारत का नागरिक हो
- Udyam पोर्टल पर MSME के रूप में रजिस्ट्रेशन
- व्यवसाय पहले से चालू हो या शुरू करने का स्पष्ट प्लान हो
- अच्छी CIBIL स्कोर (650+ बेहतर माना जाता है)
- बैंक और वित्तीय संस्थानों के साथ कोई लोन डिफॉल्ट न हो
📄 जरूरी दस्तावेज (Required Documents):
- आधार कार्ड
- पैन कार्ड
- बिजनेस एड्रेस प्रूफ
- बैंक स्टेटमेंट (6-12 महीने)
- Udyam Registration Certificate
- GST रजिस्ट्रेशन (यदि हो)
- प्रोजेक्ट रिपोर्ट या बिजनेस प्लान
- इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) (यदि लागू हो)
🖥️ ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया (How to Apply for MSME Loan Online):
✅ विकल्प 1: भारत सरकार का JanSamarth Portal (सभी सरकारी स्कीम एक साथ)
🔗 वेबसाइट: https://www.jansamarth.in
स्टेप्स:
- वेबसाइट पर जाएं और “Start Your Journey” पर क्लिक करें
- “Business Activity” में MSME Loan चुनें
- पात्रता जांचें (Check Eligibility)
- एक बार पात्रता सुनिश्चित हो जाए, तो “Apply Now” पर क्लिक करें
- आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें
- सबमिट करने के बाद आपकी एप्लिकेशन संबंधित बैंक को भेजी जाएगी
✅ विकल्प 2: PMEGP Portal (यदि आप PMEGP Scheme से लोन लेना चाहते हैं)
🔗 वेबसाइट: https://www.kviconline.gov.in/pmegp/
स्टेप्स:
- New Applicant पर क्लिक करें
- आवश्यक जानकारी भरें और दस्तावेज अपलोड करें
- आपके आवेदन की पुष्टि के बाद इंटरव्यू/वेरिफिकेशन होगा
- मंजूरी मिलने पर सब्सिडी के साथ लोन बैंक द्वारा प्रदान किया जाएगा
✅ विकल्प 3: बैंकों की वेबसाइट से डायरेक्ट आवेदन
- आप नीचे दिए गए बैंकों की वेबसाइट पर भी डायरेक्ट MSME लोन के लिए अप्लाई कर सकते हैं:
- SBI MSME Loan: https://sbi.co.in
- HDFC Bank: https://www.hdfcbank.com
- ICICI Bank: https://www.icicibank.com
- Bank of Baroda, Axis Bank आदि
टिप: आवेदन से पहले Udyam रजिस्ट्रेशन और e-KYC ज़रूर कर लें।
📱 मोबाइल ऐप्स से आवेदन (If Available):
कुछ बैंक और सरकारी संस्थाएं मोबाइल ऐप के माध्यम से भी आवेदन की सुविधा देती हैं, जैसे:
- JanSamarth App
- UMANG App (सरकारी सेवाओं का एकीकृत ऐप)
