
MSME Loan Rule 2026 : भारत के छोटे और सूक्ष्म उद्यमों (MSME) के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने Micro and Small Enterprises को बिना गारंटी (Collateral-Free) लोन की सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। यह कदम छोटे उद्यमियों की वित्तीय जरूरतों को देखते हुए उठाया गया है और इसका उद्देश्य MSME सेक्टर को अधिक क्रेडिट उपलब्ध कराना है।
RBI का निर्णय और इसकी प्रभावशीलता
Collateral-free loan India : आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को इसकी घोषणा करते हुए कहा कि छोटे उद्यमियों को अपने व्यवसाय को बढ़ाने और कार्यशील पूंजी (Working Capital) की जरूरतों को पूरा करने के लिए अधिक क्रेडिट की आवश्यकता है।
- प्रभाव की तिथि: यह निर्णय इस साल अप्रैल 2026 से लागू होगा।
- लाभार्थी: छोटे और सूक्ष्म उद्यम (MSME) जो पहले 10 लाख रुपये तक गारंटी मुक्त लोन प्राप्त कर सकते थे, अब उन्हें 20 लाख रुपये तक का लोन बिना किसी गिरवी या गारंटी के मिल सकेगा।
आरबीआई ने यह कदम इसलिए उठाया है ताकि छोटे उद्यमियों को वित्तीय बाधाओं के बिना अपना व्यवसाय बढ़ाने का अवसर मिले।
क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट की भूमिका
RBI MSME loan limit increase : इस फैसले के तहत Credit Guarantee Fund Trust छोटे और दूरदराज के उद्यमियों को लोन की गारंटी प्रदान करेगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छोटे उद्यमी बिना किसी जोखिम के बैंक से लोन प्राप्त कर सकें।
- वर्ष 2010 में SME गारंटी मुक्त लोन की सीमा 5 लाख से बढ़ाकर 10 लाख की गई थी।
- अब RBI ने इसे 20 लाख तक बढ़ाकर छोटे उद्यमियों के लिए क्रेडिट सुविधा को और मजबूत किया है।
यह उपाय विशेष रूप से Micro Enterprise श्रेणी के उद्यमियों के लिए फायदेमंद साबित होगा।

बजट 2026 और MSME के लिए सरकारी पहल
Micro and Small Enterprise loan : गत 1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करते हुए MSME सेक्टर के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ की थीं:
- MSME के लिए 10,000 करोड़ रुपये का विशेष फंड।
- छोटे उद्यमियों की क्रेडिट पहुँच बढ़ाने के लिए नए उपाय।
- निर्यात में MSME का योगदान बढ़ाने पर जोर – देश के कुल निर्यात का लगभग 45% हिस्सेदारी MSME का है।
आरबीआई का यह फैसला सीधे तौर पर बजट की घोषणाओं को सशक्त करेगा और छोटे उद्यमियों की कार्यशील पूंजी (Working Capital Flow) में सुधार लाएगा।
वैश्विक चुनौतियों और MSME सेक्टर की स्थिति
MSME credit guarantee fund : वर्तमान समय में वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के कारण कई छोटे उद्यम विशेषकर निर्यातक (Exporter) संकट में हैं। इस परिस्थिति में RBI द्वारा लोन सीमा बढ़ाने की घोषणा MSME सेक्टर के लिए राहत भरी खबर साबित होगी।
हालांकि, छोटे उद्यमियों का मानना है कि Micro Enterprise को कम से कम 50 लाख रुपये तक का गारंटी मुक्त लोन मिलना चाहिए।
- कई बार, बैंक सरकार या RBI के निर्देश के बावजूद बिना गारंटी लोन देने में हिचकिचाते हैं।
- यह मुख्य रूप से बैंक की नीति और क्रेडिट रिस्क पर निर्भर करता है।
RBI फैसले पर विशेषज्ञों की राय
मदन सबनवीस, मुख्य अर्थशास्त्री, बैंक ऑफ बड़ौदा ने कहा:
“आरबीआई का यह फैसला बजट में MSME के लिए घोषित उपायों को सशक्त करेगा। गारंटी मुक्त लोन सीमा को 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख करना बजट के अनुरूप और छोटे उद्यमियों के लिए बड़ी राहत है।”
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम MSME सेक्टर के वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को बढ़ावा देगा और छोटे व्यवसायों की कार्यशील पूंजी बढ़ाकर उनकी वृद्धि में मदद करेगा।
छोटे उद्यमियों को सीधे फायदे
- अधिक लोन उपलब्धता: अब छोटे उद्यम 20 लाख तक बिना गारंटी लोन ले सकते हैं।
- दूरदराज तक पहुँच: क्रेडिट गारंटी फंड दूरदराज के उद्यमियों तक लोन पहुँचाएगा।
- व्यापार विस्तार: कार्यशील पूंजी बढ़ने से उत्पादन और व्यापार में वृद्धि।
- निर्यात में मदद: MSME सेक्टर के निर्यातक अपनी क्षमता बढ़ा सकते हैं।
अक्सर पुछे जाने वाले प्रश्न
1. नए बजट 2026 में एमएसएमई लोन क्या है?
उत्तर: नए बजट 2026 में MSME लोन के लिए सरकार और RBI ने कदम उठाए हैं। इसमें छोटे और सूक्ष्म उद्यमों (MSME) को बिना गारंटी (Collateral-Free) 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये तक का लोन देने की सुविधा दी गई है। इसका उद्देश्य छोटे व्यवसायों को कार्यशील पूंजी और विस्तार के लिए वित्तीय मदद देना है।
2. भारत में कौन सा लोन 50% सब्सिडी है?
उत्तर: भारत में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) के तहत स्टार्टअप और लघु उद्यमों के लिए लोन पर कुछ विशेष योजनाओं में 50% तक सब्सिडी दी जा सकती है। यह आमतौर पर क्रेडिट गारंटी फंड और ब्याज सब्सिडी के रूप में होती है।
3. एमएसएमई प्रस्ताव 2025 क्या है?
उत्तर: MSME प्रस्ताव 2025 में सरकार ने छोटे और सूक्ष्म उद्यमों के लिए क्रेडिट पहुँच बढ़ाने, गारंटी फंड का विस्तार और कार्यशील पूंजी के लिए अतिरिक्त लोन देने की घोषणा की थी। इस प्रस्ताव में MSME के निर्यातकों के लिए भी विशेष उपाय शामिल थे।
4. What is the MSME limit for FY 2025-26?
उत्तर: FY 2025-26 के लिए MSME लोन की बिना गारंटी सीमा 20 लाख रुपये तय की गई है। पहले यह सीमा 10 लाख रुपये थी।
5. What is the MSME loan in the new budget 2025?
उत्तर: नए बजट 2025 में MSME लोन के तहत छोटे और सूक्ष्म उद्यमों को बिना गारंटी 20 लाख रुपये तक का लोन मिलेगा। इसके साथ ही क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट के माध्यम से लोन की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
6. 35% सब्सिडी कौन सा लोन है?
उत्तर: भारत में स्टार्टअप या तकनीकी उद्यमों के लिए बैंक लोन पर ब्याज सब्सिडी अक्सर 30% से 35% तक होती है। यह सुविधा खासकर Credit Guarantee Fund Scheme और प्रधानमंत्री स्टार्टअप योजना के तहत दी जाती है।
7. एमएसएमई 2025 का नया अपडेट क्या है?
उत्तर: MSME 2025 के नए अपडेट में प्रमुख बिंदु हैं:
- बिना गारंटी लोन सीमा 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख रुपये।
- क्रेडिट गारंटी फंड का विस्तार।
- छोटे उद्यमों को कार्यशील पूंजी और निवेश के लिए अधिक सुविधा।
- निर्यातक MSME के लिए विशेष सहायता।
8. 7 प्रकार के ऋण क्या हैं?
उत्तर: भारत में आमतौर पर 7 प्रमुख प्रकार के ऋण (Loans) होते हैं:
- व्यक्तिगत ऋण (Personal Loan) – व्यक्तिगत खर्च के लिए।
- गृह ऋण (Home Loan) – मकान खरीद या निर्माण के लिए।
- शिक्षा ऋण (Education Loan) – पढ़ाई के लिए।
- वाहन ऋण (Vehicle Loan) – कार, बाइक या वाहन खरीद के लिए।
- व्यवसाय ऋण / एमएसएमई लोन (Business/MSME Loan) – छोटे व्यवसाय के लिए।
- क्रेडिट कार्ड ऋण (Credit Card Loan) – क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल।
- कृषि ऋण (Agricultural Loan) – किसानों के लिए कृषि कार्य और निवेश।
9. मोदी 20 लाख लोन स्कीम क्या है?
उत्तर: मोदी सरकार ने MSME और स्टार्टअप्स के लिए 20 लाख रुपये तक बिना गारंटी लोन की सुविधा दी है। इसे MSME Loan Scheme 2026 या Collateral-Free Loan Scheme कहा जा सकता है। इसका उद्देश्य छोटे व्यवसायों को तेजी से विस्तार और कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराना है।
10. स्टार्टअप्स के लिए 20 लाख का अनुदान क्या है?
उत्तर: स्टार्टअप्स के लिए 20 लाख रुपये तक का अनुदान प्रधानमंत्री स्टार्टअप योजना (PM Startup Scheme) के तहत उपलब्ध हो सकता है। यह अनुदान या क्रेडिट सब्सिडी के रूप में दिया जाता है, ताकि नए व्यवसायों की स्थापना और संचालन आसान हो सके।
