
Nathdwara Medical College news : कभी नाथद्वारा के लोगों ने एक भव्य मेडिकल कॉलेज का सपना देखा था—एक ऐसा संस्थान जो न केवल क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांति लाएगा, बल्कि युवाओं के लिए शिक्षा और रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा। यह सपना अब एक अधूरी हकीकत में बदल गया है। जिस कॉलेज से उम्मीदें जुड़ी थीं, वह आज महज एक चारदीवारी तक सीमित रह गया है। एक ऐसी चारदीवारी, जो अब खंडहर का रूप लेती जा रही है। इसके भीतर न कोई कक्षा बनी, न कोई प्रयोगशाला तैयार हुई, और न ही चिकित्सा से जुड़ी कोई उम्मीद बाकी बची है।
Gunjol medical college construction : नाथद्वारा शहर के समीप स्थित गुंजोल गांव में करीब 80 बीघा भूमि पर 325 करोड़ रुपये की लागत से जिले के पहले राजकीय मेडिकल कॉलेज की आधारशिला रखी गई थी। इस परियोजना को लेकर स्थानीय लोगों में खासा उत्साह था। उनका मानना था कि अब गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए उदयपुर या जयपुर का रुख नहीं करना पड़ेगा। लेकिन यह उत्साह धीरे-धीरे निराशा में बदलता गया। कॉलेज निर्माण का काम लगभग एक साल पहले केवल चारदीवारी बनाकर रोक दिया गया। उसके बाद न तो कोई निर्माण कार्य आगे बढ़ा, और न ही किसी नई इमारत की शुरुआत हुई। आज वह स्थल वीरान पड़ा है—न निर्माण सामग्री की हलचल, न श्रमिकों की चहल-पहल, केवल एक सन्नाटा जो इस अधूरे सपने की गवाही देता है।
सरकार ने मांगा हिसाब-किताब
सबसे बड़ा संकेत यही है कि सरकार ने अब इस परियोजना को लेकर अपने इरादे स्पष्ट कर दिए हैं। निर्माण कार्य की जिम्मेदारी संभाल रही एजेंसी आरएसआरडीसी (राजस्थान स्टेट रोड डेवलपमेंट एंड कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन) से अब तक हुए खर्चों का विस्तृत ब्योरा मांगा गया है। इसका उद्देश्य है—“देय राशियों का निपटारा करना।” यह कदम उस अधूरी कहानी की तरह है जिसका आखिरी अध्याय लिखा जा रहा हो, लेकिन बिना किसी सुखद अंत के। प्रशासनिक हलकों में भी यह चर्चा तेज हो गई है कि जब सरकार किसी अधूरी परियोजना के बकाया भुगतान पर ध्यान केंद्रित कर रही हो, और वहीं दूसरी ओर पिछले एक वर्ष से कोई निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ा हो, तो यह संकेत स्पष्ट है—नाथद्वारा मेडिकल कॉलेज की यह महत्वाकांक्षी योजना अब शायद कभी साकार नहीं हो पाएगी।
मेडिकल कॉलेज बनने से क्या होते लाभ
Rajsamand News Today : उन्नत चिकित्सा सुविधाः॥ अगर नाथद्वारा में मेडिकल कॉलेज बनकर तैयार हो जाता, तो यह क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक बड़ा बदलाव साबित होता। स्थानीय लोगों को इलाज के लिए उदयपुर या जयपुर जैसे बड़े शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ती। मेडिकल कॉलेज से जुड़ा अस्पताल सैकड़ों बेड्स, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों, और विशेषज्ञ डॉक्टरों से लैस होता। यहां जटिल और गंभीर बीमारियों का इलाज संभव होता, जो छोटे अस्पतालों में मुमकिन नहीं होता। आपातकालीन स्थितियों में ट्रॉमा सेंटर और इमरजेंसी ऑपरेशन थिएटर तुरंत राहत देने में सक्षम होते। दुर्लभ बीमारियों से लेकर गंभीर सर्जरी तक की सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होतीं, जिससे इलाज में देरी और जोखिम दोनों घट जाते। मगर यह सब अब सिर्फ एक अधूरी योजना की कल्पना बनकर रह गया है।
शिक्षा और करियर के अवसर
मेडिकल कॉलेज स्थानीय छात्रों के लिए डॉक्टर, नर्स, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन आदि बनने का अवसर प्रदान करता है। कॉलेज मेडिकल सेक्टर में उच्च शिक्षा के लिए एक प्रतिष्ठित संस्थान होता है, जिससे स्थानीय और बाहरी विद्यार्थियों को आगे बढ़ने का मौका देता है। रोजगार के अवसर खुलते मेडिकल कॉलेज और उससे जुड़ा अस्पताल हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार देता है। जैसे डॉक्टर, नर्स, स्टाफ, क्लर्क, सफाई कर्मचारी, आदि। इसके अलावा आसपास होटल, किराए का मकान, रेस्टोरेंट, मेडिकल शॉप्स आदि की मांग भी बढ़ती है।
आर्थिक विकास सुदृढ़ होता
नाथद्वारा में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करता, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए शिक्षा और करियर के नए दरवाजे खोलता। यह कॉलेज डॉक्टर, नर्स, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन जैसे मेडिकल पेशेवरों की पढ़ाई और प्रशिक्षण के लिए एक प्रतिष्ठित संस्थान बन सकता था। इससे स्थानीय छात्रों को घर के पास ही उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलता, और उन्हें बड़े शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ता। मेडिकल कॉलेज और उससे जुड़े अस्पताल में प्रत्यक्ष रूप से डॉक्टर, नर्स, तकनीशियन, क्लर्क, वार्ड स्टाफ, सफाई कर्मचारी जैसे हजारों लोगों को रोजगार मिलता।
वहीं अप्रत्यक्ष रूप से आसपास की अर्थव्यवस्था को भी गति मिलती—जैसे कि होटल, रेस्टोरेंट, मेडिकल स्टोर्स, किराए पर मकान, परिवहन सेवाएं आदि की मांग में वृद्धि होती। यह संस्थान पूरे क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास का केंद्र बन सकता था। मगर अफसोस, आज यह अवसर केवल एक अधूरी योजना की तस्वीर बनकर रह गया है। मेडिकल कॉलेज में मेडिकल रिसर्च होती है जिससे नई दवाइयां, इलाज और तकनीकें विकसित होती हैं। इससे न केवल चिकित्सा क्षेत्र में सुधार होता है, बल्कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विज्ञान को लेकर क्षमता भी बढ़ती है।
किसी महामारी या आपदा के समय मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर, संसाधन और शोध संस्थान बहुत मदद करते हैं। जैसी कोविड महामारी व स्वास्थ्य जुड़ी बड़ी आपदाओं में मेडिकल कॉलेज परीक्षण, इलाज और वैक्सीनेशन जैसे कार्यों में अग्रणी भूमिका निभाता है।
इनका कहना है
सरकार ने ये पूछा है कि अभी तक कितना खर्च हुआ है। कहा गया है कि अब तक की जो भी देनदारी है, उसका क्या हिसाब-किताब भिजवाया जाए। इसके मायने क्या है, ये स्पष्ट रूप से मैं नहीं कह सकता। कोई भी निर्णय सरकार ही ले सकती है।
– लालचंद वर्मा, एक्सईएन, आरएसआरडीसी
राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी या बदलती प्राथमिकताएं?
नाथद्वारा में जिले के पहले राजकीय मेडिकल कॉलेज की योजना कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में बनी थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वर्ष 2023-24 के अंतिम बजट में इसकी घोषणा की थी, और इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 325 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी प्रदान की गई थी। इस मेडिकल कॉलेज को साकार करने के लिए नाथद्वारा के तत्कालीन विधायक और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी ने विशेष प्रयास किए थे। उनकी पहल पर ही कॉलेज के लिए भूमि आवंटन, बजट स्वीकृति, और निर्माण कार्य की प्रक्रिया प्रारंभ हुई। लेकिन सरकार बदलते ही यह परियोजना ठंडे बस्ते में चली गई। भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद, कॉलेज का निर्माण कार्य शिलान्यास और चारदीवारी निर्माण तक ही सीमित रह गया। उसके बाद न तो कोई ठोस प्रगति हुई, और न ही किसी इमारत का निर्माण शुरू हुआ। इस स्थिति को देखते हुए, वर्तमान विधायक विश्वराजसिंह मेवाड़ ने भी विधानसभा में इस मुद्दे को उठाया और सरकार से अनुरोध किया कि मेडिकल कॉलेज का कार्य दोबारा योजनाबद्ध तरीके से प्रारंभ किया जाए। लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद, यह परियोजना अब तक केवल कागज़ों और वादों तक सीमित रह गई है।

राजमेस ने भी मांगा विवरण
राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (राजमेस) ने भी अब इस अटकी हुई परियोजना को लेकर गंभीर रुख अपनाया है।
कॉर्पोरेशन ने कार्यकारी एजेंसी से विस्तृत खर्चों का विवरण मांगा है—यह पूछताछ सामान्य प्रक्रिया से कहीं अधिक गहरी मानी जा रही है। जानकारों का मानना है कि यह कदम इस ओर इशारा करता है कि सरकार अब इस परियोजना को समाप्त मान रही है। सरकारी कार्यप्रणाली में ऐसा विवरण अक्सर तभी मांगा जाता है जब कोई योजना अधर में लटक चुकी हो और उसके पुनः शुरू होने की संभावनाएं नगण्य हों। इस तरह की औपचारिकताएं आमतौर पर तभी पूरी की जाती हैं जब सरकार कोई फाइल बंद करने की दिशा में आगे बढ़ रही हो। इससे यह स्पष्ट होता जा रहा है कि नाथद्वारा मेडिकल कॉलेज का सपना, जो कभी उम्मीदों की नींव पर टिका था, अब धीरे-धीरे एक बंद अध्याय में तब्दील हो रहा है।
नाथद्वारा मेडिकल कॉलेज: कहां-कहां क्या हुआ, कब-कब क्या रुका
नाथद्वारा मेडिकल कॉलेज की परियोजना एक सुनहरे सपने की तरह शुरू हुई थी, लेकिन धीरे-धीरे यह सपना अधूरा रह गया। नीचे इस पूरे प्रोजेक्ट की टाइमलाइन दी गई है, जो बताती है कि सरकार ने कब क्या किया और अब तक क्या हुआ:
📅 भूमि का आवंटन – 5 जून 2023
राजस्व ग्राम गुंजोल में भवन निर्माण के लिए 20 हेक्टेयर (लगभग 80 बीघा) भूमि का आवंटन तत्कालीन जिला कलेक्टर द्वारा किया गया।
📅 प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति (AS-FS) – 8 जून 2023
राजकीय मेडिकल कॉलेज, राजसमंद-नाथद्वारा के लिए 325 करोड़ रुपये की राशि को बजट 2023-24 में प्रशासनिक एवं वित्तीय मंजूरी दी गई।
📅 कार्यकारी एजेंसी की नियुक्ति – 13 जून 2023
परियोजना के निर्माण कार्य हेतु राजस्थान मेडिकल एजुकेशन सोसाइटी (RAJMES) ने आरएसआरडीसी (RSRDC) को कार्यकारी एजेंसी नियुक्त किया।
📅 बाउंड्री वॉल वर्क ऑर्डर – 31 अगस्त 2023
कॉलेज की चारदीवारी निर्माण के लिए RSRDC ने वर्क ऑर्डर जारी किया और निर्माण की शुरुआत की गई।
📅 नोडल अधिकारी नियुक्ति – 3 अक्टूबर 2023
नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, कार्यों के क्रियान्वयन और समन्वयन के लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया।
📅 23.75 करोड़ की अतिरिक्त स्वीकृति – 3 अक्टूबर 2023
क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल के निर्माण और उपकरणों की खरीद के लिए 23 करोड़ 75 लाख रुपये की स्वीकृति जारी की गई।
📅 शिलान्यास – 5 अक्टूबर 2023
राज्य स्तरीय शिलान्यास कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री अशोक गहलोत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए वर्चुअली जुड़े।
इस दिन परियोजना को एक बड़ी शुरुआत मिली।
📅 भवन निर्माण वर्क ऑर्डर – 5 अक्टूबर 2023
इसी दिन कॉलेज भवन के निर्माण के लिए वर्क ऑर्डर जारी किया गया, लेकिन इसके बाद कार्य पूरी तरह ठप पड़ गया।
