
NPS Pension Scheme : अगर आप रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी को आर्थिक रूप से सुरक्षित बनाना चाहते हैं, तो नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है। यह स्कीम न केवल रिटायरमेंट के लिए एक मजबूत फंड तैयार करने में मदद करती है, बल्कि टैक्स बचत (tax savings) का भी शानदार अवसर देती है। सबसे खास बात यह है कि आप अपने ऑफिस के जरिए NPS अकाउंट खोल सकते हैं, जिसमें आप और आपका एम्प्लॉयर दोनों मिलकर योगदान दे सकते हैं। इससे न केवल आपकी रिटायरमेंट प्लानिंग मजबूत होती है, बल्कि टैक्स छूट के जरिए आपकी बचत भी बढ़ती है।
NPS अकाउंट के साथ, आप रिटायरमेंट की चिंताओं को अलविदा कह सकते हैं और अपने भविष्य को सुनहरा बना सकते हैं। आज हम इस लेख में विस्तार से जानेंगे कि एम्प्लॉयर NPS अकाउंट क्या होता है, इसे अपने ऑफिस के जरिए कैसे खोला जा सकता है, और न्यू व ओल्ड टैक्स रिजीम में इसके क्या-क्या फायदे हैं। इसके साथ ही, हम यह भी समझेंगे कि NPS में निवेश की राशि को कैसे चेक किया जा सकता है और कॉर्पोरेट NPS व पर्सनल NPS में क्या अंतर है।
एम्प्लॉयर NPS अकाउंट क्या है?
नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक स्वैच्छिक और दीर्घकालिक रिटायरमेंट सेविंग स्कीम है, जिसका उद्देश्य रिटायरमेंट के बाद की आर्थिक जरूरतों को पूरा करना है। इस स्कीम के तहत कोई भी भारतीय नागरिक, चाहे वह सरकारी कर्मचारी हो या प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाला, नियमित रूप से एक निश्चित राशि जमा करके अपने रिटायरमेंट के लिए एक मजबूत फंड तैयार कर सकता है।
NPS अकाउंट में योगदान दो तरह से किया जा सकता है—या तो व्यक्ति खुद अपनी ओर से पैसे जमा करे, या उसका एम्प्लॉयर (कंपनी) उसकी सैलरी से एक निश्चित राशि काटकर योगदान दे। यह योगदान कर्मचारी की बेसिक सैलरी और डीए (महंगाई भत्ता) के आधार पर तय होता है। एम्प्लॉयर द्वारा किए गए इस योगदान पर इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80CCD(2) के तहत टैक्स छूट मिलती है। इस तरह, NPS न केवल रिटायरमेंट के लिए एक सुरक्षित निवेश है, बल्कि यह टैक्स बचाने का भी एक शानदार जरिया है। National Pension system Trust
ऑफिस के जरिए NPS अकाउंट कैसे खोलें? जानें स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस
How to open NPS account : अगर आपकी कंपनी NPS की सुविधा प्रदान करती है, तो आपको अलग से NPS अकाउंट खोलने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अपने ऑफिस के जरिए एम्प्लॉयर NPS अकाउंट खोलना बेहद आसान है। बस आपको कुछ आसान स्टेप्स फॉलो करने होंगे। आइए, इन्हें विस्तार से समझते हैं:
स्टेप 1: अपनी कंपनी से मंजूरी लें
सबसे पहले अपने ऑफिस के HR डिपार्टमेंट से संपर्क करें और उन्हें बताएं कि आप NPS स्कीम में शामिल होना चाहते हैं। सरकारी कर्मचारियों के लिए यह स्कीम आमतौर पर अनिवार्य होती है, लेकिन प्राइवेट सेक्टर में यह कंपनी की पॉलिसी पर निर्भर करता है। अगर आपकी कंपनी इस स्कीम को सपोर्ट करती है, तो वे आपको आगे की प्रक्रिया के बारे में बताएंगे।
स्टेप 2: NPS फॉर्म भरें
HR डिपार्टमेंट से कॉमन सब्सक्राइबर रजिस्ट्रेशन फॉर्म (CSRF) लें। इस फॉर्म में आपको अपनी पर्सनल डिटेल्स जैसे नाम, पैन कार्ड नंबर, आधार कार्ड नंबर, और बैंक डिटेल्स भरने होंगे। इसके साथ ही, आपको एक पासपोर्ट साइज फोटो और जरूरी डॉक्यूमेंट्स की कॉपी (जैसे पैन कार्ड, आधार कार्ड, और बैंक पासबुक) संलग्न करनी होगी। फॉर्म को ध्यानपूर्वक भरें, ताकि कोई गलती न हो।
स्टेप 3: फॉर्म का वेरिफिकेशन कराएं
फॉर्म भरने के बाद इसे अपने HR या DDO (Drawing & Disbursing Officer) को जमा करें। वे आपके द्वारा दी गई जानकारी की जांच करेंगे और अगर सब कुछ सही पाया गया, तो फॉर्म को सेंट्रल रिकॉर्ड कीपिंग एजेंसी (CRA) को भेज दिया जाएगा। CRA इस प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो आपके NPS अकाउंट को मैनेज करती है।
स्टेप 4: PRAN नंबर प्राप्त करें
CRA आपके डॉक्यूमेंट्स की जांच के बाद आपको एक यूनिक PRAN (पर्मानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर) जारी करेगी। यह नंबर आपके मोबाइल नंबर या रजिस्टर्ड ईमेल आईडी पर भेजा जाएगा। PRAN आपके NPS अकाउंट की पहचान है और इसका उपयोग आप अपने अकाउंट को ट्रैक करने के लिए करेंगे।
स्टेप 5: PRAN नंबर ऑफिस को दें
PRAN नंबर मिलने के बाद, इसे अपने ऑफिस के HR या अकाउंट डिपार्टमेंट को दे दें। इसके बाद, आपकी सैलरी से हर महीने एक निश्चित राशि NPS अकाउंट में जमा होने लगेगी, और आपका एम्प्लॉयर भी अपने हिस्से का योगदान शुरू कर देगा।
स्टेप 6: सैलरी से योगदान शुरू होगा
अब हर महीने आपकी सैलरी से एक निश्चित राशि आपके NPS अकाउंट में ऑटोमैटिक रूप से जमा होने लगेगी। यह राशि आपकी बेसिक सैलरी और डीए का एक हिस्सा होगी। साथ ही, आपका एम्प्लॉयर भी अपनी ओर से योगदान देगा, जो आपकी रिटायरमेंट सेविंग्स को और मजबूत करेगा।
स्टेप 7: सैलरी ब्रेकअप की डिटेल्स लें
अपने ऑफिस से सैलरी स्लिप की डिटेल्स जरूर लें और चेक करें कि NPS में आपका और एम्प्लॉयर का योगदान सही ढंग से रिकॉर्ड किया गया है। यह जानकारी टैक्स छूट का लाभ लेने के लिए भी जरूरी है।
स्टेप 8: रेगुलर कंट्रीब्यूशन चेक करें
आप अपने NPS अकाउंट को रेगुलर मॉनिटर कर सकते हैं। इसके लिए आप https://enps.nsdl.com पर विजिट करें या NPS मोबाइल ऐप डाउनलोड करें। अपने PRAN नंबर और पासवर्ड से लॉगिन करें और अपने मासिक योगदान, अकाउंट बैलेंस, और स्टेटमेंट को चेक करें। इससे आपको अपनी रिटायरमेंट सेविंग्स की प्रोग्रेस पर नजर रखने में मदद मिलेगी।
NPS अकाउंट बैलेंस कैसे चेक करें?
NPS Account Balance Check Online : अपने NPS अकाउंट में जमा राशि और बैलेंस को चेक करना बहुत आसान है। इसके लिए आप कई तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं। आइए, इन्हें स्टेप-बाय-स्टेप समझते हैं:
स्टेप 1: वेबसाइट से NPS बैलेंस चेक करें
- प्रोसेस: प्रोटीन-CRA की वेबसाइट https://enps.nsdl.com पर जाएं।
- लॉगिन: अपने PRAN नंबर, यूजर आईडी, और पासवर्ड की मदद से लॉगिन करें। अगर आपके पास PRAN नहीं है, तो आप अपने आधार नंबर या पैन कार्ड की मदद से भी लॉगिन कर सकते हैं।
- बैलेंस चेक करें: लॉगिन करने के बाद, स्क्रीन पर ‘होल्डिंग स्टेटमेंट’ या ‘ट्रांजैक्शन स्टेटमेंट’ ऑप्शन पर क्लिक करें। यहां आप अपने NPS अकाउंट में जमा बैलेंस को आसानी से देख सकते हैं।
स्टेप 2: मोबाइल ऐप से NPS बैलेंस चेक करें
- ऐप डाउनलोड करें: अपने स्मार्टफोन में गूगल प्ले स्टोर या ऐपल स्टोर से NPS मोबाइल ऐप डाउनलोड करें।
- लॉगिन: ऐप में अपने PRAN नंबर और पासवर्ड डालकर लॉगिन करें।
- बैलेंस देखें: लॉगिन करने के बाद, आप अपने अकाउंट का बैलेंस (Tier I और Tier II दोनों) देख सकते हैं। यहां आप अपने मासिक योगदान और रिटर्न की जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं।
स्टेप 3: मिस्ड कॉल से NPS बैलेंस चेक करें
- मिस्ड कॉल दें: NSDL की वेबसाइट या NPS मोबाइल ऐप पर जाएं और वहां से मिस्ड कॉल सर्विस का नंबर 1800 210 0080 प्राप्त करें।
- लॉगिन: अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से इस नंबर पर मिस्ड कॉल दें।
- बैलेंस की जानकारी: मिस्ड कॉल देने के बाद, आपको अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक मैसेज प्राप्त होगा, जिसमें आपके NPS अकाउंट का बैलेंस और अन्य जानकारी होगी।
अपने NPS अकाउंट की जानकारी को नियमित रूप से चेक करते रहें, ताकि आप अपनी रिटायरमेंट प्लानिंग को और बेहतर तरीके से मैनेज कर सकें।

न्यू और ओल्ड टैक्स रिजीम में NPS के फायदे
What is NPS scheme and benefits : NPS में निवेश करने से आपको टैक्स बचत का बड़ा लाभ मिलता है, लेकिन यह फायदा आपके द्वारा चुने गए टैक्स रिजीम (न्यू या ओल्ड) पर निर्भर करता है। आइए, इसे विस्तार से समझते हैं:
ओल्ड टैक्स रिजीम
- सेक्शन 80CCD(1): अगर आप नौकरीपेशा हैं, तो आप अपनी सैलरी के 10% तक की राशि पर टैक्स छूट ले सकते हैं। यह छूट सेक्शन 80C की 1.5 लाख रुपये की कुल लिमिट में शामिल होती है। अगर आप सेल्फ-एम्प्लॉइड हैं, तो आप अपनी कुल कमाई के 20% तक की राशि पर छूट ले सकते हैं।
- सेक्शन 80CCD(1B): इसके अलावा, आप 50,000 रुपये की अतिरिक्त छूट अलग से ले सकते हैं। इस तरह, आप कुल मिलाकर 2 लाख रुपये तक की टैक्स बचत कर सकते हैं।
- सेक्शन 80CCD(2): आपके एम्प्लॉयर द्वारा NPS में किए गए योगदान पर भी टैक्स छूट मिलती है। यह छूट आपकी सैलरी के 10% तक की राशि पर लागू होती है और यह 80C की लिमिट से अलग होती है।
न्यू टैक्स रिजीम
- न्यू टैक्स रिजीम में केवल सेक्शन 80CCD(2) के तहत टैक्स छूट मिलती है, यानी सिर्फ एम्प्लॉयर द्वारा किए गए योगदान पर ही छूट मिलेगी।
- सेक्शन 80CCD(1) और 80CCD(1B) के तहत कोई भी छूट न्यू टैक्स रिजीम में उपलब्ध नहीं है।
इसलिए, अगर आप ओल्ड टैक्स रिजीम चुनते हैं, तो आपको टैक्स बचत का ज्यादा फायदा मिलेगा। हालांकि, न्यू टैक्स रिजीम में टैक्स स्लैब कम होने के कारण कई लोग इसे प्राथमिकता देते हैं। अपनी जरूरतों के हिसाब से रिजीम चुनें।
कॉर्पोरेट NPS और पर्सनल NPS में क्या अंतर है?
NPS अकाउंट दो तरह से खोला जा सकता है—पर्सनल NPS और कॉर्पोरेट NPS। दोनों में कुछ प्रमुख अंतर हैं, जो इस प्रकार हैं:
1. योगदान का तरीका
- पर्सनल NPS: इसमें पूरा योगदान आपको खुद करना होता है। आप अपनी मर्जी के अनुसार जितना चाहें, उतना पैसा जमा कर सकते हैं। हालांकि, टैक्स छूट का लाभ लेने के लिए सालाना 2 लाख रुपये तक का योगदान करना फायदेमंद रहता है।
- कॉर्पोरेट NPS: इसमें आपका एम्प्लॉयर भी योगदान करता है। आमतौर पर, आपकी बेसिक सैलरी और डीए का 10% एम्प्लॉयर द्वारा जमा किया जाता है। इसके अलावा, आप भी अपनी ओर से अतिरिक्त योगदान कर सकते हैं।
2. टैक्स छूट
- पर्सनल NPS:
- सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स छूट मिलती है (PPF, ELSS आदि निवेश सहित)।
- सेक्शन 80CCD(1B) के तहत 50,000 रुपये की अतिरिक्त छूट मिलती है।
- कॉर्पोरेट NPS:
- सेक्शन 80C और 80CCD(1B) के तहत वही छूट मिलती है, जो पर्सनल NPS में मिलती है।
- इसके अलावा, एम्प्लॉयर द्वारा किए गए योगदान पर सेक्शन 80CCD(2) के तहत सैलरी के 10% तक की अतिरिक्त टैक्स छूट मिलती है, जो 80C की लिमिट से अलग होती है।
3. लचीलापन
- पर्सनल NPS: इसमें आपको पूरा लचीलापन मिलता है। आप अपनी सुविधा के अनुसार योगदान की राशि और समय तय कर सकते हैं।
- कॉर्पोरेट NPS: इसमें योगदान ऑटोमैटिक रूप से आपकी सैलरी से कटता है, इसलिए इसमें उतना लचीलापन नहीं मिलता। हालांकि, यह अनुशासित निवेश को बढ़ावा देता है।
ऑफिस NPS खोलने के बाद क्या खुद से भी योगदान किया जा सकता है?
National Pension Scheme eligibility : हां, अपने ऑफिस के जरिए NPS अकाउंट खोलने के बाद भी आप इसमें अतिरिक्त योगदान कर सकते हैं। NPS में दो तरह के अकाउंट होते हैं—Tier I और Tier II। इनके बारे में विस्तार से जानते हैं:
- Tier I (पेंशन अकाउंट): यह मुख्य NPS अकाउंट है, जिसमें आपकी सैलरी से और आपके एम्प्लॉयर द्वारा योगदान किया जाता है। आमतौर पर, एम्प्लॉयर आपकी बेसिक सैलरी और डीए का 10% जमा करता है, और आप भी कम से कम उतना ही योगदान करते हैं। यह अकाउंट रिटायरमेंट के लिए डिज़ाइन किया गया है, और इसमें लॉक-इन पीरियड होता है।
- Tier II (ऑप्शनल अकाउंट): यह एक वैकल्पिक अकाउंट है, जिसमें आप अपनी मर्जी के अनुसार जितना चाहें, उतना योगदान कर सकते हैं। इसमें कोई ल забіток-इन पीरियड नहीं होता, और आप जरूरत पड़ने पर पैसे निकाल सकते हैं। यह अकाउंट उन लोगों के लिए उपयोगी है, जो रिटायरमेंट के अलावा भी NPS में निवेश करना चाहते हैं।
इस तरह, आप अपने ऑफिस NPS अकाउंट के साथ-साथ Tier II अकाउंट में भी अतिरिक्त योगदान कर सकते हैं, जिससे आपकी बचत और रिटर्न दोनों बढ़ सकते हैं।



