
NREGA Time Changed : राजस्थान के राजसमंद जिले में मई के अंतिम सप्ताह में तापमान ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। सूरज की तपिश और गर्म हवाओं ने आम जनजीवन को प्रभावित किया है, लेकिन इसका सबसे ज्यादा असर उन श्रमिकों पर पड़ा है, जो नरेगा (मनरेगा) योजना के तहत खुले में काम करते हैं। तेज धूप और हीटवेव की स्थिति ने इन श्रमिकों के लिए काम करना जोखिम भरा बना दिया है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए राजसमंद जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए नरेगा कार्यस्थलों के समय में बदलाव करने का निर्णय लिया है।
जिला कलेक्टर ने जारी किए आदेश
NREGA work reschedule due to heat जिला कलेक्टर बालमुकंद असावा ने इस भीषण गर्मी से नरेगा श्रमिकों को राहत देने के लिए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत जिले की सभी पंचायत समितियों में कार्य समय में परिवर्तन किया गया है। कलेक्टर असावा ने जिले की आठ पंचायत समितियों—आमेट, भीम, देवगढ़, खमनोर, रेलमगरा, देलवाड़ा, कुंभलगढ़ और राजसमंद—के विकास अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे नरेगा कार्यस्थलों पर नए समय का सख्ती से पालन करवाएं। इस कदम का मुख्य उद्देश्य श्रमिकों को तीव्र गर्मी और हीटवेव के दुष्प्रभावों से बचाना है, ताकि उनकी सेहत पर कोई विपरीत असर न पड़े।
नया कार्य समय: सुबह जल्दी शुरू, दोपहर तक समाप्त
NREGA attendance जिला कलेक्टर के नए आदेश के अनुसार, नरेगा कार्यस्थलों पर अब काम का समय सुबह 5:30 बजे से शुरू होकर दोपहर 12:30 बजे तक निर्धारित किया गया है। इस समय में विश्राम काल शामिल नहीं है, जिसका मतलब है कि श्रमिकों को इस दौरान लगातार काम करना होगा, लेकिन दोपहर की तपती धूप से बचने के लिए समय को सीमित रखा गया है। यह बदलाव इसलिए किया गया है, क्योंकि दोपहर 12 बजे के बाद सूरज की गर्मी अपने चरम पर होती है, जिससे हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है। नए समय के साथ श्रमिक सुबह की ठंडी हवा में काम शुरू कर सकते हैं और दोपहर की भीषण गर्मी से पहले अपना काम समाप्त कर सकते हैं।
टास्क पूरा होने पर जल्दी छुट्टी का प्रावधान
nrega.nic.in login जिला प्रशासन ने श्रमिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक और महत्वपूर्ण प्रावधान किया है। यदि कोई श्रमिक समूह अपने निर्धारित टास्क को तय समय से पहले पूरा कर लेता है, तो वह सुबह 11 बजे के बाद कार्यस्थल छोड़ सकता है। इसके लिए समूह को अपने टास्क की माप कार्यस्थल पर मौजूद मस्टर रोल में अंकित करवानी होगी। साथ ही, टास्क प्रपत्र में समूह के मुखिया के हस्ताक्षर करवाने होंगे। यह प्रावधान उन श्रमिकों के लिए राहत भरा है, जो मेहनती और तेजी से काम करने वाले हैं, क्योंकि इससे उन्हें गर्मी के चरम समय से पहले घर लौटने का अवसर मिलेगा।
आदेश की अवधि : 15 जुलाई तक प्रभावी
NREGA Rajasthan जिला कलेक्टर द्वारा जारी यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और यह 15 जुलाई, 2025 तक प्रभावी रहेगा। यह अवधि इसलिए चुनी गई है, क्योंकि मई से जुलाई तक राजस्थान में गर्मी अपने चरम पर होती है। इस दौरान तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहने की संभावना बनी रहती है, जो हीटवेव की स्थिति को जन्म देती है। 15 जुलाई के बाद मानसून की शुरुआत होने की उम्मीद है, जिसके चलते तापमान में कमी आ सकती है और मौसम श्रमिकों के लिए अनुकूल हो सकता है। तब तक यह नया समय श्रमिकों को गर्मी से बचाने में मदद करेगा।
हीटवेव का प्रभाव और प्रशासन की सतर्कता
पिछले कुछ दिनों से राजस्थान में तापमान लगातार बढ़ रहा है। राजसमंद जिले में भी स्थिति गंभीर हो गई है, जहां दिन का तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच गया है। दोपहर के समय सूरज की तपिश इतनी तेज हो जाती है कि बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। नरेगा श्रमिक, जो ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण, तालाब खोदने और अन्य बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्य करते हैं, इस गर्मी से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। कई श्रमिकों ने गर्मी के कारण थकान, चक्कर आने और डिहाइड्रेशन की शिकायतें की हैं। ऐसे में जिला प्रशासन का यह कदम समय की मांग है और इससे श्रमिकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

नरेगा योजना और श्रमिकों की स्थिति
नरेगा (मनरेगा) योजना ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने वाली भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है। इस योजना के तहत ग्रामीण श्रमिकों को साल में कम से कम 100 दिनों का गारंटीशुदा रोजगार दिया जाता है। राजसमंद जिले में भी हजारों श्रमिक इस योजना के तहत काम करते हैं। ये श्रमिक ज्यादातर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आते हैं और इनके पास गर्मी से बचने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होते। कई बार ये श्रमिक खुले मैदानों में बिना छांव के काम करते हैं, जहां गर्मी का असर और भी ज्यादा होता है। ऐसे में प्रशासन का यह फैसला न केवल उनकी सेहत की रक्षा करेगा, बल्कि उनके काम करने की क्षमता को भी बनाए रखेगा।
गर्मी से बचाव के लिए प्रशासन के सुझाव
जिला प्रशासन ने नरेगा श्रमिकों के लिए गर्मी से बचाव के कुछ उपाय भी सुझाए हैं। इनमें शामिल हैं:
- पर्याप्त पानी का सेवन: श्रमिकों को सलाह दी गई है कि वे काम के दौरान अपने साथ पानी की बोतल रखें और हर 15-20 मिनट में पानी पीते रहें। डिहाइड्रेशन से बचने के लिए ओआरएस या नींबू पानी का सेवन भी फायदेमंद होगा।
- हल्के कपड़े पहनें: हल्के रंग के सूती कपड़े पहनने की सलाह दी गई है, जो गर्मी को कम अवशोषित करते हैं और त्वचा को सांस लेने में मदद करते हैं।
- सिर को ढकें: सिर को धूप से बचाने के लिए टोपी, गमछा या स्कार्फ का इस्तेमाल करने को कहा गया है।
- विश्राम: यदि किसी श्रमिक को चक्कर, थकान या कमजोरी महसूस हो, तो उसे तुरंत काम बंद करके छांव में बैठना चाहिए और पानी पीना चाहिए।
स्थानीय लोगों और श्रमिकों की प्रतिक्रिया
नरेगा श्रमिकों ने जिला प्रशासन के इस फैसले का स्वागत किया है। स्थानीय श्रमिक रामलाल, जो कुंभलगढ़ पंचायत समिति में काम करते हैं, ने बताया कि दोपहर की गर्मी में काम करना बहुत मुश्किल हो गया था। कई बार उन्हें सिरदर्द और चक्कर आने की शिकायत हो रही थी। नए समय के बाद अब वे सुबह जल्दी काम शुरू कर सकते हैं और दोपहर से पहले घर लौट सकते हैं। एक अन्य श्रमिका, शांति देवी ने कहा कि यह बदलाव उनके लिए वरदान साबित होगा, क्योंकि अब उनके बच्चे भी गर्मी से बचे रहेंगे, जो उनके साथ कार्यस्थल पर आते हैं।
गर्मी का व्यापक प्रभाव
राजसमंद में इस समय गर्मी का असर न केवल नरेगा श्रमिकों पर, बल्कि आम लोगों पर भी पड़ रहा है। बाजारों में दोपहर के समय सन्नाटा पसरा रहता है, क्योंकि लोग घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं। स्कूलों में गर्मी की छुट्टियां घोषित कर दी गई हैं, ताकि बच्चे इस तीव्र गर्मी से बचे रहें। स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों पर भी गर्मी से संबंधित बीमारियों जैसे हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और त्वचा की समस्याओं के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। जिला प्रशासन ने सभी स्वास्थ्य केंद्रों को अलर्ट पर रखा है और लोगों से गर्मी से बचाव के उपाय अपनाने की अपील की है।
भविष्य की संभावना
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, राजसमंद में अगले कुछ दिनों तक गर्मी का प्रकोप जारी रहने की संभावना है। हालांकि, जून के मध्य से मानसून से पहले की बारिश (Pre-Monsoon Showers) शुरू होने की उम्मीद है, जो तापमान को कम करने में मदद कर सकती है। तब तक जिला प्रशासन ने सभी विभागों को अलर्ट पर रहने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। नरेगा कार्य समय में यह बदलाव भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
राजसमंद जिले में भीषण गर्मी और हीटवेव की स्थिति को देखते हुए जिला कलेक्टर बालमुकंद असावा ने नरेगा श्रमिकों के लिए कार्य समय में बदलाव का जो फैसला लिया है, वह सराहनीय है। सुबह 5:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक का नया समय और टास्क पूरा होने पर जल्दी छुट्टी का प्रावधान श्रमिकों को बड़ी राहत देगा। यह आदेश 15 जुलाई तक प्रभावी रहेगा, जिसके बाद मौसम में बदलाव की उम्मीद है। तब तक श्रमिकों और आम लोगों को गर्मी से बचाव के उपाय अपनाकर इस चुनौती का सामना करना होगा। जिला प्रशासन की यह पहल न केवल श्रमिकों की सेहत की रक्षा करेगी, बल्कि उनकी कार्यक्षमता को भी बनाए रखने में मदद करेगी।



