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Personal loan growth : हर भारतीय पर ₹4.8 लाख का कर्ज: 2 साल में 23% की वृद्धि | RBI Alert

Laxman Singh Rathor July 2, 2025 1 minute read

Personal loan growth : देश की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इसके साथ ही देश के प्रत्येक नागरिक पर कर्ज का बोझ भी बढ़ता जा रहा है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की जून 2025 की फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट के अनुसार, हर भारतीय पर औसतन 4.8 लाख रुपए का कर्ज है। यह आंकड़ा मार्च 2023 में 3.9 लाख रुपए था, यानी महज दो साल में कर्ज में 23% की वृद्धि हुई है। इस वृद्धि का मतलब है कि प्रत्येक व्यक्ति पर औसतन 90,000 रुपए का अतिरिक्त कर्ज चढ़ गया है। यह स्थिति व्यक्तिगत और राष्ट्रीय स्तर पर कई सवाल खड़े करती है। क्या यह बढ़ता कर्ज अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बन सकता है? आम आदमी पर इसका क्या असर होगा? पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड बकाया और माइक्रोफाइनेंस लोन में तेजी से वृद्धि ने इस कर्ज के बोझ को और बढ़ाया है। हालांकि, RBI का कहना है कि भारत का कुल कर्ज GDP का 42% है, जो अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं (46.6%) से कम है। फिर भी, माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में बढ़ते स्ट्रेस्ड असेट्स और ऊंची ब्याज दरें चिंता का विषय हैं। यह परिचय आपको इस कर्ज की स्थिति और इसके प्रभावों को समझने के लिए तैयार करता है, ताकि आप अपनी वित्तीय योजनाओं को बेहतर ढंग से संभाल सकें।

India debt per person : बढ़ता कर्ज निश्चित रूप से चिंता का विषय है, लेकिन RBI की रिपोर्ट बताती है कि स्थिति अभी नियंत्रण में है। भारत में प्रति व्यक्ति कर्ज हर भारतीय पर 4.8 लाख रुपए का औसत कर्ज और दो साल में 23% की वृद्धि न केवल व्यक्तिगत वित्तीय दबाव को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि लोग अपनी जरूरतों के लिए अधिक उधार ले रहे हैं। पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड बकाया में तेज वृद्धि, साथ ही माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में बढ़ते स्ट्रेस्ड असेट्स, सतर्कता की मांग करते हैं। हालांकि, भारत का कर्ज GDP के 42% पर है, जो अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं से कम है, और ज्यादातर उधारकर्ताओं की अच्छी रेटिंग कर्ज डूबने के जोखिम को कम करती है। आम लोगों के लिए यह जरूरी है कि वे लोन लेते समय अपनी चुकाने की क्षमता का आकलन करें। RBI की लचीली मौद्रिक नीति से ब्याज दरें कम हो सकती हैं, लेकिन माइक्रोफाइनेंस लोन की ऊंची ब्याज दरों से सावधान रहना होगा। भविष्य में वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए जागरूकता और समझदारी से निर्णय लेना जरूरी है।

RBI Financial Report : सरकार लेती चार तरह के कर्ज

क्रम संख्याकर्ज का प्रकारस्रोत / विवरण
1️⃣देसी कर्जRBI, दूसरे बैंक, बीमा कंपनियाँ या कॉर्पोरेट कंपनियाँ
2️⃣विदेशी कर्जIMF, वर्ल्ड बैंक और अन्य विदेशी बैंक
3️⃣सार्वजनिक कर्जट्रेजरी बिल, गोल्ड बॉन्ड, स्मॉल सेविंग स्कीम आदि
4️⃣अन्य कर्ज1990 में सरकार ने सोना गिरवी रखकर कर्ज लिया (जैसे आपात स्थिति में)

Economy of India : भारत की इकॉनोमी 10 साल में 105% बढ़ी

देश2015 में GDP (ट्रिलियन डॉलर)2025 में GDP (ट्रिलियन डॉलर)वृद्धि (%)
भारत2.14.3105%
अमेरिका18.130.366%
चीन11.119.576%
जर्मनी2.13.144%
जापान4.44.40%
UK (ब्रिटेन)2.93.938%
फ्रांस2.43.336%
इटली2.53.539%
कनाडा2.12.134%
ब्राज़ील1.82.013%

नोट: ये आंकड़े ट्रिलियन डॉलर में हैं।

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India per capita debt : सवालों से प्रभाव

सवाल 1: कर्ज में वृद्धि (Personal loan growth) का क्या अर्थ है?

जवाब: लोग पहले की तुलना में अधिक उधार ले रहे हैं। इसमें होम लोन, पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड का बकाया और अन्य रिटेल लोन शामिल हैं।

  • पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड बकाया जैसे गैर-आवासीय रिटेल लोन में सबसे ज्यादा वृद्धि हुई है, जो कुल घरेलू लोन का 54.9% हिस्सा हैं।
  • यह कर्ज डिस्पोजेबल इनकम (खर्च योग्य आय) का 25.7% है।
  • आवासीय लोन का हिस्सा 29% है, जिसमें ज्यादातर लोग पहले से लिए गए लोन के साथ दोबारा लोन ले रहे हैं।

सवाल 2: क्या भारत का कर्ज GDP की तुलना में बहुत ज्यादा है?

जवाब: RBI के अनुसार, भारत का कुल कर्ज GDP का 42% है, जो अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं (EMEs) के 46.6% की तुलना में कम है।

  • भारत में कर्ज की स्थिति नियंत्रण में है।
  • ज्यादातर उधारकर्ताओं की रेटिंग अच्छी है, जिससे कर्ज डूबने का जोखिम कम है।
  • कोविड-19 की तुलना में कर्ज न चुका पाने की दर (डेलिंक्वेंसी रेट) में कमी आई है।
  • हालांकि, कम रेटिंग वाले और ज्यादा कर्ज लेने वालों के लिए जोखिम बना हुआ है।

सवाल 3: माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में कर्ज की स्थिति कैसी है?

जवाब: माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में कर्ज लेने वालों की औसत देनदारी (Personal loan growth) 11.7% कम हुई है। लेकिन 2025 की दूसरी छमाही में स्ट्रेस्ड असेट्स (जोखिम वाले कर्ज) की संख्या बढ़ी है।

  • RBI ने बताया कि माइक्रोफाइनेंस कंपनियां ऊंची ब्याज दरें और मार्जिन वसूल रही हैं, जिससे कर्ज चुकाना मुश्किल हो रहा है।

सवाल 4: भारत पर बाहरी कर्ज कितना है?

जवाब: मार्च 2025 तक भारत का बाहरी कर्ज 736.3 बिलियन डॉलर था, जो पिछले साल से 10% ज्यादा है और GDP का 19.1% है।

  • इसमें सबसे बड़ा हिस्सा नॉन-फाइनेंशियल कॉर्पोरेशन्स (35.5%), डिपॉजिट लेने वाली संस्थाओं (27.5%) और सरकार (22.9%) का है।
  • कुल बाहरी कर्ज का 54.2% हिस्सा अमेरिकी डॉलर में है।

सवाल 5: इसका आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?

report rbi loan statistics : जवाब: कर्ज लेना अब आसान है, लेकिन कर्ज का बोझ भी बढ़ रहा है।

  • लोन लेते समय अपनी चुकाने की क्षमता का ध्यान रखें।
  • RBI की लचीली मौद्रिक नीति से ब्याज दरें कम हो सकती हैं, जिससे कर्ज चुकाना आसान हो सकता है।
  • माइक्रोफाइनेंस लोन लेते समय सावधानी बरतें, क्योंकि उनकी ब्याज दरें ज्यादा हो सकती हैं।
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About the Author

Laxman Singh Rathor

Administrator

Laxman Singh Rathor को पत्रकारिता के क्षेत्र में दो दशक का लंबा अनुभव है। 2005 में Dainik Bhakar से कॅरियर की शुरुआत कर बतौर Sub Editor कार्य किया। वर्ष 2012 से 2019 तक Rajasthan Patrika में Sub Editor, Crime Reporter और Patrika TV में Reporter के रूप में कार्य किया। डिजिटल मीडिया www.patrika.com पर भी 2 वर्ष कार्य किया। वर्ष 2020 से 2 वर्ष Zee News में राजसमंद जिला संवाददाता रहा। आज ETV Bharat और Jaivardhan News वेब पोर्टल में अपने अनुभव और ज्ञान से आमजन के दिल में बसे हैं। लक्ष्मण सिंह राठौड़ सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि खबरों की दुनिया में एक ब्रांड हैं। उनकी गहरी समझ, तथ्यात्मक रिपोर्टिंग, पाठक व दर्शकों से जुड़ने की क्षमता ने उन्हें पत्रकारिता का चमकदार सितारा बना दिया है। jaivardhanpatrika@gmail.com

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