
Personal loan interest rate : आज के डिजिटल दौर में Personal Loan लेना बेहद आसान हो गया है। मोबाइल ऐप पर कुछ क्लिक कीजिए और कुछ ही मिनटों में राशि आपके बैंक अकाउंट में पहुंच जाती है। शादी, मेडिकल इमरजेंसी, ट्रैवल, घर की मरम्मत या अन्य अचानक खर्चों के लिए लोग तेजी से पर्सनल लोन का सहारा लेने लगे हैं। लेकिन यह सुविधा जितनी सरल दिखती है, उतनी ही जोखिम भरी भी हो सकती है, यदि लोन को सही तरीके से मैनेज न किया जाए।
Personal Loan management tips : दरअसल, पर्सनल लोन एक Unsecured Loan होता है, यानी इसमें किसी तरह की गारंटी या गिरवी की जरूरत नहीं पड़ती। यही कारण है कि इस पर ब्याज दरें (Interest Rates) आमतौर पर अन्य लोन की तुलना में अधिक होती हैं। यदि EMI, अवधि और लोन राशि का संतुलन नहीं रखा गया, तो ब्याज का बोझ आपकी वित्तीय सेहत को कमजोर कर सकता है। ऐसे में वित्तीय विशेषज्ञ 5-15-25 फॉर्मूला अपनाने की सलाह देते हैं, जो लोन मैनेजमेंट का एक बेहद व्यावहारिक और प्रभावी तरीका माना जाता है।
क्या है 5-15-25 फॉर्मूला?
यह फॉर्मूला तीन सरल नियमों पर आधारित है, जो आपकी आय, EMI और लोन अवधि के बीच सही तालमेल बैठाता है।
पहला नियम – 5% EMI नियम
personal loan EMI planning : आपकी EMI आपकी मासिक सैलरी (Monthly Income) के 5% से अधिक नहीं होनी चाहिए। उदाहरण के लिए, यदि आपकी मासिक आय ₹40,000 है, तो EMI ₹2,000 से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इसका फायदा यह है कि आपकी बाकी जरूरी जरूरतें जैसे घर खर्च, बचत, बीमा, बच्चों की पढ़ाई आदि प्रभावित नहीं होते। अधिक EMI आपकी कैश फ्लो (Cash Flow) को बिगाड़ सकती है और वित्तीय तनाव बढ़ा सकती है।
दूसरा नियम – 15 महीने की अवधि
smart loan repayment strategy : पर्सनल लोन की अवधि 15 महीनों से ज्यादा नहीं रखनी चाहिए। लंबी अवधि का लोन आपको EMI में राहत जरूर देता है, लेकिन कुल मिलाकर ब्याज की रकम काफी बढ़ जाती है।
कम अवधि में लोन चुकाने से:
- ब्याज कम देना पड़ता है
- जल्दी कर्ज से मुक्ति मिलती है
- क्रेडिट प्रोफाइल मजबूत होती है

तीसरा नियम – 25% लोन लिमिट
unsecured loan interest control : आपकी कुल लोन राशि आपके वार्षिक वेतन (Annual Income) के 25% से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। यदि आपकी सालाना आय ₹6 लाख है, तो पर्सनल लोन ₹1.5 लाख से अधिक नहीं लेना चाहिए। इससे लोन चुकाना आपके लिए आसान रहता है और भविष्य की वित्तीय स्थिरता बनी रहती है।
क्यों जरूरी है यह फॉर्मूला?
पर्सनल लोन की सबसे बड़ी चुनौती उसका हाई इंटरेस्ट रेट होता है। कई बार लोग छोटी EMI के चक्कर में लंबी अवधि चुन लेते हैं, जिससे ब्याज कई गुना बढ़ जाता है। 5-15-25 फॉर्मूला आपको अनुशासन सिखाता है और बताता है कि:
Loan लेना आसान है, लेकिन समझदारी से चुकाना ही असली वित्तीय बुद्धिमत्ता है।
किन लोगों के लिए यह फॉर्मूला सबसे उपयोगी?
- जिनकी आय सीमित है लेकिन जरूरतें अचानक आती हैं
- जो मेडिकल या फैमिली इमरजेंसी में लोन लेते हैं
- जो क्रेडिट कार्ड बकाया चुकाने के लिए लोन लेने की सोच रहे हैं
- जो EMI के जाल में फंसने से बचना चाहते हैं
एक्सपर्ट की राय
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि पर्सनल लोन को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। यदि EMI आपकी आय के अनुपात में है, लोन अवधि छोटी है और लोन राशि सीमित है, तो यह बोझ नहीं बल्कि सहारा बन सकता है।
