
PETROL DIESEL PRICES IN INDIA : मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर लोगों की चिंता काफी हद तक कम हो गई है। इसकी वजह यह है कि होर्मुज रूट प्रभावित होने के बाद सरकार ने कुल आयात का 10% कच्चा तेल वैकल्पिक रास्तों से मंगाना शुरू कर दिया है। सप्लाई पर असर पड़ने की आशंका को देखते हुए यह रणनीतिक फैसला लिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत के पास कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है और हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं। हालांकि, होर्मुज रूट बंद होने के बाद बीते 8 दिनों में इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 27% तक उछाल आया है।
सरकारी सूत्रों ने साफ शब्दों में कहा, “पेट्रोल और डीजल के दाम नहीं बढ़ेंगे। हम देश को एक बार फिर भरोसा दिलाते हैं कि इनकी कीमतों में कोई इजाफा नहीं किया जाएगा।”
जरूरत का 70% कच्चा तेल अब वैकल्पिक रास्तों से आएगा
INDIA OIL SUPPLY HORMUZ ROUTE : ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ब्लॉक कर दिया है। यह वही समुद्री मार्ग है, जहां से दुनिया की करीब 20% तेल सप्लाई गुजरती है। भारत अब तक अपनी जरूरत का लगभग 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता रहा है। लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए भारत ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है और इस संवेदनशील रूट पर निर्भरता कम करनी शुरू कर दी है।
10% की बढ़ोतरी
भारत ने उन समुद्री मार्गों से कच्चे तेल के आयात में 10% की बढ़ोतरी की है, जो होर्मुज क्षेत्र से प्रभावित नहीं होते।
नया रूट प्लान
CRUDE OIL PRICE HIKE NEWS : पहले भारत अपनी जरूरत का 60% कच्चा तेल होर्मुज के अलावा दूसरे रास्तों से मंगाता था, जिसे अब बढ़ाकर 70% कर दिया गया है। इससे खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव और जंग का असर भारत की सप्लाई चेन पर अपेक्षाकृत कम पड़ेगा। उल्लेखनीय है कि भारत अपनी जरूरत का करीब 85 से 90% कच्चा तेल 40 से अधिक देशों से आयात करता है।

ईरान का संकेत- होर्मुज से कार्गो मूवमेंट जल्द शुरू हो सकता है
INDIA FUEL PRICE LATEST UPDATE : सरकार की ओर से यह संकेत भी मिले हैं कि होर्मुज रूट के आसपास जहाजों की आवाजाही जल्द सामान्य हो सकती है।
ईरान का रुख
सूत्रों के अनुसार, ईरान ने भरोसा दिलाया है कि वह अपने पड़ोसी देशों को तब तक निशाना नहीं बनाएगा, जब तक उन देशों की जमीन से ईरान पर हमला नहीं किया जाता।
ग्लोबल सपोर्ट
भारत के लिए राहत की बात यह भी है कि दुनिया के कई अन्य देश उसे तेल और एलएनजी की सप्लाई देने में रुचि दिखा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि भारत के पास इस समय एलएनजी का सरप्लस स्टॉक भी उपलब्ध है।
देश में तेल भंडार मजबूत, सरकार का भरोसा बढ़ा
पश्चिम एशिया में जारी उथल-पुथल के बावजूद भारत की एनर्जी सिक्योरिटी पहले से अधिक मजबूत नजर आ रही है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, हालिया समीक्षा में तेल भंडार की स्थिति में सुधार दर्ज किया गया है।
स्टॉक की स्थिति
सूत्रों का कहना है, “भारत की एनर्जी स्टॉक पोजीशन लगातार बेहतर हो रही है। जैसे-जैसे हालात संभल रहे हैं, हमारा भरोसा भी मजबूत होता जा रहा है।”
रिव्यू मीटिंग में संकेत
आंतरिक समीक्षा बैठकों में भी यह सामने आया है कि भारत का एनर्जी स्टॉक पहले की तुलना में कहीं बेहतर स्थिति में पहुंच चुका है।
LPG की कीमतों को लेकर कांग्रेस पर सरकार का पलटवार
सरकार ने रसोई गैस यानी LPG की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस ने आधिकारिक बयान की गलत व्याख्या कर भ्रम फैलाने की कोशिश की है।
भ्रामक दावा
सरकारी सूत्रों ने कहा, “कांग्रेस के आरोप पूरी तरह निराधार हैं। कीमतों को स्थिर रखने का आश्वासन केवल पेट्रोल और डीजल के लिए दिया गया था, LPG के लिए नहीं।”
LPG स्टॉक की स्थिति
सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि एक समय रसोई गैस के स्टॉक को लेकर चिंता जरूर थी, लेकिन अब स्थिति काफी बेहतर हो चुकी है और सप्लाई को लेकर कोई कमी नहीं है।
ईरान-इजराइल जंग के बीच कच्चा तेल 92 डॉलर प्रति बैरल के पार
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी तनावपूर्ण संघर्ष के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। शनिवार, 7 मार्च को ब्रेंट क्रूड ऑयल का भाव करीब 9% बढ़कर 92.69 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। अप्रैल 2024 के बाद यह इसका सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है।
28 फरवरी को जब इस संघर्ष की शुरुआत हुई थी, तब कच्चे तेल की कीमत 72.87 डॉलर प्रति बैरल थी। यानी सिर्फ 8 दिनों में क्रूड ऑयल करीब 20 डॉलर प्रति बैरल महंगा हो गया है।



