
Rain Alert : राजस्थान, जो हमेशा से सूखे और गर्मी के लिए जाना जाता रहा है, इस साल मानसून की भारी मेहरबानी का गवाह बन रहा है। इस मानसून सीजन में राज्य में 108 वर्षों के इतिहास में दूसरी सबसे अधिक बारिश दर्ज की गई है। साल 1917 में पड़े रिकॉर्ड 844.2 MM बारिश के बाद, 2025 में अब तक 693.1 MM वर्षा हो चुकी है, जो सामान्य औसत से कहीं अधिक है। इस असाधारण बारिश का सीधा असर राज्य की जल संरचना पर पड़ा है, जहां 63 प्रतिशत से अधिक बांध पूरी तरह भर चुके हैं। इससे न केवल जल संकट की चिंताओं में कमी आई है, बल्कि कई क्षेत्रों में बाढ़ जैसी स्थिति भी उत्पन्न हो गई है।
मंगलवार को भी मौसम विभाग ने दो जिलों—जैसलमेर और बाड़मेर—में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इस अलर्ट के चलते चार जिलों—जैसलमेर, बाड़मेर, बालोतरा और जालोर—में स्कूलों को बंद रखने का फैसला लिया गया है, ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। जालोर जिले में तो बारिश की तीव्रता इतनी अधिक रही कि भारत माला एक्सप्रेस-वे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ढह गया। इस घटना से यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ, और वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। स्थानीय प्रशासन ने तुरंत मरम्मत कार्य शुरू कर दिया है, लेकिन इससे सड़क सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की कमजोरियों पर सवाल उठने लगे हैं।

मानसून का कमजोर पड़ना संभव, लेकिन अभी सतर्कता जरूरी
Rajasthan ka Mosam : राजस्थान में सोमवार को बाड़मेर, जैसलमेर, जालोर और सिरोही जैसे जिलों में एक डिप्रेशन सिस्टम के प्रभाव से अच्छी-खासी बारिश हुई। इन क्षेत्रों में औसतन 1 से 2 इंच वर्षा दर्ज की गई, जबकि कुछ स्थानों पर इससे भी अधिक पानी बरसा। राज्य के बाकी हिस्सों में मौसम अपेक्षाकृत साफ रहा, लेकिन बादलों की आवाजाही ने लोगों को सतर्क रखा। मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि 10 सितंबर से राज्य में मानसून की गति धीमी पड़ सकती है, और बारिश का दौर कमजोर हो सकता है। अगले चार दिनों तक किसी भी जिले में तेज बारिश का कोई बड़ा अलर्ट जारी नहीं किया गया है, जो राहत की बात है। फिर भी, स्थानीय निवासियों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है, क्योंकि मौसम की अनिश्चितता कभी भी स्थिति बदल सकती है।
डेटा सोर्स: IMD के अनुसार, इस सीजन की बारिश ने कई रिकॉर्ड तोड़े हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले 20 वर्षों में क्लाइमेट चेंज का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। राजस्थान जैसे शुष्क प्रदेश में अब औसत से अधिक बारिश होना एक नई सामान्य स्थिति बनती जा रही है। मौसम केंद्र जयपुर की रिपोर्ट बताती है कि 1 जून से 8 सितंबर तक कुल 693.1 MM बारिश हो चुकी है, और मानसून अभी विदा होने से दूर है। यह आंकड़ा साल 1917 के रिकॉर्ड 844.2 MM से थोड़ा कम है, लेकिन यह स्पष्ट करता है कि जलवायु परिवर्तन कितनी तेजी से हमारे पर्यावरण को प्रभावित कर रहा है। क्लाइमेट चेंज के कारण न केवल बारिश की मात्रा बढ़ी है, बल्कि इसका वितरण भी असमान हो गया है—कुछ क्षेत्र सूखे रह जाते हैं, जबकि अन्य बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं।
जुलाई में रही सबसे अधिक मेहरबानी, हादसों ने बढ़ाई चिंता
Rajasthan me Barish : इस मानसून सीजन के दौरान जुलाई महीना सबसे अधिक वर्षा वाला रहा। जून में 125.3 MM, जुलाई में 290 MM, अगस्त में 184 MM और 1 से 8 सितंबर तक 94 MM बारिश दर्ज की गई। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि मानसून की शुरुआत से ही राज्य में पानी की बहार आई है, लेकिन इसके साथ ही कई चुनौतियां भी सामने आई हैं। राजस्थान में इस सीजन में अनेक हादसे हुए हैं, जो बारिश की तीव्रता को रेखांकित करते हैं। उदाहरण के लिए, सोमवार को उदयपुर के झाड़ोल क्षेत्र में नेशनल हाईवे-58 ई (उदयपुर-झाड़ोल-ईडर) पर लैंडस्लाइड हो गया। पहाड़ से गिरे बड़े-बड़े पत्थरों ने सड़क को अवरुद्ध कर दिया, जिससे यातायात ठप हो गया और कई वाहन चालकों को घंटों इंतजार करना पड़ा। स्थानीय अधिकारियों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किए, लेकिन ऐसी घटनाएं राज्य की भौगोलिक संरचना की कमजोरियों को उजागर करती हैं।
इसके अलावा, भारी बारिश ने कई अन्य दुर्घटनाओं को जन्म दिया है। गांवों में घरों की छतें ढहना, सड़कों पर पानी भरना और फसलों को नुकसान पहुंचना आम हो गया है। किसानों के लिए यह दोहरी मार है—एक तरफ सूखे से राहत, दूसरी तरफ अतिवृष्टि से नुकसान। विशेषज्ञों का मानना है कि क्लाइमेट चेंज के कारण ऐसे चरम मौसमी घटनाएं बढ़ रही हैं, और राज्य सरकार को इसके लिए दीर्घकालिक योजना बनाने की जरूरत है, जैसे बेहतर ड्रेनेज सिस्टम, मजबूत सड़कें और जागरूकता अभियान।
बांधों की स्थिति: 63 प्रतिशत ओवरफ्लो
Weather Update : बारिश की इस अधिकता का सबसे सकारात्मक पहलू राज्य के बांधों की स्थिति है। राजस्थान में कुल 693 छोटे-बड़े बांध हैं, जिनमें से 437 पूरी तरह भर चुके हैं। इसके अलावा, 164 बांध 25 से 90 प्रतिशत तक भरे हुए हैं। इस स्थिति ने जल संकट से जूझ रहे क्षेत्रों में उम्मीद की किरण जगाई है। उदाहरण के तौर पर, बीसलपुर बांध से 24 जुलाई से लगातार पानी छोड़ा जा रहा है, जो जयपुर और आसपास के इलाकों की पेयजल आपूर्ति को मजबूत कर रहा है। लेकिन यह अधिकता भी अपनी चुनौतियां लेकर आई है—ओवरफ्लो बांधों से बाढ़ का खतरा बढ़ गया है, और नदियों में जल स्तर ऊंचा होने से आसपास के गांवों को अलर्ट पर रखा गया है।

Mosam : जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस साल की बारिश ने राज्य की जल नीति को नए सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया है। पहले जहां सूखे से निपटना मुख्य चुनौती थी, अब अतिवृष्टि से होने वाले नुकसान को रोकना प्राथमिकता बन गई है। बांधों के रखरखाव, पानी के बेहतर वितरण और सिंचाई योजनाओं को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। किसानों को फसल बीमा और राहत पैकेज के माध्यम से सहायता प्रदान की जा रही है, ताकि वे इस मौसम की मार से उबर सकें।

आगे क्या? मानसून की विदाई की संभावना
Rain in Rajasthan : मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, राजस्थान में अगले एक सप्ताह तक मानसून सामान्य रह सकता है, जिसमें कुछ स्थानों पर हल्की बारिश की संभावना है। पश्चिमी हवाओं का प्रभाव बढ़ने से मानसून और कमजोर हो सकता है, और 20 सितंबर के बाद से इसकी विदाई शुरू होने की उम्मीद है। यह समय राज्य के लिए राहत भरा होगा, लेकिन क्लाइमेट चेंज के संदर्भ में भविष्य की तैयारियां जरूरी हैं। IMD की रिपोर्ट्स पर नजर रखते हुए, सरकार और नागरिकों को मिलकर ऐसी घटनाओं से निपटने की रणनीति बनानी होगी।
