
Rain Alert : राजस्थान में पिछले करीब डेढ़ सप्ताह से सुस्त पड़े मानसून ने एक बार फिर अपनी रफ्तार पकड़ ली है, जिससे राज्य के कई हिस्सों में जोरदार बारिश का दौर शुरू हो गया है। गुरुवार को विभिन्न जिलों में भारी वर्षा दर्ज की गई, जिसमें प्रतापगढ़ जिला सबसे आगे रहा। यहां तक कि उदयपुर जैसे शहरों में शाम के समय हुई मूसलाधार बारिश ने सड़कों पर जलभराव की स्थिति पैदा कर दी, और कई वाहन पानी में डूबते नजर आए। मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि कोटा, उदयपुर और भरतपुर संभागों में अगले दो से तीन दिनों तक दोपहर के बाद हल्की से मध्यम स्तर की बारिश जारी रह सकती है। इसके अलावा, सितंबर के अंत तक राज्य में छिटपुट वर्षा का सिलसिला चलता रहेगा, जो किसानों के लिए राहत की खबर है, लेकिन शहरवासियों को सतर्क रहने की जरूरत है।
इस मानसूनी सक्रियता का मुख्य कारण दक्षिण-पश्चिमी मानसून की धारा में आई तेजी है, जो बंगाल की खाड़ी से नमी लेकर राजस्थान की ओर बढ़ रही है। राज्य में पहले ही इस साल औसत से अधिक बारिश हो चुकी है, लेकिन हाल के दिनों में सूखे जैसे हालात बनने लगे थे। अब इस नई लहर से जलाशयों में पानी का स्तर बढ़ने की उम्मीद है, जो सिंचाई और पेयजल के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा। हालांकि, अचानक आई इस बारिश ने कई इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न कर दी है, जिससे यातायात और दैनिक जीवन प्रभावित हुआ है।

प्रतापगढ़ में रिकॉर्ड तोड़ बारिश, अन्य जिलों में भी जोरदार वर्षा
Rajasthan ka Mosam : बीते 24 घंटों में राजस्थान के विभिन्न जिलों में हुई बारिश ने मौसम को पूरी तरह बदल दिया है। सबसे अधिक वर्षा प्रतापगढ़ जिले में दर्ज की गई, जहां औसतन 75 MM पानी बरसा। इस जिले के छोटी सादड़ी क्षेत्र में 6 MM, अरनोद में 4 MM की बारिश हुई, जो स्थानीय किसानों के लिए वरदान साबित हुई है। प्रतापगढ़ की यह बारिश न केवल फसलों को जीवनदान देगी, बल्कि भूजल स्तर को भी मजबूत करेगी।
इसके अलावा, सवाई माधोपुर जिले के वजीरपुर में 10 MM, बामनवास और मलारना डूंगर में 9-9 MM वर्षा दर्ज की गई। टोंक जिले के उनियारा में 11 MM, कोटा के खातोली में 5 MM, करौली शहर में 57 MM, मंडरायल में 29 MM, सपोटरा और श्रीमहावीरजी में 10-10 MM पानी गिरा। झालावाड़ जिले के सुनेल में 14 MM, पिरावा में 13 MM, और अकलेरा में 10 MM बारिश ने इलाके को तर-बतर कर दिया। भरतपुर संभाग में रूदावल में 54 MM, बयाना में 45 MM, पहाड़ी में 14 MM, और कामां में 16 MM वर्षा हुई, जिससे नदियां और तालाब उफान पर आ गए हैं।
चित्तौड़गढ़ जिले की बड़ी सादड़ी में 27 MM, चित्तौड़गढ़ शहर में 21 MM, बारां के शाहबाद में 40 MM, और अलवर के रामगढ़ में 6 MM बारिश दर्ज की गई। इन आंकड़ों से साफ है कि पूर्वी और दक्षिणी राजस्थान में मानसून की मेहरबानी ज्यादा रही है, जबकि पश्चिमी हिस्सों में अभी भी गर्मी का असर बरकरार है। मौसम विभाग के अनुसार, इन जिलों में हुई बारिश से कृषि क्षेत्र को काफी फायदा पहुंचेगा, क्योंकि खरीफ फसलों की बुआई का समय चल रहा है और नमी की कमी से पैदावार प्रभावित हो सकती थी। लेकिन, साथ ही, निचले इलाकों में जलभराव से बाढ़ का खतरा भी बढ़ गया है, जिसके लिए प्रशासन को अलर्ट पर रहना चाहिए।
उदयपुर में मूसलाधार बारिश से जलमग्न सड़कें
Mosam : उदयपुर शहर में गुरुवार शाम को अचानक तेज बारिश ने कहर बरपाया। मात्र कुछ घंटों में हुई मूसलाधार वर्षा से शहर के कई हिस्सों में जलजमाव की स्थिति बन गई। विशेष रूप से उदयपुर-डबोक नेशनल हाईवे पर पेसिफिक कॉलेज के बाहर सर्विस रोड पर पानी इतना भर गया कि कई गाड़ियां आंशिक रूप से डूब गईं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बारिश इतनी तेज थी कि ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह चोक हो गया, और सड़कें नदियों जैसी बहने लगीं।

इस घटना से यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ, और कई वाहन चालकों को अपनी गाड़ियां छोड़कर सुरक्षित जगह पर जाना पड़ा। उदयपुर प्रशासन ने तुरंत राहत कार्य शुरू किए, जिसमें पानी निकासी के लिए पंप लगाए गए और ट्रैफिक को डायवर्ट किया गया। शहर के अन्य इलाकों जैसे फतेह सागर झील के आसपास और मुख्य बाजारों में भी जलभराव देखा गया, जिससे दुकानदारों और राहगीरों को परेशानी हुई। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि उदयपुर की भौगोलिक स्थिति के कारण यहां बारिश का प्रभाव ज्यादा पड़ता है, क्योंकि पहाड़ी इलाका होने से पानी तेजी से नीचे की ओर बहता है। इस बारिश से हालांकि झीलों का जल स्तर बढ़ा है, जो पर्यटन के लिए अच्छी खबर है, लेकिन शहर की बुनियादी ढांचे की कमजोरियां भी उजागर हुई हैं।
पश्चिमी राजस्थान में बढ़ती गर्मी
Weather Update ; जबकि पूर्वी राजस्थान में बारिश का दौर चल रहा है, पश्चिमी हिस्सों में मानसून के विदा होने के बाद तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है। गुरुवार को श्रीगंगानगर में दिन का अधिकतम तापमान 38.3 डिग्री सेल्सियस और चूरू में 38.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो सामान्य से काफी ऊपर है। बाड़मेर में भी पारा 37 डिग्री पर रहा, जिससे लोगों को गर्मी और उमस से दो-चार होना पड़ रहा है।

इस गर्मी के कारण दिनभर की दिनचर्या प्रभावित हो रही है, और लोग घरों में रहना पसंद कर रहे हैं। मौसम विभाग का कहना है कि पश्चिमी राजस्थान में अब शुष्क हवाओं का प्रभाव बढ़ रहा है, जो रेगिस्तानी इलाकों में सामान्य है। हालांकि, दौसा जैसे जिलों में गुरुवार को हल्की बारिश हुई और पूरे दिन बादल छाए रहे, जिससे तापमान में कुछ राहत मिली। दौसा में यह बारिश किसानों के लिए खुशी की वजह बनी, क्योंकि यहां की मिट्टी सूख रही थी। कुल मिलाकर, राज्य में मौसम का यह दोहरा चेहरा देखने को मिल रहा है – एक तरफ वर्षा की बहार, दूसरी तरफ गर्मी की तपिश।

25 सितंबर के बाद फिर बारिश की संभावना
Rajasthan me Barish : मौसम केंद्र जयपुर ने अगले दो सप्ताह का विस्तृत पूर्वानुमान जारी किया है, जिसमें 25 सितंबर से 2 अक्टूबर तक राज्य के कई स्थानों पर बारिश होने की प्रबल संभावना जताई गई है। केंद्र के मुताबिक, इस औसत से अधिक वर्षा हो सकती है, जो मानसून की विदाई से पहले एक अंतिम दौर होगा। यह बारिश मुख्य रूप से दक्षिणी और पूर्वी संभागों में केंद्रित रहेगी, लेकिन पश्चिमी इलाकों में भी छिटपुट वर्षा संभव है।
इस पूर्वानुमान से किसान उत्साहित हैं, क्योंकि अतिरिक्त बारिश से रबी फसलों की तैयारी में मदद मिलेगी। हालांकि, शहरों में बाढ़ और जलभराव से बचाव के लिए प्रशासन को पहले से तैयार रहना चाहिए। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून के पैटर्न में अनियमितता बढ़ रही है, जिससे अचानक भारी बारिश की घटनाएं आम हो रही हैं। राजस्थान जैसे सूखे-प्रभावित राज्य के लिए यह एक दोधारी तलवार है – एक तरफ पानी की उपलब्धता, दूसरी तरफ आपदा का खतरा।
