
Rain Alert : राजस्थान, जो अपने रेगिस्तानी परिदृश्य और सूखे की छवि के लिए जाना जाता है, इस वर्ष मानसून सीजन में अभूतपूर्व बारिश का गवाह बना है। मौसम विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 1 जून से 9 सितंबर तक के 100 दिनों में राज्य में 701.6 मिलीमीटर (MM) से अधिक बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य औसत से कहीं अधिक है। यह आंकड़ा न केवल पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड को चुनौती देता है, बल्कि विशेषज्ञों को क्लाइमेट चेंज के बढ़ते प्रभावों पर गंभीरता से विचार करने के लिए प्रेरित कर रहा है। हालांकि, मौसम विशेषज्ञों ने अगले सात दिनों तक बारिश की संभावना से इनकार किया है, जिससे राज्य में शुष्क और धूपभरा मौसम छाने की उम्मीद है। यह स्थिति बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों को गति दे सकती है, साथ ही किसानों को फसल प्रबंधन के लिए समय प्रदान करेगी।
दौसा में सूखी नदी में जीवन की धारा: ग्रामीणों का उत्सव
Rajasthan ka Mosam : राज्य के विभिन्न हिस्सों में इस मानसून ने सकारात्मक और चुनौतीपूर्ण दोनों अनुभव दिए हैं। दौसा जिले में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक घटना सामने आई, जहां बांदीकुई से मात्र दो किलोमीटर दूर बहने वाली सावा नदी में 25 वर्षों के बाद पानी की धारा देखने को मिली। मंगलवार सुबह, जब ग्रामीणों ने नदी में पानी की लहरें देखीं, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। स्थानीय लोगों ने इस अवसर को उत्सव में बदल दिया और डीजे की धुन पर नाच-गाकर जश्न मनाया। यह दृश्य न केवल हृदयस्पर्शी था, बल्कि यह भी दर्शाता है कि प्रकृति की छोटी-सी मेहरबानी सूखाग्रस्त क्षेत्रों में कितनी बड़ी उम्मीद जगा सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि इस पानी से न केवल सिंचाई में मदद मिलेगी, बल्कि क्षेत्र में जल संकट भी कम होगा। कई बुजुर्गों ने इसे चमत्कार बताया, क्योंकि उन्होंने दशकों बाद नदी को इस रूप में देखा।

श्रीगंगानगर में घग्गर नदी की चुनौती: युवक की नाटकीय बचाव कहानी
Weather Update : दूसरी ओर, श्रीगंगानगर जिले के अनूपगढ़ क्षेत्र में बारिश ने खतरे का रूप भी दिखाया। मंगलवार शाम करीब चार बजे, गांव 70 जीबी में घग्गर नदी को पार करने की कोशिश कर रहे तीन युवक तेज धारा में फंस गए। दो युवकों ने अपनी सूझबूझ से खुद को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन तीसरा युवक दलदल में फंस गया। स्थानीय लोगों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया और ट्यूब की मदद से उसे सुरक्षित बाहर निकाला। यह घटना नदियों में बढ़ते जल स्तर के खतरों को रेखांकित करती है। जिला प्रशासन ने अब नदी किनारों पर चेतावनी बोर्ड लगाने और स्थानीय स्तर पर बचाव टीमें तैनात करने का निर्णय लिया है। साथ ही, लोगों से अपील की गई है कि वे नदियों और जलाशयों के पास सावधानी बरतें।

मौसम का आगामी परिदृश्य: सात दिन ड्राई मौसम
Mosam : मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर-पश्चिमी दिशा से आने वाली तेज हवाओं के प्रभाव से अगले सात दिनों तक राजस्थान में मौसम ज्यादातर शुष्क रहेगा। कुछ चुनिंदा स्थानों पर स्थानीय स्तर पर बादल बनने और हल्की बूंदाबांदी की संभावना है, लेकिन अधिकांश जिलों में आसमान साफ रहेगा। दिन के समय धूप के साथ तापमान में धीरे-धीरे वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे गर्मी की वापसी हो सकती है। मौसम केंद्र जयपुर के विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति मानसून की विदाई का संकेत हो सकती है, हालांकि आधिकारिक रूप से सीजन अभी समाप्त नहीं हुआ है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे इस अवधि का उपयोग फसलों की कटाई, सुखाने और भंडारण के लिए करें, क्योंकि शुष्क मौसम इन कार्यों के लिए अनुकूल रहेगा।
पिछले 24 घंटों का मौसम: साफ आसमान, हल्की राहत
Rajasthan me Barish : पिछले 24 घंटों में राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में मौसम साफ और शांत रहा। उत्तर-पश्चिमी जिलों, जैसे हनुमानगढ़ और जैसलमेर, में मंगलवार को दिन में हल्के बादल छाए और कुछ स्थानों पर बूंदाबांदी दर्ज की गई। हालांकि, जयपुर, अजमेर, उदयपुर, कोटा और भरतपुर संभागों में पूरे दिन धूप खिली रही। जोधपुर संभाग के ज्यादातर हिस्सों में भी यही स्थिति रही। शाम को हल्की और सुहावनी हवाओं ने मौसम को और भी सुखद बना दिया। इस दौरान कोई बड़ी मौसमी घटना नहीं हुई, लेकिन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जल निकासी और पुनर्वास कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया गया। स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित गांवों में राहत सामग्री वितरण और सड़क मरम्मत का कार्य तेज कर दिया है।
क्लाइमेट चेंज का प्रभाव: रिकॉर्डतोड़ बारिश
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले दो दशकों में क्लाइमेट चेंज ने राजस्थान के मौसम को पूरी तरह बदल दिया है। एक समय सूखे के लिए कुख्यात यह राज्य अब औसत से अधिक बारिश का गवाह बन रहा है। मौसम केंद्र जयपुर की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मानसून सीजन में 1 जून से 9 सितंबर तक कुल 701.6 MM बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से काफी अधिक है। तुलनात्मक रूप से, वर्ष 1917 में राजस्थान में 844.2 MM बारिश हुई थी, जो अब तक का सर्वाधिक रिकॉर्ड है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर यही रुझान जारी रहा, तो यह रिकॉर्ड भी टूट सकता है। इस बदलाव का श्रेय क्लाइमेट चेंज को दिया जा रहा है, जिसने मौसमी चक्र को प्रभावित किया है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि ऐसी चरम मौसमी घटनाएं—जैसे मूसलाधार बारिश या लंबे सूखे के दौर—आने वाले वर्षों में और बढ़ सकती हैं।
मासिक बारिश का विश्लेषण: जुलाई रहा सबसे पानीदार
इस मानसून सीजन में बारिश का वितरण असमान रहा है। जून में 125.3 MM, जुलाई में 290 MM, अगस्त में 184 MM और 1 से 8 सितंबर तक 94 MM बारिश दर्ज की गई। जुलाई माह सबसे अधिक बारिश वाला रहा, जिसने कई जिलों में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा की। इस दौरान नदियां उफान पर थीं और कई गांव जलमग्न हो गए। हालांकि, इस बारिश ने जलाशयों और बांधों को भरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विशेषज्ञों का कहना है कि क्लाइमेट चेंज के कारण ऐसी तीव्र बारिश की घटनाएं बढ़ रही हैं। इसके लिए राज्य सरकार को जल प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण और जलवायु अनुकूल कृषि प्रथाओं पर ध्यान देना होगा। साथ ही, जन जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को मौसमी खतरों के प्रति शिक्षित करना जरूरी है।
जल संसाधनों की स्थिति: 63% बांध भरे, बीसलपुर से पानी की निकासी
इस बार की भारी बारिश ने राजस्थान के जल संसाधनों को नई जिंदगी दी है। राज्य में मौजूद 693 छोटे-बड़े बांधों में से 63 प्रतिशत से अधिक, यानी 437 बांध पूरी तरह भर चुके हैं। इसके अलावा, 164 बांधों में 25 से 90 प्रतिशत तक पानी भरा है। यह स्थिति सूखाग्रस्त क्षेत्रों में सिंचाई और पेयजल आपूर्ति के लिए वरदान साबित हुई है। विशेष रूप से, बीसलपुर बांध, जो जयपुर और आसपास के जिलों के लिए जीवनरेखा है, 24 जुलाई से लगातार पानी छोड़ रहा है। हालांकि, कई बांधों के ओवरफ्लो होने से निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति बनी, जिससे फसलों को नुकसान हुआ और कई गांव प्रभावित हुए। जल संसाधन विभाग ने अब बांधों की निगरानी बढ़ा दी है और भविष्य में बेहतर प्रबंधन के लिए योजनाएं तैयार कर रहा है।
भविष्य की तैयारी: क्लाइमेट चेंज से निपटने की जरूरत
इस साल का मानसून राजस्थान के लिए मिश्रित अनुभव लेकर आया। जहां एक ओर भारी बारिश ने जल संसाधनों को समृद्ध किया, वहीं बाढ़ और जलमग्नता ने कई चुनौतियां खड़ी कीं। क्लाइमेट चेंज के इस दौर में राज्य को दीर्घकालिक योजनाओं की जरूरत है। बेहतर जल प्रबंधन, वनरोपण, और जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकों को अपनाकर प्रकृति के बदलते मिजाज से निपटा जा सकता है। मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और नियमित मौसम अपडेट्स पर नजर रखने की सलाह दी है। साथ ही, स्थानीय प्रशासन को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुनर्वास कार्यों को तेज करने के लिए कहा गया है।
