
Rain Alert : भारत में इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून अपने निर्धारित समय से चार दिन पहले दस्तक देने वाला है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अनुमान जताया है कि मानसून 27 मई 2025 को केरल के तट पर पहुंचेगा, जो सामान्य तारीख 1 जून से पहले है। यह 16 साल बाद पहला मौका होगा, जब मानसून इतनी जल्दी केरल में प्रवेश करेगा। इससे पहले 2009 में मानसून 23 मई को और 2024 में 30 मई को केरल पहुंचा था। IMD ने यह भी संभावना जताई है कि इस साल जून से सितंबर के बीच सामान्य से अधिक बारिश होगी, जो देश की अर्थव्यवस्था और कृषि के लिए शुभ संकेत है।
शनिवार को दिल्ली के कई इलाकों में सुबह से बारिश और आंधी का दौर शुरू हुआ। IMD ने 20 राज्यों में रविवार को भी आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया है। यह प्री-मानसून गतिविधियां मानसून के आगमन की तैयारियों का संकेत दे रही हैं।
मानसून का समय और उसका सफर
Rain Storm Alert : IMD के अनुसार, मानसून आमतौर पर 1 जून को केरल में प्रवेश करता है और फिर धीरे-धीरे देश के अन्य हिस्सों को कवर करता है। यह प्रक्रिया 8 जुलाई तक पूरे भारत को प्रभावित करती है। मानसून की वापसी राजस्थान के रास्ते 17 सितंबर के आसपास शुरू होती है और 15 अक्टूबर तक पूरी हो जाती है।
यदि मानसून 27 मई को केरल पहुंचता है, तो यह 2009 के बाद सबसे जल्दी आने वाला मानसून होगा। IMD के रिकॉर्ड्स के अनुसार, पिछले 150 वर्षों में मानसून की तारीखें काफी भिन्न रही हैं। सबसे जल्दी 1918 में 11 मई को मानसून केरल पहुंचा था, जबकि सबसे देर से 1972 में 18 जून को यह दस्तक दी थी।
IMD के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने बताया, “मानसून का जल्दी या देर से केरल पहुंचना यह तय नहीं करता कि यह देश के अन्य हिस्सों में भी उसी गति से आगे बढ़ेगा। मानसून की कुल बारिश और इसके वितरण का शुरुआती तारीख से कोई सीधा संबंध नहीं है।”
अंडमान-निकोबार में मानसून की शुरुआत
Rajasthan Ka Mosam : IMD ने 9 मई को अनुमान जताया था कि 13 मई के आसपास मानसून अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तथा बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों में प्रवेश कर सकता है। यह मानसून की प्रारंभिक गतिविधियों का हिस्सा है। हालांकि, भारत में मानसून सीजन की आधिकारिक घोषणा तभी की जाती है, जब यह केरल के तट पर पहुंचता है।
सामान्य से अधिक बारिश की संभावना
Mosam : पृथ्वी और विज्ञान मंत्रालय के सचिव एम. रविचंद्रन ने बताया कि इस साल जून से सितंबर के बीच सामान्य से अधिक बारिश होने की प्रबल संभावना है। सामान्य तौर पर इस अवधि में 87 सेमी बारिश होती है, लेकिन इस बार 105% तक बारिश होने का अनुमान है।
IMD के मानकों के अनुसार:
- 96-104%: सामान्य बारिश
- 90-95%: सामान्य से कम
- 104-110%: सामान्य से अधिक
- 110% से अधिक: बहुत अधिक
- 90% से कम: बहुत कम
इस साल की भविष्यवाणी के अनुसार, बारिश सामान्य से अधिक श्रेणी में होगी, जो खेती, जल संसाधनों, और बिजली उत्पादन के लिए सकारात्मक संकेत है।

पिछले पांच सालों में मानसून का अनुमान
IMD और निजी मौसम एजेंसी Skymet के पिछले पांच सालों के अनुमान काफी हद तक सटीक रहे हैं। आइए नजर डालते हैं:
- 2024: 108% बारिश हुई। IMD ने 106% और Skymet ने 102% का अनुमान लगाया था।
- 2023: 94% बारिश हुई। IMD ने 96% और Skymet ने 94% का अनुमान जताया था।
- 2022: 106% बारिश हुई, जो दोनों एजेंसियों के अनुमान से अधिक थी।
- 2021: 99% बारिश हुई, जो IMD के 98% और Skymet के 97% अनुमान के करीब थी।
- 2020: 109% बारिश हुई, जो IMD के 107% और Skymet के 105% अनुमान से थोड़ी अधिक थी।
ये आंकड़े दर्शाते हैं कि मौसम वैज्ञानिकों की भविष्यवाणियां काफी हद तक विश्वसनीय रही हैं।
मानसून का आर्थिक महत्व
Heavy Rain : भारत की अर्थव्यवस्था में मानसून का विशेष महत्व है, खासकर कृषि क्षेत्र के लिए। देश की 42.3% आबादी कृषि पर निर्भर है, और यह क्षेत्र सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 18.2% का योगदान देता है। देश में सालाना होने वाली कुल बारिश का 70-80% हिस्सा मानसून के दौरान ही बरसता है।
करीब 70-80% किसान अपनी फसलों की सिंचाई के लिए बारिश पर निर्भर हैं। अच्छा मानसून फसल उत्पादन को बढ़ाता है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होती है। यह त्योहारी सीजन से पहले उनकी खर्च करने की क्षमता को बढ़ाता है, जो अर्थव्यवस्था को गति देता है। दूसरी ओर, कमजोर मानसून फसल उत्पादन को प्रभावित करता है, जिससे खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ सकती हैं और महंगाई का दबाव बन सकता है।
इसके अलावा, मानसून जलाशयों को भरने और पनबिजली उत्पादन के लिए भी महत्वपूर्ण है। पीने के पानी की आपूर्ति और औद्योगिक जरूरतों के लिए भी बारिश का योगदान अहम है।
अल नीनो और ला नीना का प्रभाव
IMD ने अप्रैल 2025 में घोषणा की थी कि इस साल मानसून सीजन के दौरान अल नीनो की कोई संभावना नहीं है। अल नीनो एक जलवायु पैटर्न है, जिसमें समुद्र का तापमान 3-4 डिग्री तक बढ़ जाता है, जिससे बारिश का पैटर्न बिगड़ सकता है। 2023 में अल नीनो के प्रभाव के कारण मानसून में 6% कम बारिश हुई थी।
दूसरी ओर, ला नीना समुद्र के पानी को ठंडा करता है, जिससे बादल बनते हैं और अच्छी बारिश होती है। इस साल अल नीनो की अनुपस्थिति और ला नीना की संभावना सामान्य से अधिक बारिश के लिए अनुकूल परिस्थितियां बना रही है।
प्री-मानसून गतिविधियां और मौसम का मिजाज
वर्तमान में देश के कई हिस्सों में प्री-मानसून बारिश और आंधी देखी जा रही है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, और अन्य राज्यों में शनिवार से बारिश का दौर शुरू हुआ है। IMD ने रविवार को भी 20 राज्यों में आंधी और हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान जताया है। ये गतिविधियां मानसून के आगमन की पृष्ठभूमि तैयार कर रही हैं।
इस साल मानसून का जल्दी आगमन और सामान्य से अधिक बारिश की संभावना देश के लिए सकारात्मक खबर है। यह न केवल कृषि क्षेत्र को मजबूती देगा, बल्कि जल संसाधनों और बिजली उत्पादन को भी बढ़ावा देगा। हालांकि, मानसून की प्रगति और बारिश का वितरण क्षेत्रीय स्तर पर भिन्न हो सकता है। किसानों, नीति निर्माताओं, और आम नागरिकों को मौसम विभाग के अपडेट्स पर नजर रखनी चाहिए। IMD और Skymet जैसे संस्थानों की सटीक भविष्यवाणियां मानसून की तैयारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।



