
Rajasthan administrative restructuring पिछले कुछ महीनों में कांग्रेस शासन के दौरान स्थापित 17 में से 9 जिलों और तीन नवीन संभागों को समाप्त करने के बाद राज्य सरकार अब एक और महत्वपूर्ण निर्णय की ओर अग्रसर है। इस बार सरकार की नजर उन उपखंडों, तहसीलों और उप-तहसील कार्यालयों पर पड़ी है, जो निर्धारित मापदंडों पर खरे नहीं उतर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, सरकार की योजना दो या तीन तहसीलों के संयोजन से एक उपखंड कार्यालय स्थापित करने की है, जिसके परिणामस्वरूप प्रदेश में लगभग 100 से अधिक उपखंडों को बंद किया जा सकता है। यह संख्या वर्तमान उपखंडों के लगभग 32% के बराबर है, जो एक बड़े प्रशासनिक पुनर्गठन का संकेत देता है।
कमेटी का गठन और प्रारंभिक प्रगति
Rajasthan admin reform इस व्यापक बदलाव को लागू करने के लिए सरकार ने एक विशेष कमेटी का गठन किया है, जो विभिन्न स्तरों पर फीडबack एकत्रित कर रही है। अब तक इस समिति ने राज्य के आधे से अधिक जिलों से सुझाव और प्रतिक्रिया प्राप्त कर ली है। सूत्रों का कहना है कि यह कदम मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस की नीति पर आधारित है, जिसका उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है। कमेटी को अपनी अंतिम रिपोर्ट छह माह के भीतर प्रस्तुत करनी है, जिसमें राजस्व और प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन के लिए विस्तृत सिफारिशें शामिल होंगी।
समिति के प्रमुख कार्य और दायित्व
Tehsil merge plan कमेटी के समक्ष तीन मुख्य कार्य निर्धारित किए गए हैं, जो इस पुनर्गठन प्रक्रिया की आधारशिला बनेंगे:
- सुझाव संग्रहण और विश्लेषण: समिति संबंधित संभागों और जिलों से सुझाव एकत्र करेगी और राजस्व इकाइयों के पुनर्गठन के लिए ठोस अनुशंसाएं पेश करेगी।
- प्रशासनिक ढांचे का पुनर्निर्धारण: नवीन राजस्व इकाइयों के लिए मार्गदर्शी सिद्धांत तैयार किए जाएंगे, जिसमें पद संरचना, कार्यभार और प्रशासनिक इकाइयों के आकार का आकलन शामिल होगा। साथ ही, पदों की संख्या और उनकी आवश्यकता पर भी विचार किया जाएगा।
- भौगोलिक और सामाजिक संतुलन: प्रदेश की भौगोलिक विविधता और जनता की अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए सुलभ प्रशासन सुनिश्चित करने के लिए जिलेवार सुझाव दिए जाएंगे। इसके लिए कमेटी तहसीलदार, प्रशासनिक अधिकारियों और विभिन्न कर्मचारी संगठनों से भी परामर्श लेगी।
पंचायतीराज संस्थान में संचालित होगी सुनवाई
Rajasthan revenue restructure इस समिति का अस्थाई कार्यालय इंदिरा गांधी पंचायतीराज संस्थान में स्थापित किया गया है। समिति की अध्यक्षता पूर्व आईएएस अधिकारी ललित के. पंवार कर रहे हैं, जिन्होंने पहले संभाग और जिलों को समाप्त करने की सिफारिश भी की थी। समिति में राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव दिनेश कुमार और राजस्व मंडल के निबंधक भी शामिल हैं, जबकि रिटायर्ड आरएएस अधिकारी राजनारायण शर्मा को सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है। समिति का मुख्य लक्ष्य राजस्व इकाइयों का समन्वय करना है, ताकि जनता को उनकी जरूरतों के अनुसार अधिक प्रभावी सेवाएं मिल सकें।
वर्तमान स्थिति और प्रस्तावित बदलाव
Rajasthan district changes राजस्व विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में राजस्थान में 323 उपखंड, 426 तहसील और 232 उपतहसील संचालित हैं। प्रस्तावित योजना के तहत, यदि प्रत्येक उपखंड में औसतन दो या तीन तहसीलें शामिल की जाती हैं, तो उपखंडों की संख्या घटकर लगभग 213 रह सकती है। यह कदम न केवल प्रशासनिक बोझ को कम करेगा, बल्कि तहसील और उपतहसील कार्यालयों के संचालन में भी समन्वय लाएगा। साथ ही, एक ही क्षेत्र में एक से अधिक कार्यालयों की अनावश्यकता को समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है।

पटवार सर्कल और डिजिटलीकरण का प्रभाव
Rajasthan digital governance नियमानुसार, हर पंचायत के लिए एक पटवार सर्कल होना चाहिए, लेकिन वर्तमान में पंचायतों की तुलना में पटवार सर्कल की संख्या अपर्याप्त है। सरकार का मानना है कि डिजिटलीकरण के इस युग में कई सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध हो गई हैं, जिससे पटवारियों तक लोगों की निर्भरता कम हुई है। इस संदर्भ में समिति यह सुझाव दे सकती है कि दो छोटी पंचायतों को मिलाकर एक पटवार सर्कल बनाया जाए। इससे पटवार सर्कल की संख्या में कमी आएगी, जिसका असर भू-अभिलेख निरीक्षक (आरआई) कार्यालयों पर भी पड़ेगा।
पिछला पुनर्गठन और भविष्य की रूपरेखा
लगभग छह माह पहले सरकार ने पूर्ववर्ती गहलोत शासन में बनाए गए सीकर, बांसवाड़ा, पाली संभागों और सांचौर, अनूपगढ़, केकड़ी, गंगापुरसिटी, दूदू, शाहपुरा, नीमकाथाना, जोधपुर ग्रामीण, जयपुर ग्रामीण जिलों को समाप्त कर दिया था। अब यह नया कदम उसी दिशा में एक और बड़ा कदम माना जा रहा है। सलाहकार समिति की रिपोर्ट राजस्व विभाग को सौंपी जाएगी, जिसके बाद कैबिनेट में अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यह निर्णय यह तय करेगा कि किन उपखंडों, तहसीलों, उपतहसीलों, आरआई सर्किलों और पटवार सर्कलों को कम किया जा सकता है।
यह प्रशासनिक पुनर्गठन न केवल सरकारी खर्चों में कटौती करेगा, बल्कि सेवा वितरण को अधिक प्रभावी और सुगम बनाने में भी मददगार साबित हो सकता है। हालांकि, इस प्रक्रिया में स्थानीय लोगों की सुविधाओं और रोजगार पर पड़ने वाले प्रभावों पर भी ध्यान देना जरूरी होगा। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि डिजिटलीकरण और केंद्रीकरण के बीच संतुलन बना रहे, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के लोग इससे वंचित न रहें।
