
Rajasthan municipal elections postponed : राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनाव को लेकर एक बार फिर कानूनी पेच फंस गया है। राज्य सरकार ने 113 नगरीय निकायों के चुनाव स्थगित (Postpone) करवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सरकार ने इस संबंध में विशेष अनुमति याचिका यानी Special Leave Petition (SLP) दायर करते हुए अदालत से चुनाव की तय समयसीमा बढ़ाने की मांग की है। सरकार का कहना है कि हाईकोर्ट द्वारा वार्ड परिसीमन (Delimitation) को निरस्त किए जाने के बाद नई प्रक्रिया पूरी किए बिना चुनाव कराना संभव नहीं है। इसलिए पर्याप्त समय दिया जाना आवश्यक है, ताकि चुनाव कानूनी रूप से सही तरीके से कराए जा सकें।
दरअसल राजस्थान हाईकोर्ट ने 309 में से 113 नगरीय निकायों में किए गए वार्ड परिसीमन को वैध नहीं माना था। अदालत ने पाया कि इन निकायों में वार्डों की कुल संख्या तो पहले जैसी ही रखी गई, लेकिन उनकी आंतरिक सीमाओं (Internal Boundaries) में बदलाव कर दिया गया था। हाईकोर्ट ने इसे नियमों के विपरीत मानते हुए सीमा परिवर्तन को रद्द कर दिया। इसके बाद पूरे परिसीमन को नए सिरे से करना अनिवार्य हो गया है। सरकार का कहना है कि यह एक विस्तृत प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसमें सर्वे, मैपिंग, ड्राफ्ट नोटिफिकेशन, आपत्तियां और अंतिम प्रकाशन जैसे कई चरण शामिल होते हैं, इसलिए इसमें पर्याप्त समय लगेगा।
सरकार की दलील — जल्दबाजी में चुनाव संभव नहीं
Urban body election delimitation dispute Rajasthan : एसएलपी में राज्य सरकार ने कहा है कि यदि पुराने परिसीमन के आधार पर चुनाव कराए जाते हैं तो भविष्य में चुनाव की वैधता पर प्रश्नचिह्न लग सकता है। इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित होगी और परिणाम अदालत में चुनौती का विषय बन सकते हैं। सरकार ने यह भी बताया कि नए सिरे से परिसीमन पूरा करने के लिए प्रशासनिक मशीनरी, डेटा वेरिफिकेशन और ग्राउंड लेवल सर्वे की जरूरत पड़ेगी, जो तय समयसीमा में संभव नहीं है।

15 अप्रैल तक चुनाव कराने का आदेश
Rajasthan ward delimitation cancelled High Court : इससे पहले राजस्थान हाईकोर्ट ने 14 नवंबर को करीब 439 याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए प्रदेश में पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव 15 अप्रैल तक कराने के निर्देश दिए थे। साथ ही सरकार को 31 दिसंबर तक परिसीमन प्रक्रिया पूरी करने का आदेश भी दिया गया था। बाद में इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में भी कई याचिकाएं दायर हुईं, जिनकी सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने भी मूल रूप से 15 अप्रैल की समयसीमा को बरकरार रखा था।
अब सुप्रीम कोर्ट से राहत की उम्मीद
Supreme Court SLP Rajasthan civic polls : राज्य सरकार का मानना है कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद हालात बदल गए हैं और बिना संशोधित परिसीमन के चुनाव कराना व्यावहारिक नहीं है। इसलिए सरकार सुप्रीम कोर्ट से समय बढ़ाने (Extension of Time) की अनुमति चाहती है। यदि अदालत सरकार की मांग स्वीकार करती है तो 113 नगरीय निकायों के चुनाव आगे खिसक सकते हैं। वहीं यदि राहत नहीं मिली तो प्रशासन को कम समय में नई प्रक्रिया पूरी कर चुनाव कराने की बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा। Rajasthan civic election legal battle news
