
Rajasthan Panchayat Election 2026 : राजस्थान में आगामी पंचायती राज चुनाव से पहले हजारों पूर्व पंच, सरपंच और पंचायत प्रतिनिधियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। पिछले पंचायत चुनाव में अपने चुनावी खर्च का पूरा ब्योरा समय पर जमा नहीं करने वाले प्रत्याशियों को दोबारा चुनाव लड़ने से रोका जा सकता है। राज्य चुनाव आयोग (State Election Commission) ऐसे प्रत्याशियों पर तीन साल तक चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, राज्य चुनाव आयोग जल्द ही सभी जिला कलेक्टरों और जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश जारी कर सकता है, ताकि ऐसे प्रत्याशियों की विस्तृत सूची तैयार की जा सके, जिन्होंने नियमों के बावजूद अपने खर्च का विवरण जमा नहीं किया था।
Rajasthan Election Commission new rules : राज्य चुनाव आयोग के नियम स्पष्ट रूप से कहते हैं कि पंचायत चुनाव लड़ने वाले हर प्रत्याशी को Result घोषित होने के 15 दिन के भीतर अपने चुनावी खर्च का पूरा हिसाब देना अनिवार्य होता है। इसमें प्रचार, वाहन, सभाएं, Digital Campaign, पोस्टर, बैनर, यात्रा और अन्य सभी खर्च शामिल होते हैं। यदि कोई प्रत्याशी यह विवरण समय पर जमा नहीं करता है, तो आयोग के पास उसे तीन वर्ष तक अयोग्य घोषित करने का अधिकार है। अब जबकि मार्च-अप्रैल 2026 में पंचायत चुनाव प्रस्तावित हैं, आयोग पुराने मामलों को खंगालने में जुट गया है।
2020 के पंचायत चुनावों से जुड़े आंकड़े खंगाले जाएंगे
Panchayat election expense limit : साल 2020 में राजस्थान के 21 जिलों में पंचायत समिति और जिला परिषद के चुनाव कराए गए थे। उस दौरान
- 636 जिला परिषद सदस्य
- 4371 पंचायत समिति सदस्य
चुने गए थे।
इन पदों के लिए कुल
- 12,663 प्रत्याशी पंचायत समिति सदस्य पद पर
- 1,778 प्रत्याशी जिला परिषद सदस्य पद पर
चुनाव मैदान में उतरे थे।
राज्य चुनाव आयोग के सूत्रों का कहना है कि इन चुनावों में हजारों प्रत्याशियों ने परिणाम आने के बाद खर्च का विवरण जमा नहीं किया। अब ऐसे सभी मामलों की सूची जिला स्तर पर तैयार करवाई जाएगी।
4 से 5 हजार प्रत्याशी हो सकते हैं अयोग्य
Rajasthan Panchayat Election ban candidates : अनुमान लगाया जा रहा है कि चुनावी खर्च का ब्योरा नहीं देने वाले प्रत्याशियों की संख्या 4 से 5 हजार या उससे भी अधिक हो सकती है। जिला निर्वाचन अधिकारी इन सभी प्रत्याशियों का रिकॉर्ड तैयार कर राज्य चुनाव आयोग को भेजेंगे। अंतिम फैसला आयोग स्तर पर लिया जाएगा कि किन-किन प्रत्याशियों पर प्रतिबंध लगाया जाए।
राज्य चुनाव आयुक्त का बयान
Rajasthan Sarpanch election rules 2026 : राज्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह ने स्पष्ट कहा है कि चुनाव खर्च का ब्योरा नहीं देने पर तीन साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लगाने का प्रावधान नियमों में पहले से मौजूद है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में आयोग जल्द ही औपचारिक आदेश जारी करेगा और सभी जिलों से विवरण मंगाया जाएगा।
खर्च सीमा हाल ही में बढ़ाई गई
राज्य चुनाव आयोग ने 23 दिसंबर 2025 को पंचायती राज चुनावों के लिए खर्च सीमा बढ़ाने की अधिसूचना (Notification) जारी की थी। नए नियमों के अनुसार:
- सरपंच: अधिकतम 1 लाख रुपये
- पंचायत समिति सदस्य: 1.5 लाख रुपये
- जिला परिषद सदस्य: 3 लाख रुपये
पहले यह सीमा क्रमशः 50 हजार, 75 हजार और 1.5 लाख रुपये थी। यानी तीनों ही पदों के लिए खर्च सीमा को लगभग दोगुना कर दिया गया है।
बिल और वाउचर देना भी जरूरी
आयोग के अनुसार, प्रत्याशियों को नामांकन दाखिल करने से लेकर Result घोषित होने तक किए गए हर खर्च का विस्तृत विवरण देना होगा। केवल आंकड़े देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि हर खर्च के साथ संबंधित बिल या वाउचर भी जमा करना अनिवार्य किया गया है।
खर्च सीमा बढ़ाने के पीछे आयोग का तर्क
राज्य चुनाव आयोग का मानना है कि अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी चुनाव प्रचार के तरीके बदल चुके हैं। Digital Campaign, सोशल मीडिया, यात्रा खर्च, सभाएं और प्रचार सामग्री पर पहले की तुलना में ज्यादा खर्च हो रहा है। पुरानी खर्च सीमा वास्तविक खर्च से मेल नहीं खा रही थी।राज्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह ने कहा कि आयोग चुनावी प्रक्रिया में Transparency चाहता है और जनप्रतिनिधियों की लंबे समय से खर्च सीमा बढ़ाने की मांग थी, जिसे ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया।

प्रचार में तांगा, ऊंटगाड़ी और बैलगाड़ी पर भी रोक
इस बार चुनाव प्रचार को लेकर आयोग ने सख्त नियम बनाए हैं। बड़े वाहनों और पशुओं से चलने वाली गाड़ियों के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। प्रत्याशी बस, ट्रक, मिनी बस, मेटाडोर, तांगा, ऊंटगाड़ी या बैलगाड़ी का उपयोग प्रचार के लिए नहीं कर सकेंगे। नियमों का उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: 15 अप्रैल तक चुनाव जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत चुनाव कराने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। यह आदेश पंचायत परिसीमन से जुड़े एक मामले में Special Leave Petition खारिज करते हुए दिया गया। हाईकोर्ट पहले ही परिसीमन प्रक्रिया को वैध ठहरा चुका है।
14 हजार से ज्यादा ग्राम पंचायतों में एक साथ चुनाव
प्रदेश में 14 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों के चुनाव एक साथ कराए जाने हैं। सभी पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। हालांकि, 12 जिलों की पंचायत समितियों और जिला परिषदों का कार्यकाल अभी पूरा नहीं हुआ है। यदि सरकार One State One Election मॉडल अपनाती है, तो इन जिलों में बोर्ड भंग करने पड़ सकते हैं।
सरपंच संघ की आपत्ति
राजस्थान सरपंच संघ के कार्यकारी अध्यक्ष नेमीचंद का कहना है कि पिछले चुनाव में उनसे खर्च का ब्योरा मांगा ही नहीं गया था। उन्होंने दावा किया कि यदि मांगा जाता, तो वे जरूर जमा करते। उन्होंने कहा कि उन्होंने चल-अचल संपत्ति का विवरण पहले ही दिया था। वहीं, निवर्तमान सरपंच एवं वर्तमान प्रशासक राजेश कुमार ने कहा कि वे चुनाव आयोग के सभी निर्देशों का पालन करेंगे और खर्च का ब्योरा मांगे जाने पर उपलब्ध कराएंगे। उन्होंने कहा कि वे खुद चाहते हैं कि चुनावी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो।
