
Rajasthan SI Bharti 2021 cancelled : राजस्थान हाई कोर्ट ने गुरुवार को एक ऐतिहासिक फैसले में वर्ष 2021 की सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा को रद्द कर दिया। यह भर्ती 859 पदों के लिए आयोजित की गई थी, लेकिन पेपर लीक के गंभीर आरोपों ने इसकी विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया। जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने फैसला सुनाते हुए तल्ख टिप्पणी की, “इस भर्ती के पेपर का पूरे प्रदेश में प्रसार हुआ था। घर के भेदी ने ही लंका ढहा दी।” कोर्ट ने पेपर लीक में राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के पांच सदस्यों की संलिप्तता को गंभीरता से लिया और इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका के रूप में मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजने का निर्देश दिया। इस फैसले ने न केवल भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदमों की आवश्यकता को भी रेखांकित किया।
पेपर लीक के तीन प्रमुख आधार
RPSC SI paper leak scam 2021 हाई कोर्ट ने इस भर्ती को रद्द करने के लिए तीन मुख्य आधारों को स्वीकार किया:
- RPSC सदस्यों की संलिप्तता: जांच में सामने आया कि RPSC के दो पूर्व सदस्यों, रामूराम रायका और बाबूलाल कटारा, ने पेपर लीक में अहम भूमिका निभाई। रामूराम रायका ने अपने बेटे देवेश और बेटी शोभा को परीक्षा से पहले ही प्रश्न पत्र उपलब्ध कराए, जिसके कारण दोनों ने क्रमशः 5वीं और 40वीं रैंक हासिल की।
- डमी अभ्यर्थियों का उपयोग: भर्ती प्रक्रिया में बड़ी संख्या में डमी अभ्यर्थियों को शामिल किया गया, जो नकल और धोखाधड़ी का हिस्सा थे। यह भर्ती की निष्पक्षता को पूरी तरह से नष्ट करता है।
- पेपर लीक का व्यापक प्रसार: जगदीश बिश्नोई और तुलछाराम गैंग जैसे संगठित गिरोहों ने पूरे प्रदेश में पेपर को सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से लीक किया। विशेष रूप से ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए नकल की घटनाएं सामने आईं।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन परिस्थितियों में भर्ती को जारी रखना असंभव है, क्योंकि यह न केवल प्रक्रिया की विश्वसनीयता को ठेस पहुंचाता है, बल्कि प्रदेश के कानून-व्यवस्था (law and order) पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकता है।

कोर्ट की सख्त टिप्पणियां और RPSC की कार्यप्रणाली पर सवाल
Rajasthan Police SI vacancy cancelled 2025 जस्टिस समीर जैन ने सुनवाई के दौरान RPSC की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “RPSC एक संवैधानिक संस्था है या गूंगी-बहरी संस्था? जब इसके दो सदस्यों के नाम पेपर लीक में सामने आए, तब आयोग ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की?” कोर्ट ने तत्कालीन RPSC अध्यक्ष की भूमिका की जांच की मांग की और आयोग के सदस्यों के चयन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने RPSC को आड़े हाथों लेते हुए कहा, “आयोग में कुछ भी हो सकता है। यह एक ऐसी संस्था बन गई है, जहां पारदर्शिता और जवाबदेही का अभाव है।”
साथ ही, कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि इस मामले में स्वत: संज्ञान लिया जाए और इसे जनहित याचिका (PIL) के रूप में मुख्य न्यायाधीश के समक्ष पेश किया जाए, ताकि RPSC की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए जा सकें। यह कदम भविष्य में भर्ती प्रक्रियाओं को और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हो सकता है।
ईमानदार अभ्यर्थियों के प्रति सहानुभूति, लेकिन रद्द करना जरूरी
RPSC corruption paper leak case कोर्ट ने अपने फैसले में स्वीकार किया कि कई अभ्यर्थियों ने ईमानदारी से परीक्षा दी थी, और उनके प्रति सहानुभूति है। लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि सही और गलत अभ्यर्थियों की छंटनी करना असंभव है। जस्टिस जैन ने कहा, “अगर पेपर लीक के जरिए एक भी व्यक्ति सब-इंस्पेक्टर बनता है, तो यह कानून-व्यवस्था के लिए खतरा होगा।” इसलिए, पूरे भर्ती प्रक्रिया को रद्द करना अनिवार्य हो गया।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि 2021 की भर्ती के 859 पदों को 2025 की नई भर्ती में जोड़ा जाए। इसके साथ ही, 2021 की भर्ती में शामिल सभी अभ्यर्थियों को नई भर्ती में फिर से आवेदन करने का अवसर दिया जाए, ताकि ईमानदार अभ्यर्थियों को नुकसान न हो। RPSC ने पहले ही 1015 पदों के लिए नई भर्ती की अधिसूचना जारी कर दी है, जिसके लिए आवेदन 10 अगस्त से शुरू हो चुके हैं और अंतिम तिथि 8 सितंबर 2025 है। प्रस्तावित परीक्षा तिथि 5 अप्रैल 2026 है।
पेपर लीक कांड: जांच और गिरफ्तारियां
SI recruitment cancellation news Rajasthan स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) की जांच में इस पेपर लीक कांड में गहरे और संगठित षड्यंत्र का खुलासा हुआ। SOG ने 50 से अधिक ट्रेनी सब-इंस्पेक्टरों सहित 150 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें RPSC के पूर्व सदस्य रामूराम रायका, उनके बेटे देवेश, और बेटी शोभा शामिल हैं। इसके अलावा, बाबूलाल कटारा, मंजू शर्मा, और अन्य RPSC सदस्यों की संलिप्तता भी सामने आई। SOG ने पाया कि रामूराम रायका ने बाबूलाल कटारा से पेपर हासिल किया और इसे परीक्षा से सात दिन पहले अपने बच्चों को दे दिया।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि पेपर लीक का नेटवर्क पूरे प्रदेश में फैला था, जिसमें कोचिंग सेंटर, परीक्षा केंद्र, और ब्लूटूथ गैंग जैसे संगठित गिरोह शामिल थे। SOG ने अपनी पांचवीं चार्जशीट में 20 लोगों को नामजद किया, जिसमें रायका और कटारा के अलावा भूपेंद्र सरन के भाई गोपाल भी शामिल हैं। इस कांड ने न केवल भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता को ठेस पहुंचाई, बल्कि RPSC की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए।

सरकार और मंत्रियों की प्रतिक्रिया
राजस्थान सरकार ने शुरू में इस भर्ती को रद्द करने का विरोध किया था। सरकार का तर्क था कि केवल 68 अभ्यर्थियों की संलिप्तता सामने आई है, और सही-गलत की छंटनी संभव है। हालांकि, कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए पूरी भर्ती को दूषित माना। कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा, “यह सच की जीत है। इस भर्ती में 50% से ज्यादा अभ्यर्थी फर्जीवाड़े के जरिए चुने गए थे। अगर ऐसे लोग पुलिस सेवा में शामिल होते, तो प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति भयावह हो सकती थी।”
मीणा ने यह भी खुलासा किया कि उनके पास उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर 500 से अधिक अभ्यर्थियों ने धोखाधड़ी के जरिए परीक्षा पास की थी, जबकि सरकार ने केवल 58 फर्जी अभ्यर्थियों की पहचान की थी। उन्होंने कहा, “इस फैसले में देरी जरूर हुई, लेकिन यह बहुत जरूरी था।”

याचिकाकर्ताओं की जीत: वकील हरेंद्र नील की टिप्पणी
याचिकाकर्ताओं के वकील हरेंद्र नील ने कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा, “इस भर्ती में बड़े पैमाने पर नकल और धोखाधड़ी हुई थी। RPSC के सदस्यों तक ने इस कांड में हिस्सा लिया। कोर्ट ने ठीक कहा कि ‘घर का भेदी ही लंका ढहाता है।’ बाबूलाल कटारा ने तो पूरी व्यवस्था को तहस-नहस कर दिया।” नील ने बताया कि कोर्ट ने RPSC के पांच सदस्यों—रामूराम रायका, बाबूलाल कटारा, मंजू शर्मा, और अन्य—की संलिप्तता को गंभीर माना। कोर्ट ने इनके खिलाफ रिकवरी के आदेश भी दिए हैं और RPSC की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए जनहित याचिका शुरू करने का निर्देश दिया।
अभ्यर्थियों और परिवारों का विरोध
इस भर्ती में चयनित कुछ अभ्यर्थियों और उनके परिवारों ने रद्द करने के फैसले का विरोध किया था। उन्होंने तर्क दिया कि ईमानदार अभ्यर्थियों को RPSC और पेपर लीक माफिया की गलतियों की सजा नहीं मिलनी चाहिए। शहीद स्मारक पर प्रदर्शन करते हुए परिवारों ने कहा, “हमने मेहनत से परीक्षा पास की थी। कई अभ्यर्थियों ने इसके लिए अन्य सरकारी नौकरियां छोड़ दी थीं। पूरी भर्ती रद्द करना हमारे साथ अन्याय है।” हालांकि, कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि भर्ती की पूरी प्रक्रिया दूषित हो चुकी है, और इसे बचाना असंभव है।
