
Rajasthan Weather Update : राजस्थान का मौसम एकाएक करवट ले चुका है। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में विकसित हुए दो शक्तिशाली चक्रवाती सिस्टम्स – जिनमें बंगाल की खाड़ी का डिप्रेशन अब साइक्लोन मंथा के रूप में तेज हो चुका है – ने पूरे राज्य को भारी बारिश की चपेट में ला दिया है। मंगलवार सुबह से ही उदयपुर, चित्तौड़गढ़, जयपुर, कोटा, भीलवाड़ा और अन्य जिलों में रुक-रुककर बरसात का सिलसिला जारी है, जिससे सड़कें जलमग्न हो गई हैं, बांधों के गेट खोले गए हैं और तापमान में 8 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने 23 जिलों में येलो अलर्ट जारी किया है, जिसमें मध्यम से भारी वर्षा की चेतावनी दी गई है। यह बरसात 30 अक्टूबर तक जारी रहने की संभावना है, उसके बाद मौसम के साफ होने का अनुमान है।
इस असमय की बरसात ने जहां एक ओर सर्दी की दस्तक दे दी है, वहीं किसानों के लिए चिंता का सबब बन गई है। कटी हुई फसलें भीगने से लाखों का नुकसान हो रहा है। आइए, इस लाइव अपडेट में हम विस्तार से जानते हैं कि चक्रवात का असर कैसे पड़ रहा है, कहां कितनी बारिश हुई, और आने वाले दिनों में क्या उम्मीद की जा सकती है।

चक्रवात मंथा: राजस्थान पर दोहरी मार
Rain Alert Today : मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में बने डिप्रेशन ने तेजी से ताकत हासिल कर साइक्लोन मंथा का रूप धारण कर लिया है। यह सिस्टम आंध्र प्रदेश के काकीनाडा तट की ओर बढ़ रहा है, लेकिन इसका असर राजस्थान के दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों पर स्पष्ट दिख रहा है। इसी तरह, अरब सागर में विकसित लो प्रेशर एरिया और उत्तर-पश्चिम भारत पर सक्रिय वेस्टर्न डिस्टर्बेंस ने मिलकर यह बरसात का तांडव रचा है।
जयपुर मौसम केंद्र के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि इन सिस्टम्स का संयुक्त प्रभाव 28 अक्टूबर को चरम पर होगा, जब उदयपुर, कोटा, अजमेर, जोधपुर, जयपुर और भारतपुर संभागों में मध्यम से भारी वर्षा होने की संभावना है। ऑरेंज अलर्ट छह जिलों – उदयपुर, प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, बूंदी और बारां – में जारी किया गया है, जबकि शेष 17 जिलों में येलो अलर्ट है। वज्रपात और तेज हवाओं की भी चेतावनी दी गई है।
यह चक्रवात न केवल वर्षा ला रहा है, बल्कि सर्द हवाओं को भी आमंत्रित कर रहा है। बीते 24 घंटों में बादलों की चादर और लगातार ड्रिजल ने राज्य भर में ठंडक की लहर पैदा कर दी है, जो नवंबर जैसी लग रही है।
बांधों के गेट खुले, सड़कें डूबीं
Rajasthan ka Mosam : सोमवार शाम से शुरू हुआ बरसात का दौर रातभर चला और मंगलवार सुबह भी जारी रहा। उदयपुर, चित्तौड़गढ़ और जयपुर जैसे प्रमुख शहरों में सड़कें जलमग्न हो गईं, बाजारों में पानी भर गया और जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। विशेष रूप से उदयपुर के रुंडेडा गांव में तेज बारिश से सड़कें लबालब हो गईं, कई रास्ते बंद हो गए। चित्तौड़गढ़ के बड़ी सादड़ी में सोमवार सुबह 4 बजे से शुरू हुई बरसात मंगलवार सुबह 8 बजे तक चली, जिससे बाजारों में जलभराव हो गया।
लगातार वर्षा से बांधों में जलस्तर तेजी से बढ़ा है। उदयपुर के उदयसागर बांध के गेटों को सोमवार को 6-6 इंच से बढ़ाकर मंगलवार को 3-3 फीट तक खोल दिया गया है, ताकि अतिरिक्त पानी की सुरक्षित निकासी हो सके। इसी तरह, चित्तौड़गढ़ के घोसुंडा बांध के दो गेट 0.50 मीटर और 0.30 मीटर खोले गए हैं। कोटा बैराज के गेट भी खुले हुए हैं, जहां से पानी छोड़ा जा रहा है। यह स्थिति बाढ़ जैसी हो सकती है, इसलिए प्रशासन ने सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए हैं।
भीलवाड़ा में सुबह से रुक-रुककर बरसात जारी है, जिससे आम जनजीवन ठप नजर आया। दौसा के बांदीकुई में रातभर चली ड्रिजल ने सड़कों को गीला कर दिया। जयपुर में सर्द हवा के साथ हल्की फुहारें गुलाबी नगरी को ठंडी चादर ओढ़ा रही हैं, यहां पर्यटन स्थलों पर चहल-पहल कम हो गई है।
माउंट आबू (सिरोही) में कोहरा छा गया है, नक्की झील का बड़ा हिस्सा धुंध में लिपटा हुआ है। तापमान इतना गिर गया कि पर्यटक कंबल लपेटे घूमते नजर आए।

तापमान में भारी गिरावट
Rajasthan me Barish इस बेमौसम बरसात ने न केवल वर्षा का रिकॉर्ड तोड़ा, बल्कि तापमान को भी लुढ़का दिया। 26 अक्टूबर की तुलना में कई शहरों में दिन का अधिकतम तापमान 6 से 8 डिग्री सेल्सियस तक नीचे आ गया। कोटा में यह 9 डिग्री गिरकर 21.9 डिग्री पर पहुंच गया, जहां दिन-रात का अंतर महज 0.3 डिग्री रहा – दोपहर की गर्मी और रात की सर्दी एक जैसी। उदयपुर, चित्तौड़गढ़, अलवर, भीलवाड़ा, अजमेर, करौली और दौसा में भी इसी तरह की गिरावट दर्ज की गई।
चित्तौड़गढ़ में न्यूनतम तापमान में 4 डिग्री की कमी आई, जबकि जयपुर में सर्द हवाओं ने ठिठुरन बढ़ा दी। माउंट आबू में तो कोहरा और ठंड ने पहाड़ी इलाके को शीतलता प्रदान कर दी। यह बदलाव नवंबर की याद दिला रहा है, लेकिन अक्टूबर के अंत में ऐसी सर्दी असामान्य है।

कटी फसलें बर्बाद, लाखों का नुकसान
यह बरसात किसानों के लिए अभिशाप सिद्ध हो रही है। उदयपुर, प्रतापगढ़, कोटा, बारां और बूंदी जैसे जिलों में 1 से 3 इंच तक की वर्षा से कटी हुई धान, बाजरा और अन्य फसलें भीग गई हैं। इससे सड़न और बर्बादी का खतरा मंडरा रहा है। बूंदी के नैनवा में सबसे ज्यादा 93 एमएम (लगभग 4 इंच) बारिश दर्ज हुई, जहां फसलें पूरी तरह जलमग्न हो गईं। उदयपुर के खेरवाड़ा में खेतों में खड़ी फसलें नष्ट हो गईं।
किसान संगठनों ने सरकार से मुआवजे की मांग की है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह नुकसान लाखों रुपये का हो सकता है, खासकर दक्षिणी राजस्थान में जहां कटाई का मौसम चल रहा था। दूसरी ओर, बांधों में जलभराव से सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ेगी, जो सकारात्मक पहलू है।
कल (27 अक्टूबर) कहां कितनी बरसात हुई? – विस्तृत आंकड़े
सोमवार को राज्य भर में बरसात का दौर जोरदार रहा। नीचे प्रमुख स्थानों पर दर्ज वर्षा के आंकड़े दिए गए हैं (एमएम में):
- बूंदी: नैनवा – 93, बूंदी शहर – 63, रायथल – 39, हिंडौली – 24, इंद्रगढ़ – 29, केशवरायपाटन – 25, तालेड़ा – 24।
- उदयपुर: मावली – 12, कुराबड़ – 19, लसाड़िया – 35, सराडा – 30, झालरा – 39, सलूंबर – 16।
- बारां: अंता – 33, किशनगंज – 24, शाहबाद – 24, मांगरोल – 31, छीपाबड़ौद – 61, छबड़ा – 40।
- प्रतापगढ़: धरियावद – 44, प्रतापगढ़ शहर – 70, दलोत – 28, छोटी सादड़ी – 26।
- टोंक: उनियारा, देवली और नगर फोर्ट – 9-9, अलीगढ़ – 7।
- डूंगरपुर: 57।
- चित्तौड़गढ़: बस्सी – 17, गंगरार – 25 (सबसे ज्यादा 114 एमएम), कपासन – 27, भीलवाड़ा – 26, राशमी – 16।
- राजसमंद: देलवाड़ा – 21, राजसमंद शहर – 10, सरदारगढ़ – 11, नाथद्वारा और रेलमगरा – 9-9।
- भीलवाड़ा: सहाड़ा – 13, आसींद – 10, भीलवाड़ा शहर – 17, जहाजपुर – 11।
- अन्य: जयपुर, अजमेर, सवाई माधोपुर, दौसा, बांसवाड़ा, झालावाड़ में हल्की से मध्यम वर्षा। कोटा के खाटोली में 69 एमएम।
उदयपुर में अक्टूबर के अंत में 9 एमएम से अधिक वर्षा रिकॉर्ड हुई, जो 100 वर्षों में सबसे ज्यादा है।



