
Rajsamand ganja farming news : देलवाड़ा इलाके में पुलिस ने गांजे की बड़े पैमाने पर हो रही खेती का खुलासा किया है। यह कार्रवाई राजसमंद जिले के देलवाड़ा-कैलाशपुरी रोड क्षेत्र में की गई, जहां एक नामी 5-स्टार होटल के पीछे स्थित निजी जमीन पर करीब 10 करोड़ रुपए कीमत के गांजे के पौधे उगाए गए थे।
मामले का खुलासा तब हुआ, जब उदयपुर एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) चौकी और जोधपुर की नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए मौके पर दबिश दी। टीम के पहुंचने पर वहां गांजे की पूरी फसल खड़ी मिली, जिसे बेहद चालाकी से गेहूं की फसल के बीच छिपाकर उगाया गया था। एएनटीएफ के आईजी विकास कुमार ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि देलवाड़ा-कैलाशपुरी रोड पर एक पहाड़ी क्षेत्र में स्थित निजी 6 बीघा जमीन पर अवैध रूप से गांजे की खेती की जा रही है। सूचना के आधार पर जब टीम ने मौके पर छापा मारा, तो वहां से करीब 5860 गांजे के पौधे बरामद हुए। बाद में इन सभी पौधों को नष्ट कर दिया गया। अधिकारियों के अनुसार, यदि यह फसल बाजार तक पहुंच जाती, तो इसकी कीमत 10 करोड़ रुपए से भी अधिक हो सकती थी।

खेत मालिक ही बना हुआ था तस्कर
Udaipur Delwara ganja crop : इस मामले में पुलिस ने 65 वर्षीय नत्थूलाल गमेती को गिरफ्तार किया है, जो राजसमंद जिले के खमनोर थाना क्षेत्र के रायानाल गांव का निवासी बताया गया है। जांच में सामने आया कि वही इस खेत का मालिक है। पुलिस जब मौके पर पहुंची, तब वह गांजे के छोटे-छोटे पैकेट तैयार कर ग्राहकों का इंतजार कर रहा था। प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला है कि इस जमीन के कुल 19 खातेदार हैं। पुलिस अब बाकी खातेदारों की तलाश में जुटी हुई है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस अवैध खेती में और कौन-कौन लोग शामिल थे।
तस्करों ने अपनाया बेहद शातिर तरीका
Rajasthan narcotics raid : इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि तस्करों ने गांजे की खेती छिपाने के लिए बेहद सुनियोजित और चालाक तरीका अपनाया था। जिस खेत में यह खेती की जा रही थी, वह पहाड़ी पर ऊंचाई वाले स्थान पर स्थित था, जिसके कारण नीचे सड़क से यह आसानी से दिखाई नहीं देता था। इतना ही नहीं, गांजे के पौधों को गेहूं की फसल के बीच इस तरह उगाया गया था कि किसी को शक तक नहीं हुआ। जब तक गेहूं की फसल खड़ी रही, तब तक यह अवैध खेती पूरी तरह छिपी रही। हाल ही में गेहूं की कटाई होने के बाद हरे-भरे गांजे के पौधे दिखाई दिए, जिसके बाद पूरे मामले का भंडाफोड़ हुआ। बताया जा रहा है कि खेत की लोकेशन भी ऐसी चुनी गई थी, जहां ड्रोन की नजर आसानी से न पहुंच सके।
ऑपरेशन को दिया गया ‘गांजाजुली’ नाम
Rajsamand drug smuggling news : इस पूरी कार्रवाई का नेतृत्व एएनटीएफ के आईजी विकास कुमार और एनसीबी के जोनल डायरेक्टर घनश्याम सोनी ने किया। अधिकारियों ने इस ऑपरेशन को ‘ऑपरेशन गांजाजुली’ नाम दिया है। इस नाम के पीछे भी एक रोचक कारण बताया गया है। जिस जमीन पर गांजे की खेती की गई थी, उसका आकार बिल्कुल वैसा था जैसा दोनों हथेलियों को जोड़कर बनाई गई अंजलि का होता है। इसी वजह से ‘गांजा’ और ‘अंजलि’ शब्दों को मिलाकर इस अभियान का नाम ‘गांजाजुली’ रखा गया।
6 महीने में सातवीं बड़ी कार्रवाई
illegal cannabis cultivation Rajasthan : एएनटीएफ आईजी विकास Kumar ने बताया कि उदयपुर एएनटीएफ चौकी की टीम लंबे समय से इस क्षेत्र में सक्रिय नशे के नेटवर्क को ध्वस्त करने में जुटी हुई थी। हाल ही में जयपुर में पकड़े गए एक बिचौलिए से पूछताछ के दौरान यह अहम जानकारी सामने आई थी कि वह राजसमंद के देलवाड़ा इलाके से गांजा लेकर आता है। इसी सुराग को आधार बनाकर पुलिस इस बड़े खेत तक पहुंची।
अधिकारियों के अनुसार, उदयपुर और आसपास के पहाड़ी व दुर्गम इलाकों में तस्कर नशे का बड़ा नेटवर्क खड़ा करने की कोशिश कर रहे थे। पिछले 6 महीनों में एएनटीएफ की यह सातवीं बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।



