
Rajsamand pond drowning news : राजसमंद जिले में देवगढ़ थाना क्षेत्र में मंडावर के ढाक का चौड़ा गांव में स्थित तालाब में गिरे पोता पोती को बचाने के लिए दादी आनन फानन में छलांग लगा दी, जिससे दोनों चचेरे भाई बहन के साथ दादी की मौत हो गई। हृदयविदारक हादसे ने पूरे समुदाय को झकझोर दिया। यह हादसा न केवल परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए एक चेतावनी है जो जलाशयों के खतरों को हल्के में लेता है। ग्रामीणों ने शवों को बाहर निकाला, मगर तब तक जीवन की सांसें थम चुकी थीं। यह घटना हमें उन अनगिनत पलों की याद दिलाती है, जब छोटी सी लापरवाही जीवन को हमसे छीन लेती है। इस त्रासदी ने नन्हे बच्चों और उनकी दादी के सपनों को अधूरा छोड़ दिया और गांव में एक सन्नाटा पसार दिया।
Mandawar News : देवगढ़ थाने सहायक उप निरीक्षक किशोरसिंह ने बताया कि मंडावर पंचायत के ढाक का चौड़ा निवासी 60 वर्षीय भंवरीदेवी पत्नी राजूराम भील, उनके 11 वर्षीय पोते हिम्मताराम पुत्र तुलसाराम भील एवं 11 वर्षीय पोती मीना पुत्री लक्ष्मणराम भील बकरियां चराने के लिए सुबह नौ बजे घर से निकले। तालाब किनारे हिम्मताराम व मीना दोनों चचेरे भाई बहन पानी के लिए पानी में उतर गए। गहरे पानी में जाने से डूबता देख पास ही बैठी दादी भंवरीदेवी भील भी तालाब में उतर गई, लेकिन उसे भी तैरना नहीं आता था। इस कारण भंवरीदेवी भील के साथ उनके दोनों पोते पोती की दर्दनाक मौत हो गई। पास में बकरियां चरा रहे अन्य लोग दौड़कर आए और सूचना पर परिजनों के साथ ग्रामवासी पहुंच गए। कुछ तैराक पानी में उतरे और महिला सहित दोनों बच्चों को बाहर निकाला, मगर तब तक तीनों की मौत हो चुकी थी। बाद में पुलिस ने तीनों के शव को देवगढ़ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के मोर्चरी में पहुंचाया, जहां पोस्टमार्टम करवाया गया।
परिजनों का विलाप, मचा कोहराम

Grandmother and two kids drown : ढाक का चौड़ा तालाब के रामदेव सागर तालाब में डूबने से चचेरे भाई बहनों व दादी की मौत के बाद परिजन घटना स्थल पर विलाप करने लगे। मासूम बच्चों व वृद्ध दादी की मौत को लेकर हर कोई सन्न रह गया। हादसे के बाद कई लोग बकरियां चरा रहे थे, मगर तैरना नहीं आता था। अन्य चरवाहे की सूचना पर गांव से तैराक मौके पर पहुंचे और तीनों को बाहर निकाला, मगर तब तक दम तोड़ चुके थे। तालाब से बच्चों व महिला को रेस्क्यू करने में गोपीलाल, जितेंद्र कुमार व मिठूसिंह आदि ग्रामवासियों की अहम भूमिका रही।
अस्पताल में पहुंचे सैकड़ों ग्रामीण
Rajsamand village pond accident हादसे के बाद महिला व बच्चों के शव को देवगढ़ स्थित राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां गांव से सैकड़ों लोग पहुंच गए। बाद में पुलिस ने पोस्टमार्टम करवा तीनों शव परिजनों को सौंप दिए। साथ ही तीनों के शव गांव ले जाकर अंतेष्टी की तैयारी की जा रही है। बताया जा रहा है कि एक ही अर्थी पर तीनों की अंतेष्टी होगी।

आर्थिक तंगी में जी रहा था परिवार
Devgarh News : जानकारी के अनुसार, हिम्मतराम और मीना का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था। उनके माता-पिता मजदूरी करके परिवार का गुजारा करते थे। हिम्मतराम गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ता था, जबकि मीना का अभी स्कूल में दाखिला नहीं हुआ था। परिवार की माली हालत खराब होने के कारण बच्चों की शिक्षा और अन्य जरूरतों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण था। भंवरी देवी परिवार की रीढ़ थीं, जो न केवल घर की जिम्मेदारियां संभालती थीं, बल्कि बकरियां चराकर भी परिवार की मदद करती थीं।



