
RBI inflation forecast 2025 : भारत में मई 2025 के लिए खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation) के आंकड़े आज यानी 12 जून को जारी किए जाएंगे और विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह दर 3% से नीचे रह सकती है। अगर ऐसा होता है, तो यह महंगाई का पिछले 6 वर्षों में सबसे निचला स्तर होगा। लगातार तीसरे महीने रिटेल महंगाई भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के निर्धारित लक्ष्य 4% से नीचे बनी रह सकती है, जो अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जाएगा।
🛒 खाद्य वस्तुओं की कीमतों में गिरावट बनी बड़ी वजह
Retail inflation May 2025 India : इस समय देश के उपभोक्ताओं को सबसे अधिक राहत खाने-पीने की चीजों की कीमतों में आई नरमी से मिल रही है। आवश्यक वस्तुओं जैसे गेहूं, चावल, आटा, सब्जियां, दालें, दूध, चीनी, खाद्य तेल इत्यादि की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं या उनमें गिरावट देखने को मिली है।
खास तौर पर हरी सब्जियों और तेल की कीमतों में भारी कमी आई है, जिससे खाद्य महंगाई में तेज गिरावट दर्ज की गई है। यही कारण है कि मुद्रास्फीति दर (Inflation Rate) में लगातार सुधार हो रहा है।
📊 महंगाई दर में गिरावट: आंकड़ों पर एक नजर
- मार्च 2025: रिटेल महंगाई दर थी 3.34%
- अप्रैल 2025: गिरकर आ गई 3.16% पर
➤ यह 69 महीनों का सबसे निचला स्तर रहा - मई 2025: अनुमानित रेट 2.8% – 2.95% के बीच
यदि यह अनुमान सटीक बैठता है तो जुलाई 2019 के बाद यह पहली बार होगा जब खुदरा महंगाई 3% के नीचे पहुंच जाएगी। जुलाई 2019 में यह आंकड़ा 3.15% दर्ज हुआ था।
🏦 RBI ने भी बदला महंगाई का पूर्वानुमान
India CPI data May 2025 : हाल ही में 4 से 6 जून के बीच हुई RBI की मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee – MPC) की बैठक में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए महंगाई का अनुमान घटाकर 3.7% कर दिया गया है। पहले यह अनुमान 4% था।
साथ ही अप्रैल-जून तिमाही के लिए मुद्रास्फीति का अनुमान 3.6% से घटाकर 2.9% किया गया है। यह दर्शाता है कि रिजर्व बैंक को आने वाले महीनों में महंगाई में और गिरावट की संभावना नजर आ रही है।
📈 महंगाई कैसे घटती या बढ़ती है? – एक सरल विश्लेषण
Food inflation drop India 2025 : महंगाई का सीधा संबंध बाजार में डिमांड और सप्लाई के संतुलन से होता है।
🔺 जब महंगाई बढ़ती है:
- लोगों के पास जब अधिक पैसा होता है, तो वे ज्यादा चीजें खरीदते हैं।
- अधिक मांग होने पर अगर आपूर्ति (Supply) सीमित रहती है, तो चीजों के दाम बढ़ जाते हैं।
🔻 जब महंगाई घटती है:
- मांग कम होती है या आपूर्ति अधिक हो जाती है।
- तब बाजार में वस्तुओं की भरमार होती है, जिससे कीमतें कम होती हैं।
इस आर्थिक प्रक्रिया को डिमांड-सप्लाई मॉडल कहते हैं, और यह दुनिया भर में महंगाई को नियंत्रित करने का मूल सिद्धांत है।
🧮 महंगाई दर कैसे मापी जाती है? CPI क्या है?
CPI inflation below 3% India : भारत में रिटेल महंगाई की गणना कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के आधार पर की जाती है।
CPI क्या करता है?
- CPI एक ऐसा इंडेक्स है जो बताता है कि उपभोक्ता को रोजमर्रा की वस्तुएं और सेवाएं खरीदने में कितना खर्च करना पड़ रहा है।
- यह औसत उपभोक्ता के खर्च का पैमाना है, जिसमें खाद्य पदार्थ, वस्त्र, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, मनोरंजन जैसी सेवाएं शामिल होती हैं।
महंगाई तय करने में योगदान देने वाले मुख्य कारक:
- खाद्य वस्तुएं (Weightage: ~45%)
- आवासीय किराया
- स्वास्थ्य सेवाएं
- ईंधन और बिजली
- शिक्षा और परिवहन
- कच्चा तेल और कमोडिटी की वैश्विक कीमतें

CPI में लगभग 300 वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों का विश्लेषण किया जाता है।
🛢️ अन्य कारण जो महंगाई पर असर डालते हैं:
| कारण | असर |
|---|---|
| कच्चे तेल की कीमतें | परिवहन और उत्पादन लागत को बढ़ाती हैं, जिससे अन्य वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ती हैं। |
| वैश्विक आपूर्ति संकट | यदि अन्य देशों में उत्पादन या सप्लाई में रुकावट आती है, तो भारत में भी असर होता है। |
| मौसम | खराब मानसून या प्राकृतिक आपदाएं फसलों को प्रभावित करती हैं, जिससे खाद्य महंगाई बढ़ती है। |
| सरकारी टैक्स और सब्सिडी | टैक्स बढ़ने से कीमतें ऊपर जाती हैं, सब्सिडी मिलने पर कीमतें घटती हैं। |
🏠 आम आदमी को कैसे मिलेगी राहत?
➡️ Retail inflation trends India : घरेलू बजट पर असर: महंगाई में गिरावट का सबसे बड़ा फायदा आम आदमी को मिलता है। जब खाने-पीने की चीजें सस्ती होती हैं तो परिवार का बजट संतुलित रहता है।
➡️ ब्याज दरों पर असर: यदि महंगाई दर कम रहती है तो RBI पर ब्याज दरें घटाने का दबाव बनता है। इससे होम लोन, पर्सनल लोन, कार लोन जैसे कर्ज सस्ते हो सकते हैं।
➡️ बाजार में स्थिरता: कम महंगाई का सीधा असर निवेशकों की धारणा पर भी पड़ता है। शेयर बाजार में सकारात्मक माहौल बनता है और अर्थव्यवस्था में स्थिरता आती है।
📢 आगे का रास्ता क्या हो सकता है?
Why inflation is falling in India 2025 : यदि CPI दर 3% से नीचे रहती है और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में स्थिरता बनी रहती है, तो आने वाले महीनों में RBI के पास ब्याज दरों को घटाने का अवसर हो सकता है। इससे बैंकिंग और कर्ज लेने वाले क्षेत्रों में सुधार संभव होगा। हालांकि, आने वाले मानसून सीजन की स्थिति और वैश्विक बाज़ार की परिस्थितियां इस पर आगे असर डाल सकती हैं।
भारत की अर्थव्यवस्था के लिए मई 2025 का संभावित रिटेल महंगाई आंकड़ा एक सकारात्मक संकेत है। लगातार तीन महीने से CPI का 4% से नीचे रहना बताता है कि सरकारी नीतियों और आरबीआई की मौद्रिक नीति ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। उपभोक्ताओं को जहां राहत मिल रही है, वहीं नीति-निर्माताओं के लिए भी यह अवसर है कि वे आर्थिक गतिविधियों को और गति देने के लिए मजबूत निर्णय लें। आने वाले कुछ सप्ताह इस दिशा में और स्पष्टता लाएंगे।
