
Repo Rate Cut by RBI : भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 6 जून 2025 को अपनी मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए, जो आम जनता, बैंकों और समग्र अर्थव्यवस्था के लिए राहतकारी साबित होंगे। सबसे बड़ा ऐलान कैश रिज़र्व रेशियो (CRR) में 100 बेसिस प्वाइंट्स की कटौती का है, जिससे बैंकों के पास अब अधिक नकदी उपलब्ध होगी। इसका सीधा असर यह होगा कि बैंक पहले की तुलना में अधिक लोन बांट सकेंगे, जिससे आपकी लोन एप्लीकेशन के रिजेक्ट होने की संभावना काफी कम हो जाएगी। इसके साथ ही, रेपो रेट में भी 50 बेसिस प्वाइंट्स की कटौती की गई है, जिससे अब यह 5.50% हो गया है। यह कटौती होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन जैसे रिटेल लोन्स की ब्याज दरों को और सस्ता करेगी।
बैंकों को मिलेगी अधिक नकदी
RBI Monetary Policy June 2025 : आरबीआई ने कैश रिज़र्व रेशियो (CRR), यानी वह अनुपात जिसके तहत बैंकों को अपनी जमा राशि का एक हिस्सा नकद के रूप में आरबीआई के पास रखना होता है, को 4% से घटाकर 3% करने का फैसला किया है। यह कटौती एक साथ नहीं, बल्कि चार चरणों में लागू होगी, जिसमें प्रत्येक चरण में 25 बेसिस प्वाइंट्स की कमी की जाएगी। ये चरण 6 सितंबर, 4 अक्टूबर, 1 नवंबर और 29 नवंबर 2025 से शुरू होंगे। इस कटौती से बैंकिंग सिस्टम में लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी आएगी, जिससे बैंकों की उधार देने की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
इस अतिरिक्त नकदी का मतलब है कि बैंक अब अधिक लोन दे सकेंगे, जिससे छोटे व्यवसायों, रियल एस्टेट सेक्टर और व्यक्तिगत उधारकर्ताओं को लाभ होगा। इससे पहले जिन लोगों की लोन एप्लीकेशन फंड की कमी या सख्त नियमों के कारण रिजेक्ट हो रही थीं, उन्हें अब लोन मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।
रेपो रेट में कमी
CRR Reduction RBI Announcement : आरबीआई ने रेपो रेट, यानी वह दर जिस पर बैंक आरबीआई से अल्पकालिक उधार लेते हैं, को 6% से घटाकर 5.50% कर दिया है। यह 50 बेसिस प्वाइंट्स की कमी तीसरी लगातार कटौती है, जो फरवरी 2025 से शुरू हुई थी। इस कटौती का सीधा फायदा उन उधारकर्ताओं को होगा, जिनके लोन रेपो रेट से जुड़े हुए हैं, जैसे कि होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन। कम रेपो रेट के कारण बैंकों की उधार देने की लागत कम होगी, जिसका लाभ वे ग्राहकों को कम ब्याज दरों के रूप में दे सकते हैं। इससे ईएमआई (EMI) में कमी आएगी, जिससे मध्यम वर्ग के लिए घर, गाड़ी या अन्य जरूरतों के लिए लोन लेना और चुकाना आसान हो जाएगा।
महंगाई पर नियंत्रण
Loan Approval after RBI Policy : आरबीआई ने महंगाई (Inflation) को लेकर भी सकारात्मक अनुमान जताया है। पहले वित्त वर्ष 2025-26 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर का अनुमान 4% था, जिसे अब संशोधित कर 3.7% कर दिया गया है। तिमाही आधार पर, पहली तिमाही में महंगाई 2.9% (पहले 3.6%), दूसरी तिमाही में 3.4% (पहले 3.9%), तीसरी तिमाही में 3.9% (पहले 3.8%) और चौथी तिमाही में 4.4% रहने का अनुमान है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि अक्टूबर 2024 में महंगाई 6% से ऊपर थी, जो अप्रैल 2025 में घटकर 3.2% तक पहुंच गई। यह दर्शाता है कि महंगाई अब लंबे समय तक 4% के लक्ष्य के आसपास या उससे नीचे रह सकती है, जिससे भविष्य में और रेपो रेट कटौती की संभावना बनी हुई है।
अर्थव्यवस्था को मजबूती
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि जनवरी 2025 से अब तक आरबीआई ने बैंकिंग सिस्टम में लगभग 9.5 लाख करोड़ रुपये की स्थायी नकदी डाली है, जिससे बाजार में लिक्विडिटी (Liquidity) की कोई कमी नहीं है। इसके अलावा, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) इतना मजबूत है कि यह 11 महीनों के आयात को कवर कर सकता है और देश की 96% बाहरी देनदारियों को संभालने में सक्षम है। हालांकि, विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) में कमी आई है और यह इस साल केवल 1.7 बिलियन डॉलर रहा, फिर भी भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति मजबूत बनी हुई है।

रिटेल और माइक्रो-फाइनेंस सेक्टर में सुधार
आरबीआई गवर्नर ने बताया कि रिटेल सेगमेंट में पहले देखा गया तनाव अब काफी हद तक कम हो गया है। खासकर असुरक्षित पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड से जुड़ी वसूली में सुधार हुआ है। हालांकि, माइक्रो-फाइनेंस सेक्टर में अभी भी कुछ चुनौतियां बनी हुई हैं, जहां कर्ज चुकाने में दिक्कतें देखी जा रही हैं। बैंकों और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) ने अब अपने बिजनेस मॉडल को और मजबूत करने पर ध्यान देना शुरू किया है। वे लोन देने के नियमों को कड़ा कर रहे हैं और वसूली प्रक्रिया को तेज कर रहे हैं, ताकि भविष्य में जोखिम कम हो और बैंकिंग सिस्टम स्थिर रहे।
बैंकों और ग्राहकों के लिए खुशी की बात
SBI Loan EMI after Repo Rate Cut : सीआरआर और रेपो रेट में कटौती से बैंकों को दोहरा लाभ होगा। पहला, उनके पास अधिक नकदी उपलब्ध होगी, जिससे वे ज्यादा लोन दे सकेंगे। दूसरा, कम रेपो रेट के कारण उनकी उधार लेने की लागत कम होगी, जिसका फायदा वे ग्राहकों को सस्ते लोन के रूप में दे सकते हैं। इससे रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल और छोटे व्यवसायों जैसे सेक्टर्स में मांग बढ़ने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कटौती न केवल उधारकर्ताओं के लिए राहत लाएगी, बल्कि स्टॉक मार्केट में भी सकारात्मक असर डालेगी, खासकर बैंकिंग, रियल एस्टेट और ऑटो सेक्टर में।
भविष्य की संभावनाएं
आरबीआई की यह नीति अर्थव्यवस्था को गति देने और वैश्विक अनिश्चितताओं, जैसे कि अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ, के प्रभाव को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि मौद्रिक नीति अब ग्रोथ को सपोर्ट करने पर केंद्रित है, लेकिन साथ ही महंगाई पर भी नजर रखी जा रही है। सामान्य मॉनसून की उम्मीद और खाद्य कीमतों में कमी के कारण महंगाई नियंत्रण में रहने की संभावना है, जिससे भविष्य में और रेपो रेट कटौती की गुंजाइश बनी हुई है।
यह आरबीआई का यह कदम न केवल बैंकों और उधारकर्ताओं के लिए, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संदेश है। सस्ते लोन और बढ़ती लिक्विडिटी से न केवल व्यक्तिगत सपने पूरे होंगे, बल्कि भारत की आर्थिक वृद्धि को भी नई गति मिलेगी।
