
RSS 100 years celebration : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपनी स्थापना के सौ वर्ष पूर्ण करने की ओर अग्रसर है। इस शताब्दी यात्रा में संघ ने सेवा, संगठन, और सामाजिक जागरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं, साथ ही विभिन्न चुनौतियों और संघर्षों का डटकर सामना किया है। स्वयंसेवकों के त्याग, समर्पण और निष्ठा की प्रेरक कहानियां इस यात्रा का अभिन्न हिस्सा रही हैं। इस ऐतिहासिक अवसर पर, संघ की शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में विचार-संवाद को गति देने के लिए सुंदर स्मृति व्याख्यानमाला की शुरुआत की जा रही है। इस व्याख्यानमाला का पहला आयोजन आज, रविवार, 31 अगस्त 2025 को अपराह्न में राजसमंद के जिला परिषद सभागार में होगा।
सुंदर स्मृति व्याख्यानमाला के प्रथम चरण में ‘त्वदीयाय कार्याय बद्धा कटियम्’ विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया जाएगा। इस व्याख्यान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के धर्म जागरण विभाग के अखिल भारतीय विधि प्रमुख और वरिष्ठ प्रचारक राम प्रसाद मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहेंगे। वे संघ की सौ वर्ष की यात्रा का विस्तृत विवेचन प्रस्तुत करेंगे, जिसमें स्वयंसेवकों की कर्मठता, समर्पण और समाज के लिए उनके योगदान को रेखांकित किया जाएगा। राम प्रसाद अपने व्याख्यान में उन चुनौतियों का भी उल्लेख करेंगे, जिनका सामना संघ ने अपने इतिहास में किया। स्वतंत्रता संग्राम, आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा, राम मंदिर आंदोलन, स्वदेशी जागरण, गौ-संरक्षण, ग्राम विकास, जनजाति कल्याण, सामाजिक समरसता और महिला सम्मान जैसे क्षेत्रों में संघ की भूमिका को वे विस्तार से बताएंगे। यह व्याख्यान स्वयंसेवकों की उस अटूट निष्ठा को उजागर करेगा, जिसने प्रतिबंधों, विरोधों और हमलों के बावजूद संगठन के कार्य को निरंतर गतिशील रखा।
समर्पण का एक आदर्श उदाहरण
यह वार्षिक व्याख्यानमाला धोईंदा (राजसमंद) निवासी स्वर्गीय सुंदर लाल पालीवाल की स्मृति में आयोजित की जा रही है, जिनका जीवन समाज सेवा और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए समर्पण का प्रतीक है। सुंदर लाल ने अपने छात्र जीवन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ अपनी यात्रा शुरू की थी। वे उदयपुर में बड़गांव मंडल कार्यवाह के रूप में सक्रिय रहे और आपातकाल (1975-77) के दौरान लोकतंत्र पर आए संकट के समय संघर्ष की अग्रिम पंक्ति में खड़े रहे। आपातकाल के दौरान सुंदर लाल ने जेल यात्रा की और उदयपुर से प्रकाशित होने वाले पत्रक “चिंगारी” के माध्यम से लोकतांत्रिक चेतना को जीवित रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। सिंचाई विभाग में कनिष्ठ अभियंता के रूप में चयनित होने के बाद भी उनका सामाजिक कार्य और संघ के प्रति समर्पण अटूट रहा।
महिला सम्मान के लिए जीवन समर्पित
सुंदर लाल का जीवन सामाजिक जागरण और महिला सम्मान के लिए उनके संघर्ष की मिसाल है। 6 अगस्त 1989 को धरियावद (प्रतापगढ़) के पारसोला में एक जनजाति लड़की के अपहरण की घटना ने उन्हें गहरे तक प्रभावित किया। उन्होंने समाज में इस अन्याय के खिलाफ चेतना जगाने का बीड़ा उठाया। इस घटना के विरोध में हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान राजनीतिक द्वेष के चलते पुलिस ने उन पर गोली चलाई। गोली उनकी रीढ़ की हड्डी में लगी, जिसके कारण उनके शरीर का निचला हिस्सा जीवनभर के लिए निष्क्रिय हो गया। इस गंभीर शारीरिक अक्षमता के बावजूद, सुंदर लाल ने हिम्मत नहीं हारी। व्हीलचेयर पर रहते हुए भी वे सामाजिक कार्यों, महिला सम्मान, लोकतंत्र की रक्षा और संघ के संगठनात्मक कार्यों में सक्रिय रहे। उनकी यह अटूट निष्ठा और समर्पण आज भी स्वयंसेवकों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
आयोजन में व्यापक सहभागिता
इस ऐतिहासिक व्याख्यानमाला में राजसमंद के साथ-साथ उदयपुर, प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, बीकानेर और अन्य जिलों से सुंदर लाल के मित्र और सहयोगी शामिल होंगे। वे अपने संस्मरण साझा करेंगे, जो उनके जीवन और कार्यों की प्रेरक गाथाओं को जीवंत करेंगे। इसके अतिरिक्त, राजसमंद जिले के शैक्षणिक, विधिक, साहित्यिक, आध्यात्मिक, और संचार माध्यमों से जुड़े गणमान्य व्यक्ति भी इस आयोजन में सहभागिता करेंगे। सामाजिक कार्यों में सक्रिय लोग भी इस अवसर पर एकत्रित होंगे, जिससे यह कार्यक्रम एक व्यापक विचार-मंथन का मंच बनेगा।
