
Ruma Devi Rajsamand women empowerment : राजसमंद में शुक्रवार को राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) और रूमा देवी फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में एक प्रेरक महिला संवाद कार्यक्रम का आयोजन एक निजी रिसॉर्ट में किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) की राज्य ब्रांड एम्बेसडर और नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित बाड़मेर की रूमा देवी ने जिले की स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाओं के साथ संवाद किया। उन्होंने अपनी संघर्षमय और प्रेरणादायी यात्रा साझा करते हुए महिलाओं को आत्मनिर्भरता, उद्यमशीलता, और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम में जिला कलेक्टर अरुण कुमार हसीजा, अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी और डीपीएम राजीविका डॉ. सुमन अजमेरा, रूमा देवी फाउंडेशन के सचिव विक्रम सिंह, और अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
रूमा देवी ने अपने जीवन की प्रेरक कहानी साझा करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने सीमित संसाधनों और विपरीत परिस्थितियों में अपने सपनों को साकार किया। बाड़मेर के एक छोटे से गांव रावतसर से निकलकर उन्होंने पारंपरिक हस्तशिल्प को न केवल राष्ट्रीय, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहचान दिलाई। उन्होंने उत्पादों की गुणवत्ता, प्रभावी ब्रांडिंग, निरंतर प्रशिक्षण, और आत्मविश्वास को सफलता का मूल मंत्र बताया। रूमा ने कहा, “नारी सर्वशक्तिमान है। जरूरत है तो केवल सही मार्गदर्शन, मेहनत, और आत्मविश्वास की।” संवाद के दौरान रूमा देवी ने SHG की महिलाओं की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना और उनके समाधान के लिए व्यावहारिक सुझाव दिए। उन्होंने महिलाओं को अपने उत्पादों को बाजार में बेहतर तरीके से पेश करने, डिजिटल मार्केटिंग अपनाने, और ग्राहकों की मांग के अनुसार नवाचार करने की सलाह दी।

जिला कलेक्टर ने की बेटियों की शिक्षा पर जोर देने की अपील

Ruma Devi success story Rajasthan : जिला कलेक्टर अरुण कुमार हसीजा ने अपने संबोधन में महिलाओं की प्रगति को समाज के विकास का आधार बताया। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं, और राज्य सरकार भी उनकी प्रगति के लिए हर संभव सहायता प्रदान कर रही है। विशेष रूप से बालिका शिक्षा पर जोर देते हुए उन्होंने उपस्थित लोगों से अपील की कि वे अपनी बेटियों को शिक्षित करें और उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करें।
कलेक्टर ने रूमा देवी की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा, “बाड़मेर के एक छोटे से गांव से निकलकर रूमा देवी ने न केवल 30,000 से अधिक महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा, बल्कि हार्वर्ड यूनिवर्सिटी जैसे वैश्विक मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। उनकी कहानी हम सभी के लिए प्रेरणा है।” उन्होंने राजसमंद की SHG महिलाओं से रूमा देवी से प्रेरणा लेकर अपने लक्ष्यों को हासिल करने का आह्वान किया।
सरिता कंवर: 500 रुपये से 35 लाख के टर्नओवर तक

Rajeevika SHG women Rajasthan 2025 : कार्यक्रम में जिले की राजीविका ब्रांड एम्बेसडर सरिता कंवर ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि उन्होंने मात्र 500 रुपये की छोटी पूंजी से अपनी उद्यमशीलता की शुरुआत की थी और आज उनकी मेहनत और लगन ने उनके व्यवसाय को 35 लाख रुपये के वार्षिक टर्नओवर तक पहुंचा दिया है। सरिता ने कहा कि SHG ने उन्हें न केवल आर्थिक रूप से मजबूत किया, बल्कि सामाजिक रूप से भी आत्मविश्वास दिया। उनकी कहानी ने उपस्थित महिलाओं में जोश और प्रेरणा का संचार किया।

रूमा देवी: महिलाओं के सशक्तिकरण की प्रतीक
Women empowerment program Rajsamand डीपीएम डॉ. सुमन अजमेरा ने रूमा देवी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे संघर्ष और सफलता की जीवंत मिसाल हैं। बाड़मेर के रावतसर गांव की साधारण पृष्ठभूमि से आने वाली रूमा ने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से 30,000 से अधिक महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर प्रदान किए। उनकी अगुवाई में पारंपरिक हस्तशिल्प को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नई पहचान मिली। डॉ. अजमेरा ने बताया कि रूमा को नारी शक्ति पुरस्कार सहित कई प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुए हैं, और उनकी प्रेरणा से राजसमंद की महिलाएं भी अपने सपनों को साकार कर सकती हैं।

SHG: आर्थिक और सामाजिक बदलाव का माध्यम

Self Help Group success stories India कार्यक्रम में शामिल कई SHG महिलाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आए हैं। पहले वे केवल घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित थीं, लेकिन अब वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होकर अपने परिवार और समाज में योगदान दे रही हैं। कुछ महिलाओं ने बताया कि SHG के जरिए मिले छोटे-छोटे लोन और प्रशिक्षण ने उन्हें हस्तशिल्प, सिलाई, और अन्य व्यवसाय शुरू करने में मदद की।
राजीविका की भूमिका
राजीविका (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यह मिशन स्वयं सहायता समूहों के गठन, वित्तीय सहायता, और कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करता है। राजसमंद जिले में राजीविका ने सैकड़ों महिलाओं को उनके उद्यम शुरू करने और बाजार तक पहुंचने में सहायता की है।

कार्यक्रम का संचालन और अन्य योगदान

कार्यक्रम का संचालन जिला प्रबंधक भेरू लाल बुनकर ने कुशलतापूर्वक किया। राजीविका के हर्ष ठाकुर, प्रणब कांति सिन्हा, डीपीएमयू, और बीपीएमयू की टीम ने SHG महिलाओं के प्रयासों की सराहना की और उन्हें समाज में नई पहचान बनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में SHG की महिलाएं और राजीविका से जुड़ी सैकड़ों बहनें शामिल हुईं, जिनमें नई ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार हुआ।




