
Sanwaliya Seth donation record 2025 : राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित विश्व-प्रसिद्ध श्री सांवलिया सेठ मंदिर ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि सांवलिया जी के प्रति भक्तों की आस्था साल-दर-साल नई ऊँचाइयाँ छू रही है। दीपावली के बाद 19 नवंबर को मंदिर का भंडार खोला गया था और आज गुरुवार को छठवें व अंतिम राउंड की गिनती पूरी होने के साथ ही इतिहास रच दिया गया।
मंदिर के इतिहास में पहली बार कुल चढ़ावा 51 करोड़ रुपये के आँकड़े को पार कर गया। अंतिम आँकड़ा रहा — ₹51 करोड़ 27 लाख 30 हजार 112। यह राशि न केवल नकद दान की है, बल्कि इसमें ऑनलाइन ट्रांजैक्शन से आए 10 करोड़ 52 लाख 89 हजार 569 रुपये भी शामिल हैं — जो पिछले सभी वर्षों से कहीं अधिक है।
सोने-चाँदी की बात करें तो भक्तों ने इस बार दिल खोलकर कीमती धातुएँ चढ़ाईं:
- सोना: कुल 1 किलोग्राम 204 ग्राम 4 मिलीग्राम (1.204 किलो से ज्यादा)
- चाँदी: कुल 207 किलोग्राम 793 ग्राम
इनमें भंडार से 985 ग्राम सोना और 86.2 किलो चाँदी, जबकि भेंट कक्ष से 219.400 ग्राम सोना और 121.593 किलो चाँदी प्राप्त हुई।

राउंड-दर-राउंड कैसे टूटा रिकॉर्ड? : Chittorgarh Sanwaliya Seth bhandar counting
- पहला राउंड (19 नवंबर): भंडार खुलते ही पहला झटका — 12 करोड़ 35 लाख रुपये। इतना बड़ा आँकड़ा पहले दिन ही आने से मंदिर प्रशासन और भक्तों में उत्साह की लहर दौड़ गई।
- दूसरा राउंड (21 नवंबर): 20 नवंबर को अमावस्या होने से गिनती रोकी गई। अगले दिन 8 करोड़ 54 लाख रुपये निकले।
- तीसरा राउंड (24 नवंबर): 22-23 नवंबर को भारी भीड़ के कारण गिनती फिर स्थगित रही। 24 को शुरू होते ही 7 करोड़ 8 लाख 80 हजार रुपये।
- चौथा राउंड: इस बार 8 करोड़ 15 लाख 80 हजार रुपये। यहीं से साफ हो गया था कि इस साल का चढ़ावा सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर देगा। मंदिर मंडल सदस्य पवन तिवारी ने कहा, “सांवलिया जी के प्रति भक्तों का विश्वास ही यह चमत्कार है।”
- पाँचवां राउंड (26 नवंबर): 4 करोड़ 19 लाख 79 हजार रुपये जोड़ते ही कुल राशि 40 करोड़ को पार कर 40.33 करोड़ पर पहुँच गई।
- छठा व अंतिम राउंड (27 नवंबर): आखिरी दिन 41 लाख 1 हजार 543 रुपये और मिले। इसके साथ ही कुल आँकड़ा 51.27 करोड़ पर पहुँचकर स्थिर हुआ।
Sanwaliya Seth mandir latest donation news : पूरी गिनती देवस्थान ट्रस्ट, जिला प्रशासन, पुलिस और बैंक अधिकारियों की कड़ी निगरानी में हुई। हर राउंड में दर्जनों कर्मचारी सुबह से शाम तक नोट गिनती मशीनों और हाथ से नोट गिनते रहे। मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ हर दिन उमड़ती रही — कोई दर्शन कर रहा था, तो कोई यह ऐतिहासिक पल अपने मोबाइल में कैद कर रहा था।
सांवलिया जी की लीला और भृगु ऋषि की कथा
Sanwaliya Seth Bhrigu Rishi story : सांवलिया सेठ की मूर्ति पर भृगु ऋषि के चरण-चिह्न आज भी मौजूद हैं। मान्यता है कि जब त्रिदेवों में सबसे श्रेष्ठ कौन है, यह तय करने के लिए भृगु ऋषि वैकुंठ पहुँचे तो भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में थे। ऋषि को लगा कि भगवान उन्हें जानबूझकर अनदेखा कर रहे हैं। क्रोध में आकर उन्होंने भगवान के वक्षस्थल पर लात दे मारी।
भगवान विष्णु तुरंत उठे, ऋषि के पैर पकड़े और विनम्र स्वर में बोले — “मुनिवर, मेरे कठोर वक्ष से आपके कोमल चरणों को चोट तो नहीं लगी?” यह विनम्रता और सहनशीलता देखकर भृगु ऋषि भाव-विभोर हो गए और घोषणा की कि त्रिदेवों में सर्वश्रेष्ठ श्रीहरि विष्णु ही हैं। उसी क्षण भगवान के वक्ष पर ऋषि का चरण-चिह्न अंकित हो गया, जो आज सांवलिया जी की मूर्ति पर स्पष्ट दिखाई देता है। लाखों भक्त इसी चरण-चिह्न के दर्शन को आतुर रहते हैं।

भक्तों की बढ़ती आस्था का जीता-जागता प्रमाण
Sanwaliya Seth highest ever donation : साल दर साल सांवलिया जी का चढ़ावा बढ़ता जा रहा है। कुछ साल पहले जहाँ 20-25 करोड़ का आँकड़ा भी बड़ा माना जाता था, वहीं पिछले साल यह 44 करोड़ के आसपास था। इस बार 51.27 करोड़ का आँकड़ा पार करना साफ दर्शाता है कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु सांवलिया सेठ को अपना सबसे बड़ा सहारा मानते हैं।
ऑनलाइन दान में 10.52 करोड़ का योगदान यह भी बताता है कि नई पीढ़ी भी डिजिटल तरीके से सांवलिया जी से जुड़ रही है। UPI, नेट बैंकिंग, कार्ड और मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट से लाखों भक्त घर बैठे चढ़ावा चढ़ा रहे हैं।
सांवलिया सेठ का यह रिकॉर्ड-ब्रेक भंडार सिर्फ आँकड़ों की बात नहीं, बल्कि एक जीवंत आस्था की गाथा है — जहाँ हर नोट, हर सिक्का, हर ग्राम सोना-चाँदी भक्त के दिल की पुकार बनकर सांवलिया जी के चरणों में समर्पित हो रहा है।
