
satyapal malik : जम्मू-कश्मीर, गोवा, बिहार और मेघालय के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह लंबे समय से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे और अपने बेबाक बयानों के कारण हमेशा चर्चा में रहे। मलिक का इलाज दिल्ली के प्रतिष्ठित राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल में चल रहा था, जहां 5 अगस्त 2025 को दोपहर 1:12 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनकी मृत्यु ने भारतीय राजनीति में एक युग का अंत कर दिया।
सत्यपाल मलिक को 11 मई 2025 को किडनी में गंभीर संक्रमण (infection) के कारण RML अस्पताल में भर्ती किया गया था। डॉक्टरों के अनुसार, उनकी दोनों किडनियां खराब हो चुकी थीं, जिसके चलते उन्हें नियमित डायलिसिस की आवश्यकता पड़ रही थी। नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. हिमांशु महापात्रा और डॉ. ललित की देखरेख में उनका उपचार चल रहा था। कुछ समय के लिए उनकी स्थिति में सुधार होने पर उन्हें ICU से RML के नर्सिंग होम में स्थानांतरित किया गया था, लेकिन बाद में उनकी हालत फिर से बिगड़ने पर उन्हें पुनः ICU में भर्ती करना पड़ा। मलिक के आधिकारिक X हैंडल से समय-समय पर उनकी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में जानकारी साझा की जाती रही। इन पोस्ट्स में उनकी गंभीर हालत और उपचार के बारे में नियमित अपडेट दिए गए, जिसने उनके समर्थकों और शुभचिंतकों को उनकी स्थिति से अवगत रखा।
अंतिम दिनों में सत्यपाल मलिक के बयान
satyapal malik news : अपने अंतिम दिनों में भी सत्यपाल मलिक ने अपनी बेबाकी और साहस का परिचय दिया। कुछ दिन पहले X पर एक भावुक पोस्ट में उन्होंने अपनी स्वास्थ्य स्थिति और अपने विचार साझा किए। उन्होंने लिखा, “मैं पिछले लगभग एक महीने से अस्पताल में भर्ती हूं और किडनी की गंभीर समस्या से जूझ रहा हूं। परसों तक मेरी हालत में सुधार था, लेकिन अब मुझे फिर से ICU में भर्ती करना पड़ा। मेरी स्थिति गंभीर है, लेकिन मैं अपने देशवासियों को सच बताना चाहता हूं।” उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की ईमानदारी का जिक्र करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान उन्हें 150-150 करोड़ रुपये की रिश्वत की पेशकश की गई थी। हालांकि, उन्होंने अपने राजनीतिक गुरु और किसान नेता चौधरी चरण सिंह के सिद्धांतों का पालन करते हुए इन प्रस्तावों को ठुकरा दिया और ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया।
केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप
satyapal malik Death : सत्यपाल मलिक ने अपने अंतिम बयानों में केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि सरकार उन्हें CBI के जरिए झूठे मामलों में फंसाने की कोशिश कर रही थी। उनके X हैंडल से की गई एक पोस्ट में लिखा गया, “सरकार मुझे CBI का डर दिखाकर झूठे चार्जशीट में फंसाने की कोशिश कर रही है। जिस टेंडर को लेकर मुझे फंसाने की बात हो रही है, उसे मैंने खुद रद्द किया था। मैंने स्वयं प्रधानमंत्री को इस टेंडर में भ्रष्टाचार की जानकारी दी थी और मेरे कहने पर ही इसे रद्द किया गया। मेरे तबादले के बाद किसी और के हस्ताक्षर से यह टेंडर फिर से पास हुआ।”
उन्होंने यह भी कहा कि वह किसान समुदाय से आते हैं और न तो डरने वाले हैं और न ही झुकने वाले। मलिक ने सरकार और सरकारी एजेंसियों से अनुरोध किया कि वह देश की जनता को उनके बारे में सच्चाई बताए। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि 50 वर्ष से अधिक के अपने लंबे राजनीतिक करियर में उन्होंने देश की सेवा की, लेकिन आज भी वह एक साधारण एक कमरे के मकान में रहते हैं और कर्ज में हैं। उन्होंने कहा, “अगर मेरे पास धन-दौलत होती, तो मैं किसी निजी अस्पताल (private hospital) में इलाज करवाता।”
सत्यपाल मलिक का राजनीतिक सफर
satyapal malik Biography : सत्यपाल मलिक का राजनीतिक जीवन प्रेरणादायक रहा। वह जम्मू-कश्मीर, गोवा, बिहार और मेघालय के राज्यपाल रहे। विशेष रूप से, जम्मू-कश्मीर में उनके कार्यकाल के दौरान ही धारा 370 को हटाया गया और जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। इस दौरान उन्हें कुछ समय के लिए उपराज्यपाल (Lieutenant Governor) की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। इसके बाद उन्हें गोवा का राज्यपाल नियुक्त किया गया। मलिक ने अपने कार्यकाल में हमेशा जनता के हितों को प्राथमिकता दी और भ्रष्टाचार के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई। उनके बयानों ने कई बार राजनीतिक हलकों में हलचल मचाई, लेकिन उनकी सत्यनिष्ठा और साहस ने उन्हें एक अलग पहचान दी।
जन्म और प्रारंभिक जीवन:
सत्यपाल मलिक का जन्म 24 जुलाई 1946 को उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के हिसावड़ा गांव में हुआ था। वे एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता का नाम बुद्ध देव सिंह और माता का नाम जगबीर देवी था। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा अपने गांव के स्कूल से प्राप्त की। बाद में, वे चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी (मेरठ) से आगे की पढ़ाई करने गए, जहाँ से उन्होंने B.Sc और LLB की डिग्री हासिल की। कॉलेज के दौरान ही उनका रुझान राजनीति की ओर बढ़ा।
परिवार:
सत्यपाल मलिक का विवाह 14 दिसंबर 1970 को इकबाल मलिक से हुआ। उनके पुत्र का नाम देव कबीर है।
🏛️ राजनीतिक करियर की शुरुआत:
- 1966: मेरठ यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ अध्यक्ष बने।
- 1974: उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए बागपत से विधायक चुने गए।
- 1980: उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य बने।
- 1984: कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए।
- 1986: दोबारा राज्यसभा सदस्य बने।
- 1987: बोफोर्स विवाद के बाद कांग्रेस छोड़ दी और जनता दल में वापसी की।
- 1989–1991: जनता दल से लोकसभा सांसद चुने गए।
- 1990: केंद्र में संसदीय कार्य और पर्यटन राज्य मंत्री बने।
- 2004: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुए।
- 2012: भाजपा ने उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया।
🏵️ राज्यपाल के रूप में कार्यकाल:
| राज्य | कार्यकाल | विशेष उल्लेख |
|---|---|---|
| बिहार | सितंबर 2017 – अगस्त 2018 | – |
| ओडिशा | मार्च 2018 – मई 2018 (अतिरिक्त चार्ज) | – |
| जम्मू-कश्मीर | अगस्त 2018 – अक्टूबर 2019 | अनुच्छेद 370 हटाने के दौरान राज्यपाल रहे (5 अगस्त 2019) |
| गोवा | नवंबर 2019 – अगस्त 2020 | – |
| मेघालय | अगस्त 2020 – अक्टूबर 2022 | – |



