
Save Aravalli Campaign : अरावली पर्वतमाला को लेकर हाल ही में तय की गई नई परिभाषा ने राजस्थान में सियासी और सामाजिक हलचल तेज कर दी है। इस फैसले के बाद खासतौर पर युवा वर्ग और पर्यावरण प्रेमियों में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिल रहा है। विरोध के तौर पर सोशल मीडिया पर ‘सेव अरावली’ (Save Aravalli) नाम से एक व्यापक अभियान छेड़ दिया गया है, जो तेजी से ट्रेंड कर रहा है।अरावली पर्वतमाला न केवल राजस्थान बल्कि पूरे उत्तर भारत के लिए एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच मानी जाती है। ऐसे में इसकी परिभाषा में बदलाव को लेकर लोगों को डर है कि इससे भविष्य में पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ सकता है।
सोशल मीडिया पर तेज हुआ विरोध
Aravalli Range New Definition Controversy : नई परिभाषा सामने आने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर विरोध की बाढ़ आ गई है। लोग रील्स, शॉर्ट वीडियो, पोस्टर और जागरूकता संदेश शेयर कर रहे हैं। बड़ी संख्या में यूजर्स अपनी प्रोफाइल फोटो और डिस्प्ले पिक्चर पर ‘Save Aravalli’ लिखी तस्वीरें लगाकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। खासतौर पर युवा इस मुद्दे को लेकर मुखर हैं। ट्विटर (X), इंस्टाग्राम और फेसबुक पर लगातार पोस्ट कर सरकार से फैसले पर पुनर्विचार की मांग की जा रही है। कई यूजर्स इसे राजस्थान के पर्यावरण के लिए “खतरे की घंटी” बता रहे हैं।

क्या कहते हैं अभियान से जुड़े युवा?
Rajasthan Aravalli News Today : ‘सेव अरावली’ अभियान से जुड़े युवाओं का मानना है कि नई परिभाषा लागू होने से अरावली क्षेत्र में खनन, निर्माण और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। इससे न केवल पहाड़ों का अस्तित्व खतरे में पड़ेगा, बल्कि भूजल स्तर, जैव विविधता और स्थानीय जलवायु पर भी गहरा असर पड़ेगा। युवाओं का कहना है कि अरावली पहले ही अवैध खनन और अतिक्रमण की मार झेल रही है। अगर कानूनी रूप से इसकी सीमाएं और परिभाषा कमजोर की गईं, तो आने वाले वर्षों में इसका भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
पर्यावरण प्रेमियों की चिंता
Aravalli Hills Environmental Issue : पर्यावरण विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि अरावली पर्वतमाला भूजल संरक्षण, हरियाली, वन्यजीवों के आवास और रेगिस्तान के विस्तार को रोकने में अहम भूमिका निभाती है। यह पर्वतमाला उत्तर भारत में धूल भरी आंधियों और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को भी कम करती है। उनका मानना है कि अरावली की परिभाषा में बदलाव भविष्य में गंभीर पर्यावरणीय संकट को जन्म दे सकता है, जिसका असर केवल राजस्थान तक सीमित नहीं रहेगा।
डिजिटल प्लेटफॉर्म बना आंदोलन की ताकत
Rajasthan Environment News : इस अभियान में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वे लगातार वीडियो, पोस्ट और लाइव सेशन के जरिए लोगों को जोड़ रहे हैं और जागरूकता फैला रहे हैं। उनका कहना है कि डिजिटल माध्यम आज की सबसे बड़ी ताकत है, जिसके जरिए जनमत तैयार कर सरकार और नीति निर्धारकों तक आवाज पहुंचाई जा सकती है। ‘सेव अरावली’ अभियान के जरिए युवा यह साफ संदेश देना चाहते हैं कि विकास जरूरी है, लेकिन पर्यावरण की कीमत पर नहीं।



