
Social harmony funeral : राजसमंद जिले के केलवाड़ा कस्बे में इंसानियत की ऐसी मिसाल देखने को मिली, जिसने कई लोगों की आंखें नम कर दीं और सोचने पर मजबूर भी कर दिया। जीवनभर संघर्ष करने वाले चंपालाल मेघवाल की कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि समाज और रिश्तों की परिभाषा को आईना दिखाने वाली बन गई।
दरअसल चंपालाल ने कुछ वर्ष पहले अंतरजातीय विवाह कर भील समाज की युवती से शादी की थी। यह फैसला उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ। शादी के बाद दोनों परिवारों ने उनसे दूरी बना ली। रिश्ते धीरे-धीरे खत्म हो गए और वे अपनी पत्नी व तीन छोटे बच्चों के साथ मजदूरी कर किसी तरह गुजारा करते रहे। समय बीतता गया, मगर रिश्तों की दूरी कभी कम नहीं हुई। लेकिन असली परीक्षा तब आई, जब 14 फरवरी को अचानक चंपालाल का निधन हो गया। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पत्नी बेसहारा थी, बच्चे छोटे थे और सबसे बड़ा दुख — अपने कहे जाने वाले लोगों ने अंतिम संस्कार तक से इनकार कर दिया। Humanity wins over relations story
समाज बना सहारा
Humanity over caste news India : घटना की जानकारी मिलते ही केलवाड़ा कस्बे का सर्व हिन्दू समाज एकजुट हो गया। लोगों ने फैसला किया कि किसी इंसान की अंतिम यात्रा अकेली नहीं जाएगी। फिर जो दृश्य बना, उसने पूरे कस्बे को भावुक कर दिया। ब्राह्मण, राजपूत, वाल्मीकि, लोहार, लक्षकार सहित हर वर्ग के लोग एकत्र हुए। किसी ने अर्थी को कंधा दिया, किसी ने लकड़ी की व्यवस्था की, तो किसी ने परिवार को ढांढस बंधाया। ढोल के साथ पूरे हिन्दू रीति-रिवाज से शवयात्रा निकाली गई और पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान भवानीशंकर आचार्य, जवाहरलाल राठौड़, लाला वाल्मीकि, अनिल डागर, राकेश आचार्य, धर्मेश लक्षकार, सोहनसिंह खरवड़, हिम्मत लोहार, राजू लक्षकार, हेमेंद्र रजक, पन्नालाल ढोली सहित कई लोग मौजूद रहे। Emotional funeral procession India news

इंसानियत का संदेश
Hindu community unity real story : जहां अपनों ने रिश्ते तोड़ दिए थे, वहां समाज परिवार बनकर खड़ा रहा। चिता की लपटों में सिर्फ एक व्यक्ति का शरीर नहीं, बल्कि भेदभाव की सोच भी जलती नजर आई। केलवाड़ा की इस घटना ने एक गहरा संदेश छोड़ दिया — रिश्ते खून से नहीं, इंसानियत से बनते हैं।
