
Udaipur Cha Raja : उदयपुर के बापू बाजार में गणेश चतुर्थी के अवसर पर भगवान गणपति का एक अनूठा और भव्य श्रृंगार किया गया। इस साल स्वास्तिक विनायक गणपति मित्र मंडल ने 17 फीट ऊंची गणपति प्रतिमा को 1 करोड़ 51 लाख 5 हजार 500 रुपये के नोटों से सजाकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इस शाही श्रृंगार में 50, 100, 200, और 500 रुपये के कुल 58,201 नोटों का उपयोग किया गया, जिसमें 500 रुपये के 21,101 नोट, 200 रुपये के 11,000 नोट, 100 रुपये के 21,000 नोट, और 50 रुपये के 5,100 नोट शामिल थे। यह अलौकिक दृश्य देखकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए और पंडाल में भगवान के दर्शन के लिए भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
स्वास्तिक विनायक गणपति मित्र मंडल की अनूठी परंपरा
Ganesh Chaturthi Udaipur स्वास्तिक विनायक गणपति मित्र मंडल पिछले 25 वर्षों से गणेश महोत्सव का आयोजन करता आ रहा है। बापू बाजार, जो उदयपुर का सबसे बड़ा और व्यस्ततम बाजार है, इस आयोजन का केंद्र रहा है। मंडल के अध्यक्ष वैभव अग्रवाल ने बताया कि नोटों से गणपति का श्रृंगार उनकी सबसे खास परंपरा है, जो पिछले 21 वर्षों से निरंतर चली आ रही है। भक्त इस स्वरूप को महालक्ष्मी का प्रतीक मानते हैं, जो समृद्धि और सौभाग्य का आशीर्वाद देता है। इस साल का श्रृंगार न केवल भव्यता में बल्कि भक्ति और आस्था के मामले में भी अद्वितीय रहा।
बंगाल की टीम ने बिखेरी कारीगरी की छटा
इस भव्य श्रृंगार को साकार करने के लिए बंगाल से आई एक विशेष आठ सदस्यीय कारीगरों की टीम ने पांच दिन तक अथक परिश्रम किया। मंडल के सदस्य संदीप मंगरोरा ने बताया कि जैसे ही गणपति बप्पा की पहली झलक भक्तों को मिली, बापू बाजार “गणपति बप्पा मोरया” के जयकारों से गूंज उठा। नोटों से सजी यह आंगी गणपति की मूर्ति को और भी दिव्य और मनमोहक बनाती है। इस श्रृंगार में नोटों को इस तरह व्यवस्थित किया गया कि गणपति की सूंड, माला, और कवच सभी अलौकिक सौंदर्य के साथ चमक उठे।
उदयपुर चा राजा: मुंबई की तर्ज पर अनूठी पहचान
Swastik Vinayak Ganpati Mandal मुंबई के प्रसिद्ध “लालबाग चा राजा” की तर्ज पर उदयपुर में बापू बाजार की इस गणपति प्रतिमा को “उदयपुर चा राजा” के नाम से जाना जाता है। यह पंडाल न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक भव्यता का प्रतीक भी है। पिछले 25 वर्षों से यह मंडल गणेश महोत्सव को भव्यता के साथ मनाता आ रहा है, और नोटों से श्रृंगार की परंपरा ने इसे देशभर में प्रसिद्धि दिलाई है। मंगलवार रात को हुई महाआरती में हजारों भक्त शामिल हुए, और देर रात तक दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
हर साल बढ़ता है श्रृंगार का बजट
Udaipur Ganesh Festival स्वास्तिक विनायक गणपति मित्र मंडल की यह परंपरा हर साल नई ऊंचाइयों को छू रही है। वैभव अग्रवाल ने बताया कि इस श्रृंगार की शुरुआत 2004 में 5 लाख 55 हजार 555 रुपये के नोटों से हुई थी। इसके बाद यह राशि धीरे-धीरे बढ़ती गई—7 लाख 77 हजार 777 रुपये, 11 लाख 11 हजार 111 रुपये, 21 लाख 21 हजार 221 रुपये, 31 लाख 31 हजार 331 रुपये, 41 लाख 41 हजार 441 रुपये, और इस साल 1 करोड़ 51 लाख 5 हजार 500 रुपये तक पहुंच गई। इस भव्य आयोजन के लिए मंडल के 30 सदस्य आपसी सहयोग से चंदा इकट्ठा करते हैं। विशेष बात यह है कि चंदे की राशि में से रसीद काटकर शेष राशि सदस्यों को वापस कर दी जाती है, जिससे यह परंपरा पारदर्शी और भक्ति से प्रेरित रहती है।

भक्तों का उत्साह और आयोजन की विशेषताएं
Ganpati Bappa Morya Udaipur इस साल गणपति बप्पा का दरबार रंग-बिरंगी लाइटों, फूलों की सजावट, और भक्तिमय माहौल से और भी आकर्षक बन गया। पंडाल में हर दिन अलग-अलग थीम पर सजावट की जाती है, जो भक्तों के लिए एक नया अनुभव लेकर आती है। मंगलवार रात को भारी भीड़ को देखते हुए ट्रैफिक को डायवर्ट करना पड़ा, ताकि भक्तों को दर्शन में कोई असुविधा न हो। इसके अलावा, भक्तों के लिए 301 किलो बूंदी और 200 किलो पुलाव का प्रसाद भी वितरित किया गया। पुष्प वर्षा, आतिशबाजी, और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने इस आयोजन को और भी यादगार बना दिया।
सामाजिक और धार्मिक महत्व
उदयपुर चा राजा का यह श्रृंगार न केवल धार्मिक आस्था को बढ़ावा देता है, बल्कि सामुदायिक एकता को भी दर्शाता है। मंडल के सदस्यों का कहना है कि यह आयोजन भक्तों को एकजुट करने और सनातन संस्कृति को जीवित रखने का एक माध्यम है। गणपति बप्पा को नोटों से सजाने की यह परंपरा समृद्धि और वैभव का प्रतीक मानी जाती है, जो भक्तों को सौभाग्य और खुशहाली का आशीर्वाद देती है।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
इतनी बड़ी राशि के नोटों का उपयोग होने के कारण पंडाल की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। सीसीटीवी कैमरों और सुरक्षा गार्ड्स की तैनाती सुनिश्चित की गई है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके। श्रृंगार के बाद नोटों को सुरक्षित रूप से हटाकर संबंधित सदस्यों को वापस कर दिया जाता है।



