
Udaipur Files movie : उदयपुर के बहुचर्चित कन्हैयालाल हत्याकांड पर आधारित फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स’ की रिलीज पर दिल्ली हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। यह निर्णय जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस अनीश दयाल की खंडपीठ ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी सहित तीन याचिकाओं पर सुनवाई के बाद लिया। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि यह फिल्म सांप्रदायिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा सकती है और देश के मुस्लिम समुदाय को बदनाम करने का प्रयास करती है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को सिनेमैटोग्राफ अधिनियम के तहत सात दिनों के भीतर याचिकाकर्ताओं की आपत्तियों पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। तब तक फिल्म की रिलीज पर रोक बरकरार रहेगी। इस बीच, कन्हैयालाल के परिवार ने कोर्ट के फैसले पर निराशा जताते हुए हत्याकांड के दोषियों को सजा में देरी पर सवाल उठाए हैं।
‘उदयपुर फाइल्स’ फिल्म, जो 28 जून 2022 को उदयपुर में दर्जी कन्हैयालाल की निर्मम हत्या की घटना पर आधारित है, शुक्रवार, 11 जुलाई 2025 को देशभर के लगभग 3500 सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली थी। हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश ने इसकी रिलीज पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को दो दिनों के भीतर अपनी आपत्तियां केंद्र सरकार के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। दूसरी ओर, कन्हैयालाल के बेटे यश तेली ने न्याय में देरी पर दुख जताया और कहा कि हत्याकांड को तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन दोषियों को अभी तक सजा नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में फिल्म पर रोक से इनकार किया था, जिसके बाद मामला हाईकोर्ट में पहुंचा।
दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला
Kanhaiya Lal murder case movie : दिल्ली हाईकोर्ट की खंडपीठ ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद और अन्य याचिकाकर्ताओं की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए ‘उदयपुर फाइल्स’ की रिलीज पर अंतरिम रोक लगा दी। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि फिल्म में कुछ दृश्य और संवाद भावनाओं को भड़काने वाले हैं, जो सामाजिक और सांप्रदायिक सद्भाव को नुकसान पहुंचा सकते हैं। उनका दावा है कि फिल्म के जरिए एक विशेष समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे देश में तनाव की स्थिति पैदा हो सकती है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे अपनी आपत्तियां दो दिनों के भीतर केंद्र सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय के समक्ष दर्ज कराएं।
कोर्ट ने केंद्र सरकार को सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 की धारा 6 के तहत अपनी पुनरीक्षण शक्तियों का उपयोग करते हुए सात दिनों के भीतर याचिकाकर्ताओं की आपत्तियों पर अंतिम निर्णय लेने का आदेश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार इस मामले में फैसला नहीं लेती, तब तक फिल्म की रिलीज पर रोक प्रभावी रहेगी। यह निर्णय सामाजिक संवेदनशीलता और कानूनी प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
कन्हैयालाल के परिवार की प्रतिक्रिया
Udaipur Files High Court stay : कन्हैयालाल के बेटे यश तेली ने कोर्ट के फैसले पर गहरी निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा, “एक तरफ फिल्म की रिलीज पर इतनी जल्दी सुनवाई और फैसला हो जाता है, लेकिन मेरे पिता के हत्यारों को सजा देने में तीन साल से देरी हो रही है। न्याय कब मिलेगा?” यश ने यह भी बताया कि उनकी मां और भाई इस हत्याकांड के बाद से भावनात्मक और आर्थिक रूप से टूट चुके हैं। परिवार ने फिल्म को एक माध्यम के रूप में देखा था, जो उनकी पीड़ा को दुनिया तक पहुंचा सकता था, लेकिन अब रिलीज पर रोक ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। यश ने सवाल उठाया कि क्या सांप्रदायिक सौहार्द का हवाला देकर उनके परिवार के दर्द को अनदेखा किया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट का रुख
Why was Udaipur Files movie banned? : इससे पहले, 9 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट में कन्हैयालाल हत्याकांड के एक आरोपी, मोहम्मद जावेद ने फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की याचिका दायर की थी। जावेद ने तर्क दिया कि चूंकि मामला अभी एनआईए की विशेष अदालत में विचाराधीन है, इसलिए फिल्म का प्रदर्शन ट्रायल को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज करते हुए कहा कि यदि याचिकाकर्ता को कोई आपत्ति है, तो वे हाईकोर्ट में अपील कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद याचिकाकर्ताओं ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया, जहां उन्हें अंतरिम राहत मिली।

‘उदयपुर फाइल्स’ पर विवाद
Udaipur Files release date 2025 : ‘उदयपुर फाइल्स’ फिल्म 28 जून 2022 को उदयपुर में हुए कन्हैयालाल हत्याकांड की घटना पर आधारित है। इस हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया था, जब दो व्यक्तियों, मोहम्मद रियाज अत्तारी और गौस मोहम्मद ने कन्हैयालाल की उनकी दुकान में गला काटकर हत्या कर दी थी। फिल्म के ट्रेलर में नुपूर शर्मा के विवादित बयान और ज्ञानवापी मस्जिद विवाद से संबंधित दृश्यों को शामिल किया गया है, जिसे याचिकाकर्ताओं ने सांप्रदायिक तनाव को बढ़ाने वाला बताया है। ट्रेलर में दिखाए गए संवाद और दृश्यों को लेकर यह आशंका जताई गई है कि फिल्म सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ सकती है।
फिल्म के निर्माताओं ने दावा किया है कि यह फिल्म केवल कन्हैयालाल हत्याकांड की सच्चाई को सामने लाने और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए बनाई गई है। हालांकि, याचिकाकर्ताओं का कहना है कि फिल्म में कुछ दृश्य एकतरफा और भड़काऊ हैं, जो समाज में वैमनस्य को बढ़ावा दे सकते हैं। मंगलवार को दिल्ली में फिल्म के प्रमोशनल इवेंट में कन्हैयालाल का परिवार भी मौजूद था, जहां उन्होंने फिल्म को समर्थन देते हुए इसे अपनी आवाज का माध्यम बताया था।
कन्हैयालाल हत्याकांड
Udaipur tailor murder film controversy : 28 जून 2022 को उदयपुर के मालदास स्ट्रीट में दर्जी कन्हैयालाल की दुकान में दो व्यक्तियों, मोहम्मद रियाज अत्तारी और गौस मोहम्मद ने उनकी गला काटकर हत्या कर दी थी। इस घटना को आतंकी हमले के रूप में देखा गया, क्योंकि हत्यारों ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड किया था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने इस मामले की जांच अपने हाथ में ली और 11 आरोपियों के खिलाफ चालान दायर किया, जिनमें गौस मोहम्मद, मोहम्मद रियाज अत्तारी, मोहसिन, आसिफ, मोहम्मद मोहसिन, वसीम अली, फरहाद मोहम्मद शेख (उर्फ बबला), और मोहम्मद जावेद शामिल हैं। इसके अलावा, पाकिस्तान के कराची निवासी सलमान और अबू इब्राहिम को फरार घोषित किया गया है।
एनआईए की विशेष अदालत ने 9 फरवरी 2023 को हत्या, आतंकी गतिविधियों, आपराधिक षड्यंत्र, गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), और आर्म्स एक्ट के तहत मामले में प्रसंज्ञान लिया था। हालांकि, तीन साल बाद भी मुख्य आरोपियों को सजा नहीं मिली है, जिससे कन्हैयालाल का परिवार निराश है।
जमानत पर विवाद
इस मामले में दो आरोपियों को जमानत मिल चुकी है। फरहाद मोहम्मद शेख (उर्फ बबला) को 1 सितंबर 2023 को एनआईए कोर्ट ने जमानत दी थी, क्योंकि उनके खिलाफ केवल आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज था। इसके बाद, 5 सितंबर 2024 को राजस्थान हाईकोर्ट ने मोहम्मद जावेद को जमानत दी, जिस पर आरोप था कि उसने रियाज अत्तारी के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची थी।



