
Udaipur Files movie release उदयपुर में एक ऐसी फिल्म रिलीज हुई, जिसने न केवल सिनेमाघरों में दर्शकों को भावुक कर दिया, बल्कि एक परिवार के तीन साल के संघर्ष और दर्द को भी सामने लाया। ‘उदयपुर फाइल्स’, कन्हैयालाल साहू हत्याकांड पर आधारित यह फिल्म, आज देशभर के 4500 सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई। उदयपुर के अरबन स्क्वायर मॉल में आयोजित पहले शो में कन्हैयालाल के दोनों बेटे, यश और तरुण, अपने पिता की तस्वीर के साथ मौजूद थे। जब फिल्म में कन्हैयालाल की हत्या का दृश्य दिखाया गया, तो दोनों भाई अपने आंसुओं को रोक न सके। यह दृश्य न केवल उनके लिए, बल्कि हर दर्शक के लिए हृदयविदारक था।
अरबन स्क्वायर मॉल में पहले शो के दौरान सिनेमाघर में मौजूद दर्शकों की सांसे उस समय थम गईं, जब स्क्रीन पर कन्हैयालाल की हत्या का दृश्य आया। यश और तरुण, जो अपने पिता की तस्वीर को सीट पर रखकर फिल्म देख रहे थे, इस दृश्य को देखकर भावुक हो उठे। फिल्म के अंत में दर्शकों ने एक स्वर में “हत्यारों को फांसी दो” के नारे लगाए, जो उनके गुस्से और न्याय की मांग को दर्शाता था। यश ने कहा, “यह फिल्म हमारे लिए उस दर्दनाक घटना का पुनर्जनन है। वह दिन, वह दृश्य, वह दर्द… सब कुछ फिर से आंखों के सामने आ गया। जब तक हमें न्याय नहीं मिलता, यह दर्द हमारे साथ रहेगा।”
कन्हैयालाल के बेटों की अपील
Kanhaiyalal Sahu murder case film कन्हैयालाल के बड़े बेटे यश तेली ने फिल्म देखने के बाद अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा, “तीन साल से हमारा परिवार न्याय की लड़ाई लड़ रहा है, लेकिन अभी तक हमें इंसाफ नहीं मिला। यह फिल्म केवल एक कहानी नहीं, बल्कि हमारी पीड़ा और संघर्ष का जीवंत चित्रण है। मैं देशवासियों से अपील करता हूं कि वे इस फिल्म को देखें और हमारी इस न्याय की लड़ाई में हमारा साथ दें।” छोटे बेटे तरुण ने भी कहा, “पापा के साथ जो हुआ, वह हम कभी नहीं भूल सकते। यह फिल्म उस क्रूरता को दिखाती है, जो आतंकवादी मानसिकता वाले लोगों ने हमारे परिवार के साथ की।”
फिल्म की कहानी और प्रदर्शन
Udaipur Files emotional scenes ‘उदयपुर फाइल्स’ का निर्देशन भरत एस. श्रीनाते ने किया है, जबकि निर्माता अमित जानी हैं। फिल्म में कन्हैयालाल का किरदार मशहूर अभिनेता विजय राज ने निभाया है, जिन्होंने अपनी अभिनय क्षमता से इस किरदार को जीवंत कर दिया। रजनीश दुग्गल और प्रीति झांगियानी ने भी फिल्म में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। फिल्म का पहला हिस्सा (इंटरवल तक) उस घटनाक्रम को दर्शाता है, जिसमें एक विवादित सोशल मीडिया पोस्ट के बाद कन्हैयालाल को उदयपुर की धानमंडी थाने की पुलिस हिरासत में लेती है। इस दौरान पुलिस द्वारा कन्हैयालाल और उनके बेटों के साथ किए गए दुर्व्यवहार को भी दिखाया गया है। हालांकि, इंटरवल तक नूपुर शर्मा के विवादित बयान और हत्याकांड के मुख्य दृश्य को नहीं दिखाया गया, जिससे दर्शकों में उत्सुकता बनी रही।
रिलीज से पहले का संघर्ष
Kanhaiyalal sons reaction ‘उदयपुर फाइल्स’ को रिलीज करने का रास्ता आसान नहीं था। फिल्म को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। कुछ धार्मिक संगठनों और हत्याकांड के एक आरोपी मोहम्मद जावेद ने इसके खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। 10 जुलाई 2025 को हाईकोर्ट ने फिल्म की रिलीज पर अंतरिम रोक लगा दी थी। इसके बाद निर्माताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जहां 25 जुलाई 2025 को रिलीज की अनुमति मिली। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को फिल्म की समीक्षा करने का निर्देश दिया, और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने एक समिति गठन कर फिल्म की जांच की। समिति ने पाया कि फिल्म किसी समुदाय को नुकसान पहुंचाने वाली नहीं है, और इसे रिलीज करने की अनुमति दी गई। निर्माता अमित जानी ने एक वीडियो संदेश में कहा, “हमारा उद्देश्य किसी समुदाय को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि एक सत्य घटना को समाज के सामने लाना है। यह फिल्म कन्हैयालाल और उनके परिवार के संघर्ष की कहानी है।”

सुरक्षा के कड़े इंतजाम
Udaipur Files controversy फिल्म के रिलीज के दौरान उदयपुर के अरबन स्क्वायर मॉल में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। उदयपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) योगेश गोयल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) उमेश ओझा, और सुखेर CI रवींद्र सिंह चारण भारी पुलिस बल के साथ मौके पर मौजूद थे। फिल्म देखने आने वाले प्रत्येक दर्शक के दस्तावेजों की जांच की गई, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। मॉल के बाहर और अंदर पुलिस की तैनाती थी, जिससे शांति और सुरक्षा सुनिश्चित की गई।
कन्हैयालाल के लिए रिजर्व सीट
सिनेमाघर में एक विशेष व्यवस्था की गई थी, जिसमें कन्हैयालाल के लिए एक सीट रिजर्व रखी गई थी। इस सीट पर उनकी तस्वीर रखी गई थी, और उनके दोनों बेटे, यश और तरुण, इस सीट के दोनों ओर बैठे थे। यह दृश्य दर्शकों के लिए बेहद भावनात्मक था, क्योंकि यह कन्हैयालाल की अनुपस्थिति और उनके परिवार के दर्द को दर्शाता था।
दर्शकों की प्रतिक्रिया
पहला शो देखने आए दर्शकों में से एक, लेक्चरर प्रमोद कुमार भाटी ने कहा, “मैं कई दिनों से इस फिल्म का इंतजार कर रहा था। कन्हैयालाल हत्याकांड एक दुखद घटना थी, और यह फिल्म उस घटना को समाज के सामने लाने का एक साहसी प्रयास है। मुझे उम्मीद है कि यह फिल्म समाज में भाईचारे को और मजबूत करेगी।” अन्य दर्शकों ने भी फिल्म की कहानी और अभिनय की सराहना की, साथ ही कन्हैयालाल के परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
परिवार का दर्द और न्याय की मांग
यश तेली ने बताया कि उनकी मां इस फिल्म को देखने नहीं आईं, क्योंकि यह उनके लिए बेहद भावनात्मक और दर्दनाक अनुभव होता। उन्होंने कहा, “पहले भी मां फिल्म देखने की स्थिति में नहीं थीं। उस समय हमें बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ा था। इसलिए इस बार हमने उन्हें साथ नहीं लाने का फैसला किया।” यश ने यह भी बताया कि यह फिल्म आतंकवादी मानसिकता और उस क्रूरता को दर्शाती है, जिसने उनके परिवार को हमेशा के लिए बदल दिया।
फिल्म का सामाजिक संदेश
‘उदयपुर फाइल्स’ केवल एक हत्याकांड की कहानी नहीं है, बल्कि यह समाज को एक गहरा संदेश देती है। यह फिल्म नफरत और हिंसा के खिलाफ एकजुट होने की अपील करती है। साथ ही, यह न्याय की लड़ाई में समाज के समर्थन की आवश्यकता को रेखांकित करती है। यश और तरुण ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि उनकी लड़ाई केवल उनके परिवार की नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति की है, जो हिंसा और अन्याय के खिलाफ खड़ा है।



