
UPI transaction charges : भारत में डिजिटल पेमेंट्स की दुनिया में एक अहम बदलाव की संभावना बन रही है। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI), जो अब देश का सबसे लोकप्रिय और व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला पेमेंट सिस्टम बन चुका है, उस पर अब कुछ ट्रांजैक्शन पर चार्ज लग सकता है। केंद्र सरकार 3,000 रुपए से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) दोबारा लागू करने पर विचार कर रही है।
इस प्रस्ताव के तहत, दुकानदारों (Merchants) को 3,000 रुपए से ऊपर के UPI पेमेंट पर 0.3% का MDR देना पड़ सकता है, जिससे उन्हें प्रति ट्रांजैक्शन करीब 9 रुपए तक का शुल्क चुकाना होगा। हालांकि, आम ग्राहक यानी पेमेंट करने वाले को कोई अतिरिक्त राशि नहीं देनी होगी, लेकिन कुछ व्यापारी यह चार्ज अप्रत्यक्ष रूप से ग्राहकों से वसूल सकते हैं।
UPI पर चार्ज लगाने की योजना क्यों बनाई जा रही है?
UPI MDR charges for merchants : NDTV की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ समय में बैंकों, फिनटेक कंपनियों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स (PSPs) का इंफ्रास्ट्रक्चर काफी विस्तारित हुआ है। इन संस्थाओं को UPI ट्रांजैक्शन संभालने के लिए भारी निवेश और तकनीकी खर्च करना पड़ रहा है। ऐसे में सरकार इस व्यवस्था को वित्तीय रूप से स्थिर बनाए रखने के लिए चार्ज का विकल्प तलाश रही है।
हाल ही में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), वित्त मंत्रालय, NPCI (नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया), बैंकिंग कंपनियों और फिनटेक स्टार्टअप्स के साथ हुई बैठक में इस विषय पर गंभीरता से चर्चा की गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, आगामी दो महीनों में यह नया नियम लागू किया जा सकता है।
💰 चार्ज कैसे और किन्हें लगेगा?
UPI payment rules new update : नया प्रस्ताव कहता है कि:
- अगर आप किसी दुकान, मॉल, पेट्रोल पंप, या ई-कॉमर्स वेबसाइट पर UPI से 3,000 रुपए से अधिक का पेमेंट करते हैं, तो वह मर्चेंट (दुकानदार) उस पर 0.3% MDR देगा।
- उदाहरण: ₹3,000 के पेमेंट पर ₹9 का शुल्क
- यह शुल्क बैंक या पेमेंट कंपनी द्वारा मर्चेंट से वसूला जाएगा।
- ग्राहक से यह चार्ज सीधे तौर पर नहीं लिया जाएगा, लेकिन कुछ व्यापारी इसे सामान या सर्विस के दाम में जोड़ सकते हैं।
- ₹3,000 तक के ट्रांजैक्शन और छोटे दुकानदारों पर कोई असर नहीं पड़ेगा, वे पहले की तरह फ्री UPI पेमेंट स्वीकार कर सकेंगे।
📈 UPI का तेजी से बढ़ता उपयोग
Merchant discount rate on UPI : मई 2025 में UPI ने रिकॉर्ड तोड़ते हुए 18.67 अरब ट्रांजैक्शन दर्ज किए। इन ट्रांजैक्शन के जरिए लगभग 25.14 लाख करोड़ रुपए का लेन-देन हुआ। सिर्फ एक महीने में ट्रांजैक्शन की संख्या में 4% की वृद्धि और वैल्यू में 33% की बढ़त देखी गई। यह आंकड़ा दिखाता है कि UPI अब न केवल सामान्य लोगों बल्कि मर्चेंट्स के बीच भी भरोसेमंद और मुख्य पेमेंट सिस्टम बन चुका है।
🧾 पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया की सिफारिश
Government UPI charges news : पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर मौजूदा ‘Zero MDR Policy’ पर पुनर्विचार करने की अपील की है। PCI का कहना है कि UPI और RuPay कार्ड ट्रांजैक्शन पर 0.3% का मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगाना न सिर्फ जरूरी है, बल्कि इससे बैंकों और PSPs को भी स्थायित्व मिलेगा।
द इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में दो वरिष्ठ बैंक अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि इस नीति से बड़े मर्चेंट्स पर मामूली असर पड़ेगा, क्योंकि वे पहले से ही अपने अधिकांश लेन-देन डेबिट या क्रेडिट कार्ड्स से करते हैं, जिन पर MDR पहले से लागू है।
🕰️ MDR पहले क्यों हटाया गया था?
2022 से पहले, मर्चेंट्स को कार्ड और UPI पेमेंट्स पर बैंकों को 0.4% से 1% तक का MDR देना होता था। लेकिन डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने और कैशलेस इकोनॉमी की दिशा में कदम बढ़ाते हुए सरकार ने वित्त वर्ष 2022-23 के बजट में MDR को पूरी तरह खत्म कर दिया।
इस फैसले से UPI का उपयोग तेजी से बढ़ा और आज यह भारत में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला डिजिटल पेमेंट मोड बन गया है। इसके साथ ही, RuPay डेबिट कार्ड्स का भी चलन काफी बढ़ गया।

📊 उद्योग जगत की प्रतिक्रिया
फिनटेक सेक्टर के विशेषज्ञों और स्टार्टअप्स का मानना है कि MDR दोबारा लागू करना एक संतुलित निर्णय हो सकता है, बशर्ते यह छोटे कारोबारियों को प्रभावित न करे। कई लोगों का कहना है कि ट्रांजैक्शन की कमीशन फ्री सुविधा से PSPs और बैंकों पर आर्थिक दबाव बनता है, जिससे उनके सिस्टम की प्रदर्शन क्षमता और सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर पर प्रभाव पड़ सकता है।
कुछ विशेषज्ञों ने यह भी सुझाव दिया है कि सरकार सब्सिडी मॉडल के जरिए छोटे दुकानदारों को छूट देती रहे, जबकि बड़े रिटेल मर्चेंट्स से नियमानुसार शुल्क लिया जाए।
🛒 ग्राहकों को क्या ध्यान रखना चाहिए?
- अगर आप ₹3,000 से ज्यादा का पेमेंट कर रहे हैं, तो चेक करें कि व्यापारी आपसे कोई अतिरिक्त शुल्क तो नहीं ले रहा।
- यह जानना जरूरी है कि चार्ज केवल मर्चेंट के लिए अनिवार्य है, ग्राहक पर कोई सीधा बोझ नहीं डाला जा सकता।
- फिर भी, नकद या अन्य डिजिटल मोड्स में तुलनात्मक विकल्प देखकर भुगतान करें।
- पेट्रोल पंप, मॉल, और ऑनलाइन वेबसाइट्स पर इस बदलाव का व्यापक असर हो सकता है, खासकर अगर चार्ज को ग्राहक पर ट्रांसफर किया जाए।
