
Vishwas Kumar Ramesh : अहमदाबाद में गुरुवार को हुए भीषण विमान हादसे ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171, जो अहमदाबाद से लंदन के लिए उड़ान भर रही थी, टेकऑफ के कुछ ही सेकंड बाद एक मेडिकल हॉस्टल पर जा गिरी। इस भयावह हादसे में 241 यात्रियों और क्रू मेंबर्स सहित कुल 265 लोगों की जान चली गई। लेकिन इस तबाही के बीच एक चमत्कार भी हुआ—40 वर्षीय विश्वास कुमार रमेश इस हादसे से जिंदा बच निकले। विश्वास ने अपनी खौफनाक आपबीती सुनाई, जिसमें उन्होंने बताया कि जब उनकी आंखें खुलीं, तो उनके चारों ओर सिर्फ लाशें बिखरी पड़ी थीं।
एकमात्र जीवित बचे यात्री की कहानी
ahmedabad plane crash : अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से गुरुवार दोपहर 1:38 बजे एयर इंडिया की बोइंग 787 ड्रीमलाइनर फ्लाइट AI-171 ने लंदन के लिए उड़ान भरी थी। लेकिन टेकऑफ के महज दो मिनट बाद ही विमान पास के बीजे मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल पर जा गिरा। हादसा इतना भयानक था कि विमान के टुकड़े-टुकड़े हो गए और आग की लपटों ने सब कुछ तबाह कर दिया। इस हादसे में एकमात्र जीवित बचे यात्री, विश्वास कुमार रमेश ने हिंदुस्तान टाइम्स को अपनी आपबीती सुनाई। 40 वर्षीय विश्वास ने कहा, “विमान ने जैसे ही उड़ान भरी, महज 30 सेकंड के भीतर एक तेज धमाका हुआ और सब कुछ अंधेरे में डूब गया। जब मेरी आंखें खुलीं, तो चारों तरफ लाशें बिखरी पड़ी थीं। मैं डर के मारे कांप रहा था। मेरे आसपास विमान के जलते हुए मलबे के टुकड़े थे। मैं किसी तरह वहां से भागा। तभी कुछ लोगों ने मुझे पकड़ा और एम्बुलेंस में डालकर अस्पताल पहुंचाया।” विश्वास ने बताया कि हादसे के बाद उन्हें कुछ समय तक लगा कि वह भी नहीं बच पाएंगे। लेकिन जब उन्होंने अपनी सीट बेल्ट खोलने की कोशिश की, तो उन्हें थोड़ा स्पेस मिला और वह मलबे से बाहर निकल आए। उन्होंने अपनी आंखों के सामने एयरहोस्टेस और अन्य यात्रियों को मरते देखा। विश्वास की सीट नंबर 11A थी, जो विमान के उस हिस्से में थी, जो हॉस्टल के ग्राउंड फ्लोर पर गिरा था।
कैसे बची विश्वास की जान?
Who is Vishwash Kumar Ramesh? : विश्वास ने बताया कि उनकी जान बचने का कारण उनकी सीट की लोकेशन थी। वह विमान के उस हिस्से में बैठे थे, जहां हादसे के बाद थोड़ा स्पेस बचा था, जिसके चलते वह बाहर निकल सके। उन्होंने कहा, “मेरी तरफ थोड़ा खाली स्थान था, लेकिन बाकी लोगों की तरफ शायद दीवार थी, जिसके कारण वे बाहर नहीं निकल पाए। आग लगने से मेरा बायां हाथ जल गया, लेकिन मैं किसी तरह बच गया। यह सब मेरी आंखों के सामने हुआ, लेकिन मुझे आज भी यकीन नहीं हो रहा कि मैं जिंदा हूं।”
अहमदाबाद के असरवा सिविल अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर्स ने भी विश्वास के बचने को एक चमत्कार बताया। डॉक्टरों के अनुसार, विश्वास को छाती पर हल्की चोटें आईं, लेकिन उनकी हालत स्थिर है। अस्पताल में जहां लोग अपने परिजनों की तलाश में रोते-बिलखते दिखे, वहीं विश्वास मीडिया को अपनी कहानी सुना रहे थे। उनके हाथ में उनका बोर्डिंग पास भी सुरक्षित था, जो इस भयानक हादसे का एकमात्र सबूत बन गया।
परिवार से मिलने आए थे विश्वास, भाई की मौत
air india plane crash विश्वास कुमार रमेश एक ब्रिटिश नागरिक हैं और पिछले 20 सालों से लंदन में रह रहे हैं। उनकी पत्नी और बच्चे भी लंदन में ही रहते हैं। विश्वास अपने परिवार से मिलने के लिए भारत आए थे और अपने बड़े भाई अजय कुमार रमेश (45) के साथ वापस लंदन जा रहे थे। विश्वास और अजय हाल ही में दीव की यात्रा करके लौटे थे। लेकिन इस हादसे में अजय की भी मौत हो गई। विश्वास ने बताया, “मैं और मेरा भाई साथ में यात्रा कर रहे थे। लेकिन अब वह इस दुनिया में नहीं है। यह मेरे लिए बहुत बड़ा सदमा है।”
हादसे की जांच शुरू
plane crash news विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) ने इस हादसे की जांच शुरू कर दी है। न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार, AAIB के महानिदेशक और जांच निदेशक सहित एक विशेष टीम अहमदाबाद के लिए रवाना हो चुकी है। बोइंग कंपनी ने भी एक बयान जारी कर कहा, “हमें इस हादसे की शुरुआती रिपोर्ट मिली है। हम अधिक जानकारी जुटाने और जांच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं।”
हादसा इतना भयावह था कि कई शवों की पहचान करना मुश्किल हो गया है। गुजरात सरकार ने मृतकों के परिजनों से DNA सैंपल देने की अपील की है, ताकि शवों की सही पहचान हो सके। अब तक 265 शव बरामद किए जा चुके हैं, जिनमें 241 विमान में सवार यात्री और क्रू मेंबर्स थे, जबकि 5 शव उस मेडिकल हॉस्टल के थे, जहां विमान गिरा था।
मेडिकल हॉस्टल में भी तबाही
विमान जिस बीजे मेडिकल कॉलेज हॉस्टल पर गिरा, वहां उस समय 50 से अधिक लोग मौजूद थे। हादसे में 4 MBBS छात्रों और एक डॉक्टर की पत्नी की मौत की पुष्टि हुई है। हालांकि, हॉस्टल में हुई कुल मौतों की सही संख्या अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है। हॉस्टल में रहने वाले कई छात्र उस समय अपने कमरों में थे, और विमान के गिरते ही आग की लपटों ने सब कुछ तबाह कर दिया।

फ्लाइट में कौन-कौन था?
एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 में कुल 230 यात्री सवार थे, जिनमें 169 भारतीय, 53 ब्रिटिश, 7 पुर्तगाली और 1 कनाडाई नागरिक शामिल थे। इनमें 103 पुरुष, 114 महिलाएं, 11 बच्चे और 2 नवजात थे। इसके अलावा, 12 क्रू मेंबर्स भी विमान में मौजूद थे। मृतकों में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी भी शामिल थे, जिनकी इस हादसे में मौत ने पूरे राज्य को झकझोर दिया।
पीएम मोदी और गृहमंत्री ने लिया जायजा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार सुबह अहमदाबाद पहुंचे और सबसे पहले हादसे की जगह का दौरा किया। इसके बाद वे असरवा सिविल अस्पताल गए, जहां उन्होंने करीब 10 मिनट तक पीड़ितों और उनके परिजनों से मुलाकात की। वहीं, गृहमंत्री अमित शाह ने गुरुवार को विश्वास से अस्पताल में मुलाकात की और उनकी हालत का जायजा लिया।
पीएम मोदी ने अपनी X पोस्ट में लिखा, “आज अहमदाबाद में हादसे की जगह का दौरा किया। तबाही का मंजर देखकर मन व्यथित हो गया। राहत और बचाव कार्य में लगी टीमों और अधिकारियों से मुलाकात की, जो दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। इस त्रासदी में अपनों को खोने वाले परिवारों के प्रति हमारी गहरी संवेदनाएं हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “यह विमान हादसा हम सभी के लिए एक गहरा सदमा है। इतने लोगों की अचानक और दर्दनाक मौत को शब्दों में बयां करना असंभव है। जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, हम उनके दर्द को समझते हैं। इस हादसे से जो खालीपन आया है, उसे भरने में सालों लग जाएंगे।”
विश्व नेताओं ने जताया दुख
ब्रिटेन के महाराजा चार्ल्स तृतीय और महारानी कैमिला ने इस हादसे पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा, “हम अहमदाबाद में हुई इस भयावह घटना से स्तब्ध हैं। हमारी संवेदनाएं पीड़ितों और उनके परिवारों के साथ हैं।” विश्व के कई अन्य नेताओं ने भी इस हादसे पर शोक व्यक्त किया और भारत के साथ एकजुटता दिखाई।
अहमदाबाद का यह विमान हादसा हाल के वर्षों में भारत में हुआ सबसे भयावह हादसा है। विश्वास कुमार रमेश का जिंदा बचना निश्चित रूप से एक चमत्कार है, लेकिन इस हादसे ने सैकड़ों परिवारों को हमेशा के लिए तोड़ दिया है। जांच एजेंसियां इस हादसे के कारणों का पता लगाने में जुटी हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। सरकार और प्रशासन राहत कार्यों में लगे हैं, लेकिन जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई शायद कभी न हो सके।



