
ICICI Bank minimum balance Rule 2025 ; देश के प्रमुख निजी बैंकों में से एक ICICI Bank ने अपने नए बचत खातों (Savings Account) के लिए Minimum Account Balance (MAB) की लिमिट में बड़ा बदलाव किया है। अब मेट्रो और शहरी इलाकों में खोले जाने वाले नए सेविंग अकाउंट में ग्राहकों को कम से कम ₹50,000 का औसत मासिक बैलेंस (Average Monthly Balance) रखना अनिवार्य होगा। इससे पहले यह सीमा सिर्फ ₹10,000 थी। नया नियम 1 अगस्त 2025 से लागू होगा और यह केवल उन खातों पर लागू होगा जो इस तारीख के बाद खोले जाएंगे। यदि कोई ग्राहक निर्धारित सीमा से कम बैलेंस रखता है, तो उसे Penalty Charges का सामना करना पड़ सकता है।
ग्रामीण और सेमी-अर्बन इलाकों में भी बढ़ा बैलेंस का नियम
ICICI savings account 50,000 balance rule : ICICI बैंक ने केवल मेट्रो और शहरों में ही नहीं, बल्कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी (Semi-Urban) इलाकों के लिए भी Minimum Balance की लिमिट बढ़ा दी है।
- मेट्रो और शहरी क्षेत्र: पहले ₹10,000, अब ₹50,000
- सेमी-अर्बन क्षेत्र: पहले ₹5,000, अब ₹25,000
- ग्रामीण क्षेत्र: पहले ₹2,500, अब ₹10,000
इस बदलाव के बाद ICICI बैंक देश का वह पहला बड़ा बैंक बन गया है, जिसके सेविंग अकाउंट में सबसे ज्यादा Minimum Account Balance रखने की अनिवार्यता है।

10 साल बाद हुआ बड़ा बदलाव
ICICI Bank MAB increase news : बैंक ने 2015 के बाद पहली बार MAB की लिमिट में बदलाव किया है। पिछले एक दशक में यह सीमा स्थिर रही थी, लेकिन अब बैंकिंग सेक्टर में बढ़ते ऑपरेशनल कॉस्ट, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश और बढ़ती सर्विस डिमांड के कारण बैंक ने यह निर्णय लिया है।
पहले:
- मेट्रो/शहरी: ₹10,000
- सेमी-अर्बन: ₹5,000
- ग्रामीण: ₹2,500
अब:
- मेट्रो/शहरी: ₹50,000
- सेमी-अर्बन: ₹25,000
- ग्रामीण: ₹10,000
ग्राहकों पर इसका असर
ICICI Bank penalty charges for low balance इस फैसले से नए ग्राहक, खासकर वे लोग जो मेट्रो और बड़े शहरों में बैंक अकाउंट खोलना चाहते हैं, उन्हें अपने खाते में लगातार ऊंचा बैलेंस बनाए रखना होगा। यदि किसी महीने बैलेंस तय सीमा से कम हो जाता है, तो बैंक Non-Maintenance Charges वसूलेगा। हालांकि, बैंक के अनुसार यह बदलाव नए खातों पर ही लागू होगा, पुराने ग्राहकों के लिए मौजूदा नियम ही लागू रहेंगे।
बैंक का तर्क
ICICI Bank rural minimum balance ICICI बैंक ने बयान में कहा कि यह कदम ग्राहकों को बेहतर बैंकिंग अनुभव देने और बैंक की सेवाओं को तकनीकी रूप से और उन्नत बनाने के लिए उठाया गया है।
बैंक का कहना है कि बढ़ते साइबर सिक्योरिटी खर्च, डिजिटल बैंकिंग प्लेटफॉर्म के विस्तार, और पर्सनलाइज्ड सर्विस उपलब्ध कराने के लिए अधिक पूंजी की आवश्यकता है, जिसे बैलेंस की नई सीमा से मैनेज किया जाएगा।
भारतीय बैंकों में MAB के नियम — एक तुलना
1. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI)
- Minimum Balance: 2020 से सभी सेविंग अकाउंट के लिए कोई MAB जरूरी नहीं।
- नियम: BSBDA और जनधन खाते Zero Balance हैं। पेनल्टी का कोई प्रावधान नहीं।
2. पंजाब नेशनल बैंक (PNB)
- Minimum Balance: जुलाई 2025 से कोई MAB Penalty नहीं।
- नियम: Financial Inclusion को बढ़ावा देने के लिए Zero Balance Account उपलब्ध।
3. HDFC बैंक
- Minimum Balance:
- मेट्रो: ₹10,000
- छोटे शहर: ₹5,000
- ग्रामीण: ₹2,500
- Penalty: अधिकतम ₹600। अप्रैल 2025 में संभावित बढ़ोतरी।
4. एक्सिस बैंक
- Minimum Balance:
- मेट्रो: ₹12,000
- छोटे शहर: ₹5,000
- ग्रामीण: ₹2,500
- Penalty: खाता प्रकार पर निर्भर। Zero Balance खाते भी उपलब्ध।
5. बैंक ऑफ बड़ौदा
- Minimum Balance: जुलाई 2025 से नॉर्मल सेविंग अकाउंट में कोई पेनल्टी नहीं। प्रीमियम खातों में ₹500–₹2,000 (स्थान के आधार पर)।
- नियम: कुछ खातों में Zero Balance विकल्प उपलब्ध।
पेनल्टी चार्जेस पर नजर
RBI के नियमों के अनुसार, बैंक MAB मेंटेन न करने पर ग्राहकों से रुपये में निश्चित या प्रतिशत के आधार पर पेनल्टी ले सकते हैं। ICICI बैंक में यह चार्ज बैलेंस की कमी और खाते के प्रकार पर निर्भर करेगा।
देशभर में पिछले 5 साल में 11 सरकारी बैंकों ने MAB नियम का पालन न करने पर ग्राहकों से करीब ₹9,000 करोड़ Penalty Charges वसूले हैं।
ग्राहकों के लिए विकल्प
- Zero Balance Account खोलें: जिन ग्राहकों के लिए ऊंचा बैलेंस मेंटेन करना मुश्किल है, वे BSBDA, जनधन या सैलरी अकाउंट जैसे जीरो बैलेंस ऑप्शन चुन सकते हैं।
- Auto Sweep Facility: कुछ बैंक आपको आपके अतिरिक्त बैलेंस को FD में बदलने की सुविधा देते हैं, जिससे बैलेंस भी मेंटेन होता है और ब्याज भी ज्यादा मिलता है।
- Digital Banking Use करें: डिजिटल लेन-देन से कई तरह के चार्ज कम किए जा सकते हैं।
बदलते बैंकिंग ट्रेंड
ICICI बैंक का यह कदम बैंकिंग सेक्टर में बढ़ते Competition और बदलते Business Model को भी दर्शाता है। निजी बैंक अब अधिक हाई-वैल्यू ग्राहकों को टारगेट कर रहे हैं, जो अधिक बैलेंस रखने में सक्षम हों।
इसके साथ ही, बैंक का फोकस अब केवल Deposits पर नहीं, बल्कि Wealth Management, Insurance, Investment Products और Digital Services की ओर भी बढ़ रहा है।



