
Panchayat Election New Rules : राजस्थान की राजनीति और स्थानीय स्वशासन से जुड़ा एक अहम विषय अब नई दिशा में जाता दिखाई दे रहा है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि पंचायतीराज संस्थाओं और शहरी निकायों के चुनाव में उम्मीदवारों के लिए शैक्षणिक योग्यता (Educational Qualification) अनिवार्य करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। यानी अनपढ़ या कम पढ़े-लिखे व्यक्ति भी पहले की तरह चुनाव लड़ सकेंगे।
इसके साथ ही एक और महत्वपूर्ण मुद्दे पर सरकार ने विधानसभा में लिखित जवाब देकर स्थिति स्पष्ट की है। दो से अधिक संतान (More than two children) वाले लोगों पर जो चुनाव लड़ने की रोक वर्षों से लागू है, उसे हटाने के लिए संशोधन प्रस्ताव (Amendment Proposal) विधि विभाग (Law Department) में प्रक्रियाधीन है। यदि यह संशोधन पारित होता है तो तीन या उससे अधिक बच्चों वाले व्यक्ति भी सरपंच, प्रधान, पार्षद, चेयरमैन और मेयर जैसे पदों के लिए चुनावी मैदान में उतर सकेंगे। यह जानकारी कांग्रेस विधायक पूसाराम गोदारा द्वारा विधानसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार की ओर से लिखित रूप में दी गई है। खास बात यह है कि पहली बार सरकार ने इन दोनों संवेदनशील मुद्दों पर औपचारिक और स्पष्ट जवाब दिया है।
विधायक के सवाल पर सरकार का स्पष्ट रुख
Rajasthan Sarpanch Eligibility 2026 : विधायक पूसाराम गोदारा ने सरकार से पूछा था कि क्या निकाय चुनावों में उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता और संतान संबंधी नियमों में संशोधन करने पर विचार किया जा रहा है? इसके जवाब में सरकार ने राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 (Rajasthan Municipalities Act, 2009) की धारा 21 का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान कानून में शैक्षणिक योग्यता से जुड़ा कोई प्रावधान नहीं है और इस विषय में कोई नया नियम लागू करने का प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। वहीं, दो से अधिक बच्चों वाले व्यक्तियों को चुनाव लड़ने की अनुमति देने के सवाल पर सरकार ने बताया कि राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धारा 24 में संशोधन के लिए फाइल विधि विभाग को भेजी जा चुकी है, जो फिलहाल प्रक्रिया में है।
30 साल पुराना नियम अब बदलने की तैयारी
Rajasthan Municipal Election Qualification Rule : राजस्थान में दो से अधिक बच्चों वाले व्यक्तियों पर चुनाव लड़ने की रोक का नियम आज से लगभग 30 वर्ष पहले लागू किया गया था। वर्ष 1994-95 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत की सरकार के दौरान राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 बनाया गया था। इसी कानून के तहत यह प्रावधान जोड़ा गया कि जिन जनप्रतिनिधियों के दो से अधिक बच्चे होंगे, वे पंचायत और निकाय चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।इतना ही नहीं, यदि कोई जनप्रतिनिधि चुनाव जीतने के बाद तीसरे बच्चे का पिता या माता बनता है, तो उसे पद से हटाने तक का प्रावधान भी इस कानून में शामिल किया गया था। तब से लेकर अब तक इस नियम में किसी प्रकार की ढील नहीं दी गई थी।
कर्मचारियों को पहले मिल चुकी है राहत
Rajasthan Mayor Election Eligibility Update : सरकार पहले भी दो से अधिक संतान से जुड़े नियमों में शिथिलता दे चुकी है। वर्ष 2002 में एक कानून लागू किया गया था, जिसके तहत दो से अधिक बच्चे होने पर सरकारी नौकरी (Government Job) नहीं मिलती थी। साथ ही नौकरी के दौरान तीसरा बच्चा होने पर पांच साल तक प्रमोशन रोकने (Promotion Ban) का नियम लागू था। इसके अलावा, यदि किसी कर्मचारी ने सेवा में रहते हुए तीन से अधिक बच्चे पैदा किए, तो उसके लिए अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement) तक का प्रावधान था। हालांकि, वर्ष 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की सरकार ने इस नियम में राहत देते हुए कई प्रावधानों को समाप्त कर दिया था। प्रमोशन रोकने की अवधि को भी पांच साल से घटाकर तीन साल कर दिया गया था।

अब निकाय और पंचायत चुनावों में भी राहत की तैयारी
Rajasthan Nikay Chunav Latest News : अब सरकार उसी तर्ज पर पंचायतीराज और नगर निकाय चुनावों में भी नियमों में बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाती दिखाई दे रही है। यदि विधि विभाग से संशोधन को मंजूरी मिलती है और यह बिल विधानसभा में पारित हो जाता है, तो यह स्थानीय लोकतंत्र (Local Democracy) में एक बड़ा बदलाव माना जाएगा। इस बदलाव के बाद ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग, जो अब तक केवल संतान संबंधी नियमों के कारण चुनाव नहीं लड़ पा रहे थे, वे भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी कर सकेंगे।
शैक्षणिक योग्यता को लेकर भी सरकार का रुख साफ
देश के कई राज्यों में पंचायत और निकाय चुनावों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता लागू की गई है, लेकिन राजस्थान सरकार ने फिलहाल इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाने का संकेत दिया है। सरकार का मानना है कि लोकतंत्र में भागीदारी का अधिकार सभी को समान रूप से मिलना चाहिए, चाहे वह शिक्षित हो या अशिक्षित। इस फैसले से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले उन लोगों को राहत मिलेगी, जो शिक्षा के अवसरों से वंचित रहे, लेकिन सामाजिक रूप से सक्रिय और प्रभावशाली भूमिका निभाते हैं।
स्थानीय राजनीति पर पड़ेगा बड़ा असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि दो संतान वाला नियम हटता है, तो आगामी पंचायत और निकाय चुनावों में उम्मीदवारों की संख्या और सामाजिक विविधता दोनों बढ़ेंगी। इससे चुनावी समीकरण (Electoral Equations) भी बदल सकते हैं। कई अनुभवी सामाजिक कार्यकर्ता और पूर्व जनप्रतिनिधि, जो अब तक इस नियम के कारण चुनावी दौड़ से बाहर थे, वे फिर से सक्रिय राजनीति में लौट सकते हैं।
