
Rajasthan Budget 2026 : राजस्थान की भजनलाल सरकार 11 फरवरी को विधानसभा में वर्ष 2026-27 का बजट पेश करने जा रही है। लेकिन बजट से ठीक पहले सामने आ रहे वित्तीय आंकड़े राज्य की आर्थिक सेहत को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। बीते पांच वर्षों में प्रदेश पर कर्ज का बोझ जिस तेज़ी से बढ़ा है, उसने वित्तीय विशेषज्ञों, अर्थशास्त्रियों और नीति विश्लेषकों की चिंता बढ़ा दी है। स्थिति यह है कि मार्च 2022 में जहां कुल कर्ज लगभग 3.53 लाख करोड़ रुपए था, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 7.26 लाख करोड़ रुपए के आसपास पहुंच चुका है और आगामी बजट अनुमानों में इसके 8 लाख करोड़ रुपए की मनोवैज्ञानिक सीमा को पार करने की आशंका जताई जा रही है।
5 साल में दोगुना से ज्यादा हुआ कर्ज
Rajasthan government debt 8 lakh crore : राज्य के वित्तीय रिकॉर्ड पर नजर डालें तो कर्ज बढ़ने की रफ्तार बेहद तीव्र रही है।
- मार्च 2022: 3,53,556 करोड़ रुपए
- वर्ष 2023-24: 5,71,638 करोड़ रुपए
- वर्ष 2024-25: 6,41,740 करोड़ रुपए
- वर्तमान प्रोजेक्शन: 7.26 लाख करोड़ रुपए
यदि यही ट्रेंड जारी रहा, तो 11 फरवरी को पेश होने वाले बजट में यह आंकड़ा 8 लाख करोड़ रुपए के पार पहुंच सकता है। इसका अर्थ है कि विकास योजनाओं के लिए लिया गया उधार अब स्वयं वित्तीय चुनौती का रूप लेता जा रहा है।

प्रति व्यक्ति कर्ज बना चिंता का सबसे बड़ा कारण
Budget Analysis and Research Center, Jaipur के अनुसार सबसे गंभीर पहलू ‘Per Capita Debt’ यानी प्रति व्यक्ति कर्ज है।
- वर्ष 2021-22 में प्रति नागरिक औसत कर्ज: ₹45,000
- वर्ष 2025-26 में प्रति नागरिक कर्ज: ₹88,000
- बजट के बाद संभावित आंकड़ा: ₹90,000 से अधिक
यानी महज चार वर्षों में हर नागरिक पर कर्ज का बोझ लगभग दोगुना हो चुका है।
कमाई से ज्यादा खर्च, Fixed Expenditure का दबाव
Rajasthan per capita debt increase : सरकार की आय का बड़ा हिस्सा अब विकास कार्यों की बजाय Fixed Expenditure में खर्च हो रहा है।
- वेतन मद में खर्च (2025-26 अनुमान): ₹83,775 करोड़ (10% वृद्धि)
- पेंशन मद में खर्च: ₹40,000 करोड़ के करीब (12% वार्षिक वृद्धि)
यह तेजी से बढ़ता खर्च भविष्य में राज्य के लिए ‘Financial Time Bomb’ साबित हो सकता है।
ब्याज भुगतान: पुराने कर्ज का बोझ
Rajasthan fiscal deficit latest news : बढ़ते कर्ज का सबसे बड़ा असर ब्याज भुगतान पर दिखाई देता है। 2025-26 में केवल ब्याज चुकाने के लिए ₹40,058 करोड़ का प्रावधान रखा गया है। अर्थात सरकार जितना नया उधार ले रही है, उसका बड़ा हिस्सा पुराने कर्ज का ब्याज चुकाने में ही समाप्त हो रहा है।
राजस्व घटा, केंद्र से ग्रांट भी कम
पिछले वर्ष की तुलना में इस बार राज्य के Revenue Collection में गिरावट दर्ज की गई है। वहीं केंद्र सरकार से मिलने वाला अनुदान लक्ष्य का केवल 25% ही प्राप्त हुआ है। इससे केंद्र प्रायोजित योजनाओं की गति भी प्रभावित हुई है।
Market Borrowing पर बढ़ती निर्भरता
Rajasthan budget financial crisis : राजस्थान सरकार अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर Market Borrowing का सहारा ले रही है। ऊंची ब्याज दरों के दौर में यह रणनीति भविष्य के लिए जोखिमपूर्ण साबित हो सकती है।
पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) की धीमी रफ्तार
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि उधार लेकर यदि सड़क, बिजली, उद्योग, अस्पताल जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च किया जाए तो वह आय का स्रोत बनता है। लेकिन जब वही उधार वेतन, पेंशन और ब्याज में खर्च हो, तो राज्य ‘Debt Trap’ की ओर बढ़ने लगता है।
आगामी बजट से क्या उम्मीद?
11 फरवरी को पेश होने वाले बजट में सरकार के सामने कई चुनौतियां होंगी—
- कर्ज की सीमा को नियंत्रित करना
- आय के नए स्रोत विकसित करना
- विकास कार्यों की गति बनाए रखना
- राजनीतिक और सामाजिक संतुलन साधना
विशेषज्ञों की नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार किस तरह Fiscal Discipline, Revenue Generation और Expenditure Management के बीच संतुलन स्थापित करती है।
