
LOCKDOWN NEWS INDIA : देश में लॉकडाउन लगने की अटकलों और पेट्रोल-डीजल व गैस की कमी की अफवाहों के बीच केंद्र सरकार ने शुक्रवार को बड़ा बयान जारी करते हुए स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी। सरकार ने कहा कि देश में लॉकडाउन जैसी कोई स्थिति नहीं है और न ही इस तरह का कोई प्रस्ताव विचाराधीन है। सरकार के अनुसार, सभी रिफाइनरियां 100 फीसदी या उससे अधिक क्षमता के साथ काम कर रही हैं और देश में क्रूड ऑयल, पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता बनी हुई है।
सरकार ने यह भी बताया कि देश में एलपीजी उत्पादन में 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है, ताकि घरेलू और आवश्यक क्षेत्रों में आपूर्ति निर्बाध बनी रहे। 14 मार्च से अब तक करीब 30 हजार टन कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति की जा चुकी है। इस दौरान रेस्टोरेंट, ढाबों और जरूरी सेवाओं से जुड़े प्रतिष्ठानों को प्राथमिकता दी गई है। पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुझाता शर्मा ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि लोगों को किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि देश में ईंधन और गैस की पर्याप्त उपलब्धता है, इसलिए लोग केवल जरूरत के मुताबिक ही खरीदारी करें और बेवजह पेट्रोल पंपों या गैस एजेंसियों पर भीड़ न लगाएं। उन्होंने बताया कि भारत की एलपीजी आपूर्ति का बड़ा हिस्सा होर्मुज मार्ग से आता रहा है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण सप्लाई चेन पर दबाव जरूर बना है, लेकिन सरकार ने समय रहते जरूरी कदम उठाकर घरेलू जरूरतों को सुरक्षित रखा है। उन्होंने यह भी कहा कि अफवाहों के कारण कई जगह पेट्रोल पंपों पर अनावश्यक भीड़ देखी गई, जबकि वास्तविकता यह है कि देश में किसी तरह की कमी नहीं है।
एलपीजी और ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता का दावा
NO LOCKDOWN IN INDIA : सुझाता शर्मा ने कहा कि देश में अगले दो महीनों के लिए पर्याप्त क्रूड स्टॉक उपलब्ध है। साथ ही एलपीजी, एलएनजी और पीएनजी की स्थिति भी संतोषजनक बनी हुई है। सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है, ताकि आम लोगों को किसी भी तरह की परेशानी न हो। उन्होंने बताया कि भारत की आयात निर्भरता अधिक होने के कारण लगभग 90 प्रतिशत एलपीजी आयात होर्मुज के रास्ते आता है। ऐसे में पश्चिम एशिया के तनाव का असर पड़ना स्वाभाविक है, लेकिन इसके बावजूद सरकार ने सप्लाई व्यवस्था को नियंत्रण में रखा है।

पहले रोकी गई कमर्शियल सप्लाई, फिर धीरे-धीरे बहाल
LPG PRODUCTION INCREASE INDIA : सरकार ने शुरुआत में कमर्शियल एलपीजी सप्लाई पर अस्थायी रोक लगाई थी, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरतों को प्राथमिकता दी जा सके। बाद में हालात को देखते हुए कमर्शियल सप्लाई को चरणबद्ध तरीके से बहाल किया गया। पहले 20 प्रतिशत, फिर 10 प्रतिशत की अतिरिक्त वृद्धि, उसके बाद 50 प्रतिशत और अब इसे बढ़ाकर 70 प्रतिशत तक कर दिया गया है। 14 मार्च से अब तक लगभग 30 हजार टन कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति की जा चुकी है। इससे होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों और अन्य व्यावसायिक इकाइयों को राहत मिली है।
रेस्टोरेंट, ढाबों और माइग्रेंट लेबर को दी गई प्राथमिकता
LPG SUPPLY NEWS INDIA : सरकार ने साफ किया कि इस चुनौतीपूर्ण दौर में रेस्टोरेंट, ढाबे, होटल, औद्योगिक कैंटीन और प्रवासी मजदूरों को प्राथमिकता के आधार पर गैस उपलब्ध कराई गई। इसके अलावा स्टील, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, डाई, केमिकल और प्लास्टिक उद्योगों के लिए भी आवश्यक आपूर्ति सुनिश्चित की गई। सुझाता शर्मा ने बताया कि प्रवासी मजदूरों के लिए करीब 30 हजार छोटे 5 किलो वाले सिलेंडर भी वितरित किए गए, ताकि उन्हें रसोई गैस की कमी का सामना न करना पड़े।
पेट्रोल पंपों पर दिखी भीड़, लेकिन कमी नहीं
सरकार ने कहा कि देश में क्रूड, पेट्रोल और डीजल की पर्याप्त उपलब्धता है। एलपीजी, एलएनजी और पीएनजी की सप्लाई भी पूरी तरह सुरक्षित है। कुछ स्थानों पर अफवाहों के कारण पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें जरूर देखने को मिलीं, लेकिन वास्तव में किसी भी उत्पाद की कमी नहीं है। सरकार के अनुसार, भले ही भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई हो, लेकिन यह सुनिश्चित किया गया है कि देश में ईंधन की कमी न होने पाए।
कालाबाजारी पर सख्ती, हजारों जगह छापेमारी
PETROL DIESEL SUPPLY INDIA : सुझाता शर्मा ने बताया कि सरकार ने जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए सख्त कार्रवाई भी की है। उन्होंने कहा कि एक दिन में करीब 3 हजार जगहों पर रेड की गई, 1500 सिलेंडर जब्त किए गए और 350 डिस्ट्रीब्यूटर्स को शो-कॉज नोटिस जारी किए गए। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अफवाहों से दूर रहें, जरूरत के मुताबिक ही खरीदारी करें और पेट्रोल पंपों या गैस सप्लाई केंद्रों पर अनावश्यक लंबी लाइनें न लगाएं।
पश्चिम एशिया संकट पर नजर रखने के लिए बनी कमेटी
इधर, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के असर को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे। इसमें गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी समेत कई अन्य मंत्री शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य इस कमेटी के जरिए पश्चिम एशिया के हालात, ऊर्जा आपूर्ति, कच्चे तेल की कीमतों और देश के भीतर आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता पर लगातार नजर बनाए रखना है।
तीन केंद्रीय मंत्रियों ने लॉकडाउन की अफवाहों को किया खारिज
लॉकडाउन की अफवाहें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुछ दिन पहले संसद में दिए गए बयान के बाद तेज हुईं। उन्होंने वैश्विक परिस्थितियों को चुनौतीपूर्ण बताया था, जिसके बाद कई तरह की आशंकाएं सामने आने लगीं। हालांकि शुक्रवार को केंद्र सरकार के तीन वरिष्ठ मंत्रियों ने एक सुर में स्पष्ट कर दिया कि कोविड जैसा लॉकडाउन नहीं लगेगा।
किरेन रिजिजू ने कहा- घबराने की जरूरत नहीं
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि यह अफवाहें कौन फैला रहा है, यह समझ से बाहर है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने साफ कहा था कि घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार ने जमाखोरों को चेतावनी दी है और राज्य सरकारों से कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति होर्डिंग न करे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारत सरकार की स्थिति पर पूरी पकड़ है और आम लोगों को परेशानी न हो, इसके लिए शीर्ष स्तर से निगरानी की जा रही है।
हरदीप सिंह पुरी बोले- लॉकडाउन का कोई प्रस्ताव नहीं
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी लॉकडाउन की अटकलों को पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने कहा कि सरकार के स्तर पर ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में सभी को शांत, जिम्मेदार और एकजुट रहने की जरूरत है। उनके मुताबिक अफवाह फैलाना और बेवजह डर का माहौल बनाना गैर-जिम्मेदाराना है।
निर्मला सीतारमण ने भी दिया भरोसा
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि कुछ नेताओं द्वारा लॉकडाउन और फ्यूल की कमी की बातें करना चिंताजनक है। उन्होंने साफ कहा कि कोविड काल जैसा लॉकडाउन नहीं लगेगा। उन्होंने लोगों को भरोसा दिलाया कि देश में आपूर्ति व्यवस्था पर सरकार की पूरी नजर है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है।
विपक्ष के बयानों से बढ़ी सियासी हलचल
इस मुद्दे पर विपक्ष की ओर से भी बयान सामने आए हैं। राहुल गांधी ने कहा था कि प्रधानमंत्री ने कोविड जैसे समय की बात की है, लेकिन कोविड के दौरान हुई त्रासदी को भुलाया नहीं जा सकता। वहीं, मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी महामारी के समय हुई भारी जनहानि और संकट का जिक्र करते हुए सवाल उठाए।
इन बयानों के बाद राजनीतिक माहौल भी गरमा गया, लेकिन सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि मौजूदा हालात गंभीर जरूर हैं, पर देश में लॉकडाउन जैसी स्थिति नहीं बनने दी जाएगी।
पुतिन ने भी जताई थी चिंता
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी कहा था कि खाड़ी क्षेत्र में चल रहे युद्ध के असर का अनुमान लगाना आसान नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी थी कि इसके परिणाम वैश्विक स्तर पर गंभीर हो सकते हैं और इसकी तुलना कोविड महामारी के प्रभाव से की जा सकती है।
सरकार का संदेश- अफवाहों से बचें, संयम रखें
कुल मिलाकर, केंद्र सरकार ने साफ शब्दों में कहा है कि देश में लॉकडाउन नहीं लगेगा और पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, एलएनजी तथा पीएनजी की पर्याप्त उपलब्धता बनी हुई है। सरकार ने एलपीजी उत्पादन बढ़ाकर और सप्लाई को प्राथमिकता के आधार पर व्यवस्थित कर हालात को नियंत्रित रखने की कोशिश की है।
सरकार का स्पष्ट संदेश है कि लोग अफवाहों पर ध्यान न दें, केवल जरूरत भर की खरीदारी करें और किसी भी तरह की घबराहट से बचें। पश्चिम एशिया के हालात पर सरकार लगातार नजर बनाए हुए है और आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।



