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LPG cylinder ban : अब सिलेंडर नहीं चलेगा! 90 दिन में पाइप गैस नहीं ली तो बंद होगी LPG सप्लाई

Parmeshwar Singh Chundwat March 25, 2026 1 minute read

LPG cylinder ban : देश में रसोई गैस व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा बदलाव किया है। यदि आपके इलाके में गैस पाइपलाइन पहुंच चुकी है, तो आने वाले समय में आपको पाइप्ड नेचुरल गैस यानी PNG कनेक्शन लेना अनिवार्य हो सकता है। सरकार के नए नियमों के मुताबिक, सूचना मिलने के बाद भी अगर कोई उपभोक्ता 90 दिन के भीतर PNG कनेक्शन नहीं लेता, तो उसकी LPG सिलेंडर सप्लाई बंद की जा सकती है। इस फैसले को मिडिल-ईस्ट में जारी युद्ध, गैस आपूर्ति संकट और बढ़ती मांग के बीच एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।

देश में इस समय एलपीजी कनेक्शनों की संख्या करीब 33.2 करोड़ बताई जा रही है, जबकि PNG कनेक्शन अभी केवल 1.65 करोड़ के आसपास हैं। ऐसे में सरकार अब पाइप गैस नेटवर्क को तेजी से बढ़ाना चाहती है, ताकि घरेलू गैस आपूर्ति को अधिक स्थिर और व्यवस्थित बनाया जा सके।

सरकार ने लागू किया नया डिस्ट्रीब्यूशन ऑर्डर

natural gas distribution order 2026 : केंद्र सरकार ने ‘नेचुरल गैस एंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूशन ऑर्डर 2026’ लागू किया है। इसके तहत जिन इलाकों में पाइपलाइन बिछ चुकी है या बिछाई जा रही है, वहां गैस कनेक्शन व्यवस्था में कई अहम बदलाव किए गए हैं। अब पाइप वाली गैस को प्राथमिकता दी जाएगी और उपभोक्ताओं को तय समयसीमा में PNG अपनाना होगा।

नए नियमों के मुताबिक, किसी इलाके में पाइपलाइन चालू होने और उपभोक्ताओं को सूचना दिए जाने के बाद 90 दिन की अवधि शुरू होगी। इस अवधि के भीतर संबंधित घरों को PNG कनेक्शन लेना होगा। यदि उपभोक्ता ऐसा नहीं करता, तो उसकी LPG सप्लाई रोकने की कार्रवाई की जा सकती है।

सोसायटी और RWA अब नहीं कर पाएंगे देरी

PNG connection news : नए आदेश में हाउसिंग सोसायटी और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन यानी RWA की भूमिका को भी स्पष्ट किया गया है। पहले कई बार पाइपलाइन बिछाने का काम सोसायटी या आरडब्ल्यूए के विरोध के कारण अटक जाता था, लेकिन अब ऐसा करना आसान नहीं होगा।

यदि कोई अधिकृत कंपनी पाइपलाइन बिछाने के लिए रास्ता या अनुमति मांगती है, तो संबंधित सोसायटी को 3 दिन के भीतर मंजूरी देनी होगी। यदि वह अनावश्यक देरी करती है या अनुमति देने से इनकार करती है, तो वहां रहने वाले घरों की LPG सप्लाई प्रभावित हो सकती है। सरकार ने इस प्रावधान के जरिए पाइपलाइन विस्तार में बाधाओं को कम करने की कोशिश की है।

छोटे और बड़े नेटवर्क के लिए तय की गई समयसीमा

gas connection rule : पाइपलाइन परियोजनाओं में अक्सर सरकारी मंजूरियां सबसे बड़ी अड़चन बनती रही हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए सरकार ने समयबद्ध मंजूरी की व्यवस्था लागू की है।

नए नियमों के अनुसार, छोटे नेटवर्क के लिए 10 दिन के भीतर और बड़े पाइपलाइन नेटवर्क के लिए 60 दिन के भीतर मंजूरी देना जरूरी होगा। यदि संबंधित विभाग तय अवधि में कोई जवाब नहीं देता, तो उसे ‘डीम्ड क्लियरेंस’ यानी स्वचालित मंजूरी माना जाएगा। इसके बाद कंपनी काम शुरू कर सकेगी। सरकार का मानना है कि इससे परियोजनाएं वर्षों तक अटकने के बजाय समय पर पूरी हो सकेंगी।

जमीन और मुआवजे के विवाद में भी नया फॉर्मूला

LPG cylinder surrender rule : पाइपलाइन परियोजनाओं में निजी जमीनों से जुड़ी अड़चनें भी अक्सर काम को लंबा खींच देती थीं। इसे देखते हुए सरकार ने मुआवजे की प्रक्रिया को भी सरल बनाने की कोशिश की है। यदि पाइपलाइन किसी निजी जमीन से गुजरती है, तो अब मुआवजा तय करने के लिए सर्किल रेट के आधार पर एक निश्चित फॉर्मूला लागू किया जाएगा। इससे लंबे समय तक विवाद और मुकदमेबाजी की संभावना कम होगी। यदि जमीन मालिक सहमत नहीं होता, तो जिला कलेक्टर हस्तक्षेप कर परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया सुनिश्चित करेंगे, ताकि गैस आपूर्ति में देरी न हो।

सरकार का दावा- सुरक्षा और सुविधा दोनों बढ़ेंगी

सरकार ने यह आदेश आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत जारी किया है। सरकार का कहना है कि युद्ध जैसे हालात या गैस आपूर्ति संकट के समय भी घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता बनी रहे, इसके लिए यह कदम जरूरी है।

PNG को लेकर सरकार और विशेषज्ञों का तर्क है कि यह एलपीजी सिलेंडर की तुलना में अधिक सुविधाजनक है। उपभोक्ता को बार-बार सिलेंडर बुक करने, डिलीवरी का इंतजार करने या सिलेंडर खत्म होने की चिंता नहीं करनी पड़ती। बिल उपयोग के हिसाब से बनता है, जिससे खर्च भी अपेक्षाकृत नियंत्रित रह सकता है। वहीं इसे आम तौर पर अधिक सुरक्षित विकल्प भी माना जाता है।

हालांकि इस व्यवस्था का दूसरा पक्ष भी है। जो लोग अपनी पसंद से LPG सिलेंडर का उपयोग करना चाहते थे, उनके विकल्प अब सीमित हो जाएंगे। यानी जहां PNG उपलब्ध है, वहां आगे चलकर सिलेंडर पर निर्भरता खत्म करनी पड़ सकती है।

PNG कनेक्शन वालों को LPG सिलेंडर नहीं मिलेगा

सरकार ने 14 मार्च को ही पाइप्ड नेचुरल गैस उपयोगकर्ताओं को लेकर अलग से नए नियम जारी किए थे। इन नियमों के अनुसार, यदि किसी घर में PNG कनेक्शन है, तो वहां LPG सिलेंडर रखना मान्य नहीं होगा। ऐसे उपभोक्ताओं को अपना एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना पड़ेगा।

नए आदेश के तहत PNG उपयोगकर्ताओं को न तो नया LPG कनेक्शन दिया जाएगा और न ही पुराने सिलेंडर की रिफिलिंग की अनुमति होगी। यानी एक बार पाइप गैस कनेक्शन लेने के बाद सिलेंडर का विकल्प लगभग समाप्त माना जाएगा।

LPG संकट के बीच सरकार ने चरणबद्ध तरीके से किए कई बदलाव

घरेलू गैस संकट और बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार पिछले कुछ समय से लगातार नए नियम लागू कर रही है। मार्च महीने में भी कई अहम बदलाव किए गए। 6 मार्च को घरेलू LPG सिलेंडर की बुकिंग के लिए 21 दिन का लॉक-इन पीरियड लागू किया गया। इसका मतलब यह था कि एक सिलेंडर मिलने के 21 दिन बाद ही दूसरा सिलेंडर बुक कराया जा सकेगा। 9 मार्च को मांग बढ़ने के कारण शहरों में यह लॉक-इन अवधि बढ़ाकर 25 दिन कर दी गई। 12 मार्च को ग्रामीण क्षेत्रों के लिए सिलेंडर बुकिंग के बीच का अंतर और बढ़ाकर 45 दिन कर दिया गया। इसके बाद 14 मार्च को पेट्रोलियम मंत्रालय ने PNG उपयोगकर्ताओं के लिए LPG सिलेंडर रखना गैर-कानूनी घोषित कर दिया। इसके तहत पाइप गैस वाले उपभोक्ताओं को अपना सिलेंडर सरेंडर करना होगा और वे रिफिलिंग भी नहीं करा सकेंगे।

उपभोक्ताओं के मन में उठ रहे हैं ये बड़े सवाल

नए नियमों के बाद आम लोगों के बीच कई सवाल सामने आ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अभी तुरंत सिलेंडर लौटाना होगा? इसका जवाब है- नहीं। जब तक आपके इलाके में पाइपलाइन सक्रिय नहीं होती और आपको आधिकारिक सूचना नहीं मिलती, तब तक तुरंत सिलेंडर लौटाने की जरूरत नहीं है। नोटिस मिलने के बाद ही 90 दिन की समयसीमा शुरू होगी।

दूसरा सवाल यह है कि क्या PNG, LPG से सस्ती होती है? आमतौर पर PNG का बिल उपभोग के आधार पर आता है और इसे एलपीजी की तुलना में किफायती तथा सुविधाजनक माना जाता है। हालांकि वास्तविक खर्च उपयोग और स्थानीय दरों पर भी निर्भर करेगा।

तीसरा सवाल यह है कि अगर किसी घर तक तकनीकी कारणों से पाइपलाइन पहुंचाना संभव न हो तो क्या होगा? ऐसे मामलों में उपभोक्ता की LPG सप्लाई बंद नहीं की जाएगी। यह नियम केवल उन्हीं घरों पर लागू होगा, जहां पाइपलाइन पहुंचाना व्यावहारिक और तकनीकी रूप से संभव है।

आने वाले समय में बदल सकती है घरेलू गैस व्यवस्था

सरकार के इस फैसले से साफ संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले समय में देश की घरेलू गैस व्यवस्था धीरे-धीरे पाइपलाइन आधारित मॉडल की ओर बढ़ सकती है। जिन शहरों और कस्बों में गैस पाइपलाइन नेटवर्क उपलब्ध है, वहां LPG सिलेंडर की भूमिका कम होती जा सकती है। उपभोक्ताओं के लिए यह बदलाव सुविधा और मजबूरी, दोनों का मिश्रण साबित हो सकता है।

एक तरफ इससे सिलेंडर बुकिंग, डिलीवरी और आपूर्ति संकट जैसी परेशानियां कम हो सकती हैं, वहीं दूसरी ओर उपभोक्ताओं के पास ईंधन चुनने की स्वतंत्रता सीमित भी हो सकती है। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार इस व्यवस्था को किस तरह लागू करती है और आम लोग इसे किस रूप में स्वीकार करते हैं।

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Parmeshwar Singh Chundwat

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Parmeshwar Singh Chundwat ने डिजिटल मीडिया में कॅरियर की शुरुआत Jaivardhan News के कुशल कंटेंट राइटर के रूप में की है। फोटोग्राफी और वीडियो एडिटिंग में उनकी गहरी रुचि और विशेषज्ञता है। चाहे वह घटना, दुर्घटना, राजनीतिक, सामाजिक या अपराध से जुड़ी खबरें हों, वे SEO आधारित प्रभावी न्यूज लिखने में माहिर हैं। साथ ही सोशल मीडिया पर फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स, थ्रेड्स और यूट्यूब के लिए छोटे व बड़े वीडियो कंटेंट तैयार करने में निपुण हैं।

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