
ACB Action : प्रदेश भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो अलर्ट मोड पर है, तभी आए दिन अलग अलग सरकारी महकमों के अधिकारी व कार्मिक रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़े जा रहे हैं। एसीबी ने कई सरकारी दफ्तरों में चल रहे भ्रष्टाचार को बेपर्दा किया है। इसी के तहत एसीबी ने दौसा स्थित राजस्थान पथ परिवहन निगम के रोडवेज डिपो प्रबंधक को 20 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। इससे Roadways Depot Dausa में हड़कंप मच गया। आरोप है कि एक कंडक्टर की Medical Leave पास करने की एवज में यह रिश्वत राशि ली गई थी। शिकायत के बाद ACB ने पूरा जाल बिछाया, मांग का सत्यापन होने के बाद रंगे हाथ पकड़ लिया।
Anti Corruption Bureau की यह कार्रवाई इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि यह मामला किसी ठेके, भुगतान या बड़े टेंडर से नहीं, बल्कि रोडवेज के ही एक कर्मचारी की Medical Leave जैसे सामान्य और वैध अधिकार से जुड़ा है। यानी सरकारी व्यवस्था में आम कर्मचारी का जायज काम भी रिश्वत के बिना आगे नहीं बढ़ रहा था। यही कारण है कि इस कार्रवाई की चर्चा पूरे क्षेत्र में तेजी से हो रही है और Roadways विभाग में भी हड़कंप मच गया है। इससे पूरे सरकारी सिस्टम पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की इस कार्रवाई से रिश्वतखोर अफसर व कार्मिकों की पोलपट्टी लगातार उजागर हो रही है, ठीक है, मगर चिंताजनक भी है।
देखिए यह है पूरा मामला
Medical Leave : रोडवेज कंडक्टर ने ACB Helpline 1064 पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता ने बताया कि वह दिसतंबर 2025 में बीमार होने के कारण Medical Leave पर गया था। इलाज और स्वास्थ्य लाभ के बाद वह 19 January 2026 को वापस ड्यूटी पर लौट आया। ड्यूटी जॉइन करने के बाद उसने अपने चिकित्सा दस्तावेज और Medical Certificate कार्यालय में जमा करवा दिए। यह कागजात उसने दफ्तर के बाबू भगवत को सौंपे थे, ताकि उसकी छुट्टी नियमों के अनुसार स्वीकृत हो सके। लेकिन जब परिवादी ने अपनी Medical Leave पास करवाने के लिए Depot Manager विश्राम मीणा से संपर्क किया, तो मामला सामान्य प्रक्रिया से आगे बढ़ने के बजाय रिश्वत की मांग तक पहुंच गया। आरोप है कि Medical Leave स्वीकृत करने के बदले आरोपी अधिकारी ने 20,000 रुपए की मांग रख दी। इतना ही नहीं, शिकायतकर्ता को यह भी महसूस कराया कि यदि वह रकम नहीं देगा, तो उसका काम अटकाया जाएगा और उसे आगे भी परेशान किया जा सकता है।
ACB Trap का बनाया प्लान
Arrested for taking bribe : शिकायत मिलने के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो अलवर की टीम सक्रिय हुई। एसीबी के महानिदेशक गोविंद गुप्ता के निर्देशन में शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पहले उसकी गोपनीय जांच करवाई गई। इसके बाद उप अधीक्षक शब्बीर खान के नेतृत्व में टीम ने पूरे प्रकरण का सत्यापन करवाया। 2 April और 7 April को आरोपी द्वारा रिश्वत मांगने की पुष्टि की गई। जब एसीबी को पर्याप्त आधार मिल गया, तब पूरी योजना के तहत 8 April 2026 को रंगे हाथ रिश्वत लेते पकड़ा गया। उप महानिरीक्षक अनिल कयाल के सुपरविजन में कार्रवाई की गई। जैसे ही शिकायतकर्ता ने आरोपी विश्राम मीणा को 20 हजार रुपए सौंपे, पहले से तैयार ACB टीम ने मौके पर ही उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। यह ACB Action in Dausa इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसमें रिश्वत की मांग का पहले सत्यापन किया गया और फिर कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए Trap बिछाया गया। इससे केस और मजबूत माना जा रहा है।

आरोपी कौन है और अब आगे क्या?
Rajasthan News : रिश्वत लेते गिरफ्तार आरोपी विश्राम मीणा मूल रूप से महुवा के समलेटी का निवासी है। गिरफ्तारी के बाद एसीबी की टीम उससे लगातार पूछताछ कर रही है। इसके साथ ही आरोपी के घर और अन्य संभावित ठिकानों पर भी तलाशी की कार्रवाई की जा रही है। ACB यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या इस पूरे मामले में कोई और कर्मचारी, बाबू या विभागीय व्यक्ति भी शामिल था। जांच एजेंसी अब इस एंगल पर भी काम कर रही है कि क्या यह केवल एक अकेला रिश्वत प्रकरण था या फिर विभाग के भीतर लंबे समय से ऐसा कोई सिस्टम चल रहा था, जिसमें कर्मचारियों के काम अटकाकर उनसे पैसा लिया जाता हो। अगर जांच में और नाम सामने आते हैं, तो यह मामला Roadways विभाग के लिए और बड़ा बन सकता है।
इस मामले ने क्यों बढ़ाई चिंता?
Crime News Rajasthan : यह मामला सिर्फ 20 हजार रुपए रिश्वत तक सीमित नहीं है। असल चिंता यह है कि एक सरकारी कर्मचारी, जो बीमारी के कारण छुट्टी पर गया था, उसे अपने ही वैध दस्तावेज पास करवाने के लिए परेशान किया गया। इससे साफ संकेत मिलता है कि सिस्टम में कहीं न कहीं ऐसी प्रवृत्ति मौजूद है, जहां नियमों का इस्तेमाल सुविधा देने के बजाय दबाव बनाने के लिए किया जाता है। Medical Leave जैसी प्रक्रिया किसी भी कर्मचारी का अधिकार होती है। अगर इसी के बदले रिश्वत मांगी जाए, तो यह न केवल सेवा नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सरकारी तंत्र की साख पर भी सीधा सवाल है। यही वजह है कि इस कार्रवाई को आमजन और कर्मचारियों के बीच बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।
कोई रिश्वत मांगे तो 1064 पर करें शिकायत
सीबी के महानिदेशक गोविंद गुप्ता ने बताया कि राजस्थान में किसी भी सरकारी कार्यालय में कोई कार्मिक व अधिकारी रिश्वत की मांग करता है, तो तत्काल 1064 पर कॉल कर शिकायत की जा सकती है। इसके अलाव मोबाइल नंबर 9413502834 के वाट्सएप पर लिखित शिकायत भी की जा सकती है। वाट्सएप कॉल भी किया जा सकता है। उसके बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा तत्परता से रिश्वत लेने वाले आरोपी को रंगे हाथ गिरफ्तार करने की कार्रवाई की जाएगी। दौसा का यह मामला भी इसी बात का उदाहरण माना जा रहा है कि अगर शिकायतकर्ता हिम्मत दिखाए और सही मंच पर सूचना दे, तो भ्रष्टाचार के खिलाफ ठोस कार्रवाई हो सकती है।



