
Hindustan Zinc Sakhi project : ग्रामीण महिलाओं के हाथों से तैयार उत्पाद अब दिल्ली-एनसीआर के बड़े रिटेल स्टोर्स और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म तक पहुंच चुके हैं। हिन्दुस्तान जिंक की सखी परियोजना से जुड़ी महिलाओं द्वारा संचालित ब्रांड ‘दायची’ अब मॉर्डन बाजार और ब्लिंकिट जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध है। यह उपलब्धि न केवल ग्रामीण महिला उद्यमिता की बड़ी सफलता है, बल्कि यह भी दिखाती है कि गांवों में तैयार उत्पाद अब महानगरों के उपभोक्ताओं तक मजबूती से पहुंच रहे हैं।
भारत की एकमात्र और दुनिया की सबसे बड़ी एकीकृत जिंक उत्पादक कंपनी हिन्दुस्तान जिंक ने अपनी सखी पहल के माध्यम से राजस्थान की ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मुकाम हासिल किया है। महिलाओं द्वारा संचालित ‘दायची – द बेस्ट फ्रॉम रूरल इंडिया’ ब्रांड अब दिल्ली-एनसीआर के प्रतिष्ठित रिटेल स्टोर्स और क्विक डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स तक पहुंच चुका है। दायची ब्रांड के तहत उच्च गुणवत्ता वाले एफएमसीजी उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला उपलब्ध है। इनमें अचार, शहद, मसाले, दालें, नमकीन, तेल और घी जैसे उत्पाद शामिल हैं। इन सभी वस्तुओं को ग्रामीण महिला उद्यमियों द्वारा तैयार और संचालित किया जाता है। संगठित रिटेल क्षेत्र में इस तरह की एंट्री, ग्रामीण उत्पादकों को शहरी बाजार से जोड़ने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण और प्रेरक कदम माना जा रहा है।
हिन्दुस्तान जिंक के सीईओ अरुण मिश्रा ने क्या कहा
rural women brand Rajasthan : इस उपलब्धि पर हिन्दुस्तान जिंक के सीईओ एवं पूर्णकालिक निदेशक अरुण मिश्रा ने कहा कि कंपनी का उद्देश्य महिलाओं के नेतृत्व वाले छोटे उद्योगों को मुख्यधारा के बाजार से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि दायची का बड़े रिटेल स्टोर्स और ब्लिंकिट जैसे प्लेटफॉर्म पर पहुंचना ग्रामीण समुदायों की आजीविका को सशक्त करने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
26,800 से अधिक महिलाओं को मिला सशक्तिकरण
Daaychi on Blinkit : हिन्दुस्तान जिंक के ग्रामीण आजीविका कार्यक्रम के तहत संचालित सखी पहल ने अब तक 26,800 से अधिक महिलाओं को सशक्त बनाया है। यह कार्य फेडरेशन, ग्राम संगठन, स्वयं सहायता समूह और एमएसएमई जैसे जमीनी स्तर के संस्थानों के माध्यम से किया जा रहा है। इसके साथ ही 300 से अधिक सखी नेतृत्व वाली समितियां और फेडरेशन प्रबंधक प्रबंधन, निगरानी, आजीविका संवर्धन और जागरूकता निर्माण के जरिए सामुदायिक संस्थाओं को मजबूती दे रहे हैं। इससे गांवों में महिला नेतृत्व को नई पहचान और ताकत मिल रही है।
5 सिलाई यूनिट से बढ़कर 14 प्रोडक्शन यूनिट तक पहुंचा सफर

women empowerment Rajasthan : सखी परियोजना के अंतर्गत माइक्रो एंटरप्राइज प्रोग्राम ने वर्ष 2018-19 में महज 5 सिलाई यूनिट्स से शुरुआत की थी। उस समय इसमें 81 महिलाएं जुड़ी थीं और लगभग 86 उत्पाद तैयार किए जाते थे। आज यह पहल बढ़कर 14 प्रोडक्शन यूनिट्स तक पहुंच गई है, जिसमें 400 से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं। अब इस ब्रांड के अंतर्गत फूड और टेक्सटाइल कैटेगरी में 300 से अधिक उत्पाद शामिल हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में इस पहल ने 2.60 करोड़ रुपए का राजस्व अर्जित किया है, जो इसकी तेजी से बढ़ती सफलता का प्रमाण है।
ई-कॉमर्स में भी मजबूत मौजूदगी
Rajasthan women entrepreneurs : दायची ब्रांड ने अपना एक अलग ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ‘हार्ट्स विथ फिंगर्स’ भी विकसित किया है। इसके अलावा यह अमेजन, फ्लिपकार्ट और ओएनडीसी जैसे प्रमुख डिजिटल मार्केटप्लेस पर भी उपलब्ध है। इससे ब्रांड को डिजिटल खरीदारी के बढ़ते चलन का लाभ मिल रहा है और वह अधिक से अधिक ग्राहकों तक पहुंच बना पा रहा है।

राष्ट्रीय स्तर पर भी मिल चुकी है पहचान
सखी परियोजना को राष्ट्रीय स्तर पर भी उल्लेखनीय पहचान मिली है। इस पहल ने अब तक चार बड़े पुरस्कार हासिल किए हैं। इनमें महिलाओं के सशक्तिकरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए बिजनेस वर्ल्ड और स्कोच जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार शामिल हैं। इसके साथ ही इस परियोजना ने आईआईटीएफ और जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल जैसे बड़े मंचों पर भी अपनी विशेष पहचान बनाई है। इतना ही नहीं, उपाया के तहत इसका टेक्सटाइल कलेक्शन भी लॉन्च किया गया है। विशेष बात यह रही कि सखी परियोजना से जुड़ी महिलाओं ने मुंबई के काला घोड़ा फेस्टिवल में पहली बार भाग लिया, जहां उनके उत्पादों को काफी सराहना मिली।
ब्लिंकिट और मॉर्डन बाजार पर आना क्यों है खास
आज के समय में क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर ग्राहकों की निर्भरता तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में दायची उत्पादों का ब्लिंकिट और मॉर्डन बाजार जैसे प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध होना एक सुनियोजित और दूरदर्शी रणनीति मानी जा रही है। यह कदम महिलाओं द्वारा संचालित व्यवसायों के लिए मुख्यधारा के बाजार में प्रवेश का नया रास्ता खोलता है और उनके उत्पादों को व्यापक उपभोक्ता वर्ग तक पहुंचाता है। दिल्ली-एनसीआर में सफल लॉन्च के बाद अब इस पहल का लक्ष्य अन्य बड़े बाजारों में भी विस्तार करना है।
2300 से अधिक गांवों में सामाजिक बदलाव का प्रयास
हिन्दुस्तान जिंक विभिन्न सामाजिक पहलों और सामुदायिक विकास कार्यक्रमों के माध्यम से व्यापक सामाजिक परिवर्तन की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है। कंपनी शिक्षा को बढ़ावा देने, कौशल विकास, रोजगार सृजन, महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभा रही है। कंपनी के ये प्रयास 2,300 से अधिक गांवों में 23 लाख से ज्यादा लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। हिन्दुस्तान जिंक सामुदायिक भागीदारी के साथ समावेशी विकास और दीर्घकालिक सामाजिक प्रभाव को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।



