
Rajsamand land fraud case : राजसमंद जिले में जमीन हड़पने का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक 86 वर्षीय जीवित बुजुर्ग को सरकारी रिकॉर्ड में मृत दर्शाकर उसकी लाखों रुपए कीमत की जमीन दूसरे लोगों के नाम कर दी गई। इतना ही नहीं, बाद में उस जमीन की रजिस्ट्री कर उसे बेच भी दिया गया। इस पूरे प्रकरण ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली और दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले में अब कांकरोली थाना पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस प्रकरण में एक विधवा महिला, उसकी बेटियां, जमीन खरीदने वाला व्यक्ति, खमनोर तहसीलदार और संबंधित पटवारियों के नाम सामने आए हैं। कांकरोली थाना प्रभारी सरोज बैरवा के अनुसार टांटोल निवासी 86 वर्षीय केशुलाल पुत्र परथा बलाई ने इस संबंध में रिपोर्ट दर्ज करवाई है। रिपोर्ट में बताया गया कि उन्होंने वर्ष 2000 में राज्यावास क्षेत्र में एक जमीन खरीदी थी और तब से जमीन उनके नाम दर्ज है। इसी बीच भैंसाकमेड़ पंचायत के मनोहरपुरा गांव में भी केशुलाल बलाई नाम का एक अन्य व्यक्ति था, जिसकी मृत्यु 9 दिसंबर 1982 को हो चुकी थी। आरोप है कि मृत व्यक्ति की पत्नी केशीबाई ने उसी पुराने मृत्यु प्रमाण पत्र के आधार पर खमनोर तहसीलदार कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत किया। आवेदन में दावा किया गया कि राज्यावास स्थित जमीन उसके दिवंगत पति की है और उसका नामांतरण उसके तथा उसकी बेटियों के नाम किया जाए।
गांव अलग, पहचान अलग… फिर भी हो गया नामांतरण
Fake death certificate land scam Rajsamand : मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि दोनों व्यक्तियों के गांव अलग-अलग थे। एक व्यक्ति टांटोल गांव का निवासी था, जबकि दूसरा मनोहरपुरा, भैंसाकमेड़ पंचायत का रहने वाला था। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों ने दस्तावेजों की गहराई से जांच नहीं की। रिपोर्ट के अनुसार खमनोर तहसीलदार ने बिना पर्याप्त सत्यापन किए आवेदन स्वीकार कर लिया और टांटोल निवासी जीवित केशुलाल बलाई की जमीन का नामांतरण भैंसाकमेड़ निवासी केशीबाई और उनकी दो बेटियों के नाम कर दिया। अब सवाल यह उठ रहा है कि जिस व्यक्ति की मौत वर्ष 1982 में हो चुकी थी, उसके नाम पर वर्ष 2000 में खरीदी गई जमीन का रिकॉर्ड कैसे तैयार हो गया और अधिकारियों ने यह गंभीर तथ्य क्यों नहीं जांचा।

नामांतरण के बाद जमीन बेच दी गई
Rajsamand latest crime news : पीड़ित वृद्ध का आरोप है कि नामांतरण प्रक्रिया पूरी होने के बाद उक्त जमीन नाथद्वारा निवासी बंशीलाल को बेच दी गई। जमीन की बाकायदा रजिस्ट्री भी करवा दी गई। इस पूरे घटनाक्रम में राज्यावास निवासी दिलीप खारोल का नाम भी सामने आया है। पीड़ित ने आरोप लगाया कि सभी लोगों ने मिलकर फर्जी दस्तावेजों और गलत जानकारी के आधार पर जमीन हड़पने की साजिश रची।
राजस्व विभाग की भूमिका पर उठे सवाल
Alive man declared dead for land : मामला सामने आने के बाद अब राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नाम, गांव और रिकॉर्ड का सही तरीके से मिलान किया जाता तो इतनी बड़ी गड़बड़ी कभी नहीं होती। लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि आखिर बिना जीवित व्यक्ति की जांच और सत्यापन के जमीन का नामांतरण कैसे कर दिया गया। वहीं यह मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक लापरवाही और मिलीभगत की आशंका भी जताई जा रही है।
पुलिस ने शुरू की जांच
Rajsamand police investigation : कांकरोली थाना पुलिस ने पीड़ित की रिपोर्ट पर मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब नामांतरण प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों, मृत्यु प्रमाण पत्र, जमीन खरीद रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि पूरे मामले में किस स्तर पर लापरवाही हुई और क्या इसमें जानबूझकर फर्जीवाड़ा किया गया।
बुजुर्ग ने मांगा न्याय
86 वर्षीय केशुलाल बलाई ने प्रशासन से न्याय की मांग की है। उनका कहना है कि वे वर्षों से जमीन के वास्तविक मालिक हैं, लेकिन फर्जी दस्तावेजों के जरिए उनकी संपत्ति हड़प ली गई। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और जमीन वापस दिलाने की मांग की है। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और पुलिस सभी पक्षों से पूछताछ कर रही है।



