
राजसमंद : Rajsamand Petrol Diesel Shortage : अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव का असर अब राजसमंद जिले में पेट्रोल-डीजल की सप्लाई पर साफ दिखाई देने लगा है। मांग के मुकाबले कम आपूर्ति होने से जिले के 165 पेट्रोल पंपों में से 70 से अधिक पंप रोजाना ड्राई हो रहे हैं। हालात यह हैं कि कई जगह वाहन चालकों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में ईंधन की किल्लत और ज्यादा गहराने लगी है।
Rajsamand Fuel Supply News : जानकारी के अनुसार जिले में प्रतिदिन करीब सवा 8 लाख लीटर डीजल की खपत होती है, लेकिन कंपनियों से केवल 5 लाख लीटर डीजल ही मिल पा रहा है। इसी तरह 3 लाख लीटर पेट्रोल की दैनिक मांग के मुकाबले महज 2 लाख लीटर पेट्रोल की सप्लाई हो रही है। मांग और आपूर्ति के बीच लगातार बढ़ते इस अंतर ने परिवहन, खेती और आमजन की दिनचर्या पर असर डालना शुरू कर दिया है। राजसमंद पेट्रोलियम डीलर्स वेलफेयर संस्थान के महासचिव हेमंत लढ्ढा ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय संकट के कारण प्रमुख तेल कंपनियों को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है। बीपीसीएल, एचपीसीएल और आईओसीएल जैसी कंपनियों से मांग के अनुसार स्टॉक नहीं मिलने से कई पेट्रोल पंप संचालकों को बीच-बीच में पंप बंद रखने पड़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों और सप्लाई चेन पर असर पड़ने से घरेलू बाजार में ईंधन उपलब्धता प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में देखने को मिल रहा है।

खेती और परिवहन क्षेत्र पर बढ़ी चिंता
Diesel Shortage India 2026 : डीजल की कमी से सबसे ज्यादा चिंता खेती और परिवहन क्षेत्र में बढ़ी है। जिले में हर दिन करीब सवा 3 लाख लीटर डीजल की कमी बनी हुई है। वहीं पेट्रोल में भी प्रतिदिन 1 लाख लीटर की कमी दर्ज की जा रही है। कई पंपों पर सीमित मात्रा में ईंधन दिया जा रहा है, जिससे वाहन चालकों की परेशानी बढ़ती जा रही है। Fuel Supply Crisis Rajsamand
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से अटकी तेल की सप्लाई
Crude Oil Crisis Impact : इजराइल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें और शिपिंग लागत प्रभावित हुई हैं। भारत की तेल कंपनियों को तय घरेलू दरों पर ईंधन बेचने में नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसी वजह से कंपनियां मांग के अनुरूप पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति नहीं कर पा रही हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर किल्लत बढ़ रही है।



