
Petrol Export Duty Reduced : केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाली एक्सपोर्ट ड्यूटी में कमी करने का फैसला किया है। सरकार की ओर से शनिवार को जारी अधिसूचना के अनुसार नई दरें 1 जून से प्रभावी हो जाएंगी। हालांकि घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर लागू मौजूदा एक्साइज ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ऐसे में देश के आम उपभोक्ताओं को फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में किसी तरह की राहत या अतिरिक्त बोझ का सामना नहीं करना पड़ेगा।
जारी अधिसूचना के मुताबिक पेट्रोल के निर्यात पर अब 1.50 रुपये प्रति लीटर एक्सपोर्ट ड्यूटी लागू होगी। वहीं डीजल के निर्यात पर यह दर 13.50 रुपये प्रति लीटर निर्धारित की गई है। इसके अलावा हवाई जहाजों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन ATF पर 9.50 रुपये प्रति लीटर की एक्सपोर्ट ड्यूटी तय की गई है। सरकार का कहना है कि इन दरों का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार और घरेलू जरूरतों के बीच संतुलन बनाए रखना है, ताकि देश में ईंधन की उपलब्धता प्रभावित न हो और तेल कंपनियों के मुनाफे तथा आपूर्ति व्यवस्था के बीच संतुलन बना रहे। पेट्रोलियम उत्पादों पर लगने वाली एक्सपोर्ट ड्यूटी की दरें स्थायी नहीं होतीं। सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और ATF की कीमतों की नियमित निगरानी करती है। इसी आधार पर लगभग हर 15 दिन में इन दरों की समीक्षा कर आवश्यक बदलाव किए जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर रिफाइनिंग कंपनियों की कमाई और निर्यात पर पड़ता है। ऐसे में सरकार समय-समय पर ड्यूटी दरों में संशोधन कर घरेलू बाजार को संतुलित रखने का प्रयास करती है।
हाल ही में बढ़े थे पेट्रोल-डीजल के दाम
ATF Export Duty Reduced : इस बीच तेल विपणन कंपनियों ने 25 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि की थी। उस समय पेट्रोल 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ था। कीमतों में बढ़ोतरी के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल का खुदरा मूल्य 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल का मूल्य 95.20 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया था। हालांकि मौजूदा एक्सपोर्ट ड्यूटी में बदलाव का घरेलू ईंधन कीमतों पर तत्काल कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

मार्च में सरकार ने दी थी बड़ी राहत
Fuel Export Tax India 2026 : इससे पहले 27 मार्च को केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों को नियंत्रित रखने के उद्देश्य से स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) में 10-10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी। उस फैसले के तहत पेट्रोल पर लगने वाली स्पेशल एक्साइज ड्यूटी 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दी गई थी। वहीं डीजल पर लागू 10 रुपये प्रति लीटर की ड्यूटी पूरी तरह समाप्त कर दी गई थी। कटौती से पहले केंद्र सरकार एक लीटर पेट्रोल पर कुल 21.90 रुपये एक्साइज ड्यूटी वसूलती थी। ड्यूटी में कमी के बाद यह घटकर 11.90 रुपये प्रति लीटर रह गई थी। इसी प्रकार डीजल पर कुल केंद्रीय एक्साइज ड्यूटी 17.80 रुपये प्रति लीटर से घटकर 7.80 रुपये प्रति लीटर रह गई थी। सरकार के इस कदम का उद्देश्य उपभोक्ताओं को बढ़ती ईंधन कीमतों से राहत देना और बाजार में मूल्य स्थिरता बनाए रखना था। इसी वजह से उस समय पेट्रोल और डीजल की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी को काफी हद तक रोका जा सका था।
क्या होती है एक्सपोर्ट ड्यूटी?
India Fuel Export Duty Update : एक्सपोर्ट ड्यूटी वह कर (Tax) है, जिसे सरकार देश से बाहर निर्यात किए जाने वाले उत्पादों पर लगाती है। इसका मुख्य उद्देश्य घरेलू बाजार में आवश्यक वस्तुओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना और उनकी कीमतों को नियंत्रित रखना होता है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में किसी उत्पाद की कीमत बहुत अधिक बढ़ जाती है, तो कंपनियां घरेलू बिक्री के बजाय निर्यात को प्राथमिकता दे सकती हैं। ऐसी स्थिति में सरकार एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाकर घरेलू बाजार में आपूर्ति बनाए रखने का प्रयास करती है।
क्यों घटाई-बढ़ाई जाती हैं ड्यूटी दरें?
Petrol Diesel Price Latest News : सरकार अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में होने वाले बदलावों के आधार पर ड्यूटी दरों में संशोधन करती है। यदि वैश्विक बाजार में कीमतें बढ़ती हैं या कंपनियों का निर्यात मुनाफा बहुत अधिक हो जाता है, तो ड्यूटी बढ़ाई जा सकती है। वहीं परिस्थितियां अनुकूल होने पर इसमें कमी भी की जाती है। इस व्यवस्था का मकसद देश में ईंधन की उपलब्धता, तेल कंपनियों की आय और उपभोक्ताओं के हितों के बीच संतुलन बनाए रखना है।
क्या है ATF?
ATF यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल वह विशेष ईंधन है जिसका उपयोग हवाई जहाजों के टर्बाइन इंजनों को चलाने के लिए किया जाता है। यह उच्च गुणवत्ता वाला केरोसिन आधारित ईंधन होता है, जिसे विमानन क्षेत्र की विशेष जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता है। ATF की कीमतों में बदलाव का सीधा असर एयरलाइंस कंपनियों के परिचालन खर्च पर पड़ता है। यही कारण है कि विमानन उद्योग में इसकी कीमतों और उस पर लगने वाले करों को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।



