
E20 Petrol News : केंद्र सरकार देश में ईंधन आयात पर निर्भरता कम करने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से E20 पेट्रोल (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) के उपयोग को लगातार प्रोत्साहित कर रही है। हालांकि, ताजा सर्वेक्षण से यह संकेत मिला है कि आम लोगों के बीच इसे लेकर अभी भी कई तरह की आशंकाएं बनी हुई हैं। खास बात यह है कि केवल विपक्षी समर्थक ही नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ गठबंधन NDA के समर्थकों का भी एक बड़ा वर्ग E20 पेट्रोल को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है।
C-Voter द्वारा किए गए ताजा स्नैप पोल के अनुसार, देशभर के आधे से अधिक लोगों ने E20 पेट्रोल का उपयोग करने से हिचकिचाहट जताई है। लोगों का कहना है कि इस ईंधन के इस्तेमाल से वाहन की माइलेज कम हो सकती है और इंजन की कार्यक्षमता पर भी असर पड़ने की आशंका है। सर्वे में यह भी सामने आया कि कुल 55.1 प्रतिशत लोगों ने E20 पेट्रोल का इस्तेमाल नहीं करने की इच्छा जताई, जबकि केवल 17.1 प्रतिशत लोगों ने इसका समर्थन किया। बाकी लोगों ने इस विषय पर कोई स्पष्ट राय नहीं दी।
NDA समर्थकों ने भी जताई चिंता
E20 Petrol Mileage : सर्वे का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि NDA समर्थकों का बड़ा वर्ग भी E20 पेट्रोल को लेकर पूरी तरह सकारात्मक नहीं दिखा।
आंकड़ों के अनुसार—
- 52.5 प्रतिशत NDA समर्थकों ने कहा कि वे E20 पेट्रोल का उपयोग नहीं करना चाहते।
- केवल 18.1 प्रतिशत लोगों ने इसका समर्थन किया।
- जबकि 29.5 प्रतिशत लोगों ने इस मुद्दे पर कोई राय व्यक्त नहीं की।
वहीं, विपक्षी दलों के समर्थकों में भी 57.9 प्रतिशत लोगों ने E20 पेट्रोल के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई।
सबसे बड़ी चिंता- माइलेज घटने की
E20 Petrol Latest News : सर्वे के अनुसार लोगों की सबसे बड़ी चिंता वाहन की माइलेज को लेकर है। करीब 52.8 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से गाड़ी पहले की तुलना में कम माइलेज देती है। वहीं बड़ी संख्या में लोगों का कहना है कि यदि माइलेज कम होती है तो ईंधन पर होने वाला खर्च भी बढ़ सकता है। हालांकि यह लोगों की धारणा पर आधारित सर्वे है और यह किसी तकनीकी परीक्षण का परिणाम नहीं है।

इंजन को नुकसान होने का भी डर
सर्वे में शामिल 54.2 प्रतिशत लोगों ने आशंका जताई कि E20 पेट्रोल का लगातार उपयोग करने से अधिकांश वाहनों के इंजन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। दूसरी ओर, केवल 10.9 प्रतिशत लोगों का मानना है कि E20 पेट्रोल से इंजन को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता। यही कारण है कि बड़ी संख्या में वाहन मालिक अभी भी इस नए ईंधन को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नजर नहीं आ रहे हैं।
पुरानी गाड़ियों को लेकर बढ़ी चिंता
Ethanol Fuel Survey : सर्वे में पुरानी गाड़ियों के मालिकों की चिंता भी खुलकर सामने आई। करीब 56.3 प्रतिशत लोगों का कहना है कि जिन वाहनों का निर्माण E10 पेट्रोल के अनुरूप किया गया है, उनमें E20 पेट्रोल को अनिवार्य करना उचित फैसला नहीं होगा। लोगों का मानना है कि पुराने इंजन नई मिश्रित ईंधन तकनीक के अनुरूप नहीं हैं, जिससे भविष्य में तकनीकी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
लोगों की मांग- दोनों विकल्प उपलब्ध रहें
सर्वे में सबसे अधिक समर्थन इस सुझाव को मिला कि पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों को दोनों विकल्प उपलब्ध होने चाहिए। करीब 75.9 प्रतिशत लोगों ने कहा कि सामान्य पेट्रोल और E20 पेट्रोल दोनों की बिक्री जारी रहनी चाहिए, ताकि वाहन मालिक अपनी गाड़ी की क्षमता और आवश्यकता के अनुसार ईंधन का चयन कर सकें।
कीमत कम करने की भी मांग
E20 Petrol Vehicle Compatibility लोगों का मानना है कि यदि सरकार E20 पेट्रोल को बढ़ावा देना चाहती है तो इसकी कीमत भी सामान्य पेट्रोल से कम होनी चाहिए।सर्वे के अनुसार 74.5 प्रतिशत लोगों ने कहा कि E20 पेट्रोल सस्ता होना चाहिए। हालांकि दिलचस्प बात यह रही कि कीमत कम होने की स्थिति में भी केवल 40.8 प्रतिशत लोग ही E20 पेट्रोल अपनाने के लिए तैयार दिखाई दिए।
सरकार के दावे पर लोगों की राय
केंद्र सरकार का कहना है कि E20 पेट्रोल के व्यापक उपयोग से देश का कच्चे तेल का आयात कम होगा, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और किसानों को भी एथेनॉल उत्पादन के माध्यम से लाभ मिलेगा। सर्वे में 37.2 प्रतिशत लोगों ने इस दावे से पूरी तरह सहमति जताई, जबकि 19.5 प्रतिशत लोगों ने आंशिक रूप से सरकार की बात का समर्थन किया। वहीं बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी रहे जिन्होंने इस दावे पर पूरी तरह भरोसा नहीं जताया।
कैसे किया गया सर्वे?
यह C-Voter का स्नैप पोल 8 और 9 जुलाई के बीच आयोजित किया गया। इस दौरान देशभर के 1,641 लोगों से टेलीफोन के माध्यम से बातचीत की गई। सर्वे एजेंसी के अनुसार, इसका मार्जिन ऑफ एरर मैक्रो स्तर पर ±3 प्रतिशत और माइक्रो स्तर पर ±5 प्रतिशत है।



