
Dungarpur MP Clash : डूंगरपुर में सोमवार को आयोजित जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा समिति) की बैठक उस समय विवादों में घिर गई, जब बांसवाड़ा-डूंगरपुर सांसद राजकुमार रोत और उदयपुर सांसद डॉ. मन्नालाल रावत के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। बैठक के दौरान माहौल इतना गरमा गया कि दोनों पक्षों में तू-तू, मैं-मैं शुरू हो गई और मामला व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गया। बैठक के बाद उदयपुर सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने लिखित Statement जारी कर बांसवाड़ा सांसद राजकुमार रोत और आसपुर विधायक उमेश डामोर पर गंभीर आरोप लगाए। रावत ने कहा कि बैठक के दौरान उनके साथ अशोभनीय व्यवहार किया गया, उन्हें थप्पड़ मारने की कोशिश की गई और यहां तक कि जान से मारने की धमकी भी दी गई।
“डूंगरपुर को अलगाववाद का टापू बनाना चाहते हैं” – रावत
Mannalal Rawat Rajkumar Roat Controversy : डॉ. मन्नालाल रावत ने आरोप लगाया कि सांसद राजकुमार रोत डूंगरपुर को अलगाववाद का केंद्र बनाने की सोच के साथ राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि रोत का फोकस Development की बजाय केवल राजनीतिक टकराव पर है। रावत ने यह भी आरोप लगाया कि रोत स्कूलों में चलने वाली Mid Day Meal Scheme को बंद कराने जैसा षड्यंत्र रच रहे हैं, जो आदिवासी क्षेत्र के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
दिशा समिति की बैठक में ‘मर्यादा’ टूटी
Disha Committee Meeting Dungarpur : रावत ने कहा कि दिशा समिति की बैठक केंद्र सरकार द्वारा तय किए गए 101 बिंदुओं के Agenda के अनुसार होती है, जिसमें जनता के हित, विकास कार्यों की समीक्षा और अधिकारियों को निर्देश देना मुख्य उद्देश्य होता है। लेकिन बैठक के दौरान बीएपी सांसद राजकुमार रोत बार-बार एजेंडे से हटकर राजनीति करते रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि राजकुमार रोत और विधायक उमेश डामोर ने बैठक में राजनीतिक छिछोरापन दिखाया और माहौल को जानबूझकर खराब किया।
“लड़ाई करनी है तो बाहर आ जाओ” – धमकी का आरोप
Rajkumar Roat Threat Case उदयपुर सांसद ने कहा कि बैठक के दौरान जब उन्होंने एजेंडे से हटकर हो रही चर्चा पर आपत्ति जताई, तो आसपुर विधायक उमेश डामोर ने उन्हें खुलेआम धमकी देते हुए कहा – “अगर लड़ाई करनी है तो बाहर आ जाओ।” रावत ने इसे एक जनप्रतिनिधि के आचरण के खिलाफ बताते हुए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं पर टिप्पणी से भड़के रावत
Udaipur MP Slap Attempt Allegation : डॉ. मन्नालाल रावत ने कहा कि सांसद राजकुमार रोत ने बैठक के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भ्रष्ट बताते हुए आरोप लगाया कि वे राशन का सामान गुजरात ले जाकर बेच देती हैं। रावत ने इसे पूरे आदिवासी अंचल की आंगनबाड़ी बहनों का अपमान बताया और कहा कि इस तरह की टिप्पणी निंदनीय और अस्वीकार्य है।

विकास शिविरों पर सवाल उठाने का आरोप
रावत ने आगे कहा कि राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर गांव-गांव में जनसमस्याओं के समाधान के लिए Development Camps लगाए जा रहे हैं। इन शिविरों से ग्रामीणों की छोटी-छोटी समस्याएं मौके पर ही हल हो रही हैं। लेकिन बैठक में सांसद राजकुमार रोत बार-बार इन शिविरों पर सवाल उठाते रहे कि टेंट का पैसा कहां से आ रहा है, खाने का खर्च कौन उठा रहा है और यह जनता के पैसे की बर्बादी है। रावत ने कहा कि यह मुद्दा बैठक के एजेंडे में शामिल नहीं था और एक जनप्रतिनिधि से इस तरह की बयानबाजी अपेक्षित नहीं है।
राजकुमार रोत का पलटवार – “रावत प्लान के साथ आए थे”
इस पूरे घटनाक्रम पर बांसवाड़ा सांसद राजकुमार रोत ने भी सोमवार शाम को अपना बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत पहले से ही Plan बनाकर बैठक में आए थे और उनका उद्देश्य विवाद खड़ा करना था। रोत ने कहा कि उन्होंने बैठक में Development Works की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा कि वन विभाग के पट्टों के लिए लोग महीनों से चक्कर काट रहे हैं, लेकिन जब वे यह मुद्दा उठा रहे थे, तब सांसद रावत बार-बार टोक रहे थे।
“हमें उकसाया गया” – रोत
राजकुमार रोत ने आरोप लगाया कि सांसद रावत ने जानबूझकर उन्हें उकसाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि पूर्व दिशा समिति की बैठक को रावत द्वारा “कबाड़ा” कहे जाने पर उन्होंने आपत्ति जताई थी, लेकिन इसके बाद भी रावत बार-बार उन्हें बोलने से रोकते रहे। रोत ने दावा किया कि वे पूरी बैठक के दौरान मर्यादित भाषा में बात कर रहे थे, जबकि रावत का व्यवहार आक्रामक था और वे लड़ाई का माहौल बनाना चाहते थे।
