
Family Reunion news : राष्ट्रीय लोक अदालत से निकली यह खबर सिर्फ एक कानूनी निस्तारण की सूचना नहीं, बल्कि रिश्तों, संवेदनाओं और उम्मीद की ऐसी कहानी है, जो हर दिल को छू लेती है। 13 साल पहले शादी के बंधन में बंधा एक दंपती, जो पिछले 7 साल से अलग-अलग जिंदगी जीने को मजबूर था, आखिरकार फिर एक हो गया। मामला तलाक तक पहुंच चुका था, रिश्तों में संवाद टूट चुका था, लेकिन लोक अदालत की काउंसलिंग, समझाइश और मानवीय पहल ने वह कर दिखाया, जो बरसों का विवाद नहीं कर सका। इस फैसले ने सिर्फ पति-पत्नी को नहीं मिलाया, बल्कि उनके 12 साल के बेटे और 7 साल की बेटी को भी उनका बिखरा हुआ पूरा परिवार वापस दे दिया। अदालत परिसर में जब दोनों ने एक-दूसरे को माला पहनाकर साथ रहने का संकल्प लिया, तो यह दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति के लिए बेहद भावुक बन गया।
National Lok Adalat Decision : यह भावुक कर देने वाली घटना बाड़मेर में आयोजित लाेक अदालत की है, जहां न्यायाधीश ने पक्ष व विपक्ष से संवाद किया और दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं को भी शामिल किया। इस तरह दोनों पक्षों से गंभीरता से न्यायाधीश की बात को सुना और समझा, तो वे भावुक हो गए और फिर से साथ रहने के लिए रजामंद हो गए। इस कहानी की सबसे खास बात यह है कि दोनों पति-पत्नी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं और अपने भविष्य को संवारने की कोशिश में जुटे हैं। ऐसे में लोक अदालत ने उनके जीवन को नया मोड़ देते हुए परिवार, बच्चों और रिश्तों की अहमियत को फिर से याद दिलाया। यही नहीं, बाड़मेर की इस लोक अदालत ने पुराने रिकॉर्ड तोड़ते हुए 7690 मामलों का निस्तारण किया और 14.85 करोड़ रुपए की अवार्ड राशि पारित की। यानी यहां सिर्फ फाइलें बंद नहीं हुईं, बल्कि कई घरों में राहत, सुकून और मुस्कान लौटी। यही वजह है कि बाड़मेर लोक अदालत की यह खबर अब सिर्फ राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे देश में मिसाल बन है।
Compensation Award के तहत इस लोक अदालत में कुल 14,85,26,416 रुपए की अवार्ड राशि पारित की गई। एमएसीटी कोर्ट के 48 मामलों में 3.70 करोड़ रुपए से अधिक का हर्जाना मंजूर किया गया। वहीं प्री-लिटिगेशन के 4194 मामलों का समाधान कर 99 लाख रुपए से अधिक की राहत दी गई। यह न सिर्फ कानूनी प्रक्रिया की सफलता है, बल्कि आमजन को समय, धन और मानसिक तनाव से राहत दिलाने वाला बड़ा कदम भी है।
Emotional Story : लोक अदालत में ऑनलाइन सेटलमेंट के जरिए राजस्व मामलों में भी बड़ी उपलब्धि दर्ज की गई। सीमाज्ञान, रास्ते के विवाद और अन्य राजस्व प्रकरणों से जुड़े 96,645 ऑनलाइन प्री-लिटिगेशन मामलों का निस्तारण कर प्रशासन ने मिसाल पेश की। इससे साफ हो गया कि यदि इच्छाशक्ति, समन्वय और संवेदनशीलता हो तो वर्षों पुराने विवाद भी शांतिपूर्वक सुलझाए जा सकते हैं। बाड़मेर की यह पहल न्याय व्यवस्था के आधुनिक और जनहितकारी रूप को सामने लाती है।
Human Touch इस लोक अदालत की सबसे बड़ी पहचान बनकर सामने आया। बिजली विभाग, बैंक, बीमा कंपनियों और अधिवक्ताओं ने मिलकर कई ऐसे विवाद सुलझाए, जो लंबे समय से लोगों को परेशान कर रहे थे। बैंक ऋण, चेक बाउंस, घरेलू विवाद और अन्य मामलों को कोर्ट रूम के बाहर ही आपसी सहमति से सुलझा लिया गया। यही वजह है कि यह आयोजन सिर्फ कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि इंसानियत, संवाद और भरोसे की जीत बन गया।

Justice With Humanity की मिसाल बनी इस लोक अदालत ने यह संदेश दिया कि न्याय केवल सजा देने या आदेश पारित करने का माध्यम नहीं है, बल्कि टूटते रिश्तों, थके हुए चेहरों और परेशान परिवारों को नई उम्मीद देने का रास्ता भी है। बाड़मेर मुख्यालय के साथ चौहटन, गुड़ामालानी, शिव और सेड़वा के मामलों का निस्तारण कर इस लोक अदालत ने पूरे जिले में सकारात्मक संदेश पहुंचाया।
Heartwarming Story : लोक अदालत के माध्यम से न सिर्फ न्यायालय में फाइलों का ढेर कम हुआ, बल्कि लोगों की जिंदगी में राहत, सुकून और विश्वास भी लौटा। इस पूरी प्रक्रिया में उपखण्ड अधिकारी यशार्थ शेखर, वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु भगवान चौधरी, भजनलाल गोदारा, किरण मंगल और बिजली विभाग के अधिवक्ता डॉ. अभय सिंह राठौड़ सहित पूरी टीम ने मिशन मोड में काम किया। उनकी सामूहिक मेहनत ने यह साबित कर दिया कि जब न्याय व्यवस्था संवेदनशील होती है, तब उसका असर समाज पर गहराई से दिखाई देता है।



